कक्षा ८ संस्कृत अध्याय 3 सुभाषितरसं पीत्वा जीवनं सफलं कुरु के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

पाठ का स्वरूप — यह पाठ सुभाषित-संग्रह है। इसमें आठ नीतिश्लोक हैं और हर श्लोक के नीचे पुस्तक ने स्वयं पदच्छेदः (पदों को सन्धि-रहित करके अलग करना), अन्वयः (गद्य-क्रम) और भावार्थः दिया है। इसी क्रम से श्लोक पढ़ना संस्कृत-श्लोक समझने की सही विधि है। चित्र-संवाद (पृष्ठ 24) — पौत्री पितामही से नई कथा माँगती है; पितामही कहती हैं कि आज नीतिश्लोक सुनो। सुष्ठु भाषितानि इति सुभाषितानि — अर्थात् जो वचन सुन्दर ढंग से कहे गए हों, वे सुभाषित हैं; वे सदा लोगों के हित के लिए होते हैं और कर्तव्य-अकर्तव्य का स्पष्ट मार्गदर्शन करते हैं। आठ श्लोकों के विषय — (1) भारतभूमि का गौरव, (2) गुण को गुणी ही पहचानता है, (3) फल से लदा वृक्ष और जल से भरा बादल झुकते हैं — वैसे ही सज्जन समृद्धि में विनम्र रहते हैं, (4) सोने की तरह मनुष्य की भी चार कसौटियाँ, (5) मनुष्य को चमकाने वाले आठ गुण, (6) सच्ची सभा का लक्षण, (7) दुर्ज

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्दः (पाठे प्रयुक्तः)संस्कृत-अर्थःहिन्दी अर्थEnglish
सुभाषितम्सुष्ठु भाषितं वचनम्सुन्दर ढंग से कहा गया वचनWell-spoken saying
सुरत्वात्देवत्वात्देवत्व सेFrom divinity
वेत्तिजानातिजानता हैKnows
पिकःकोकिलःकोयलCuckoo
वायसःकाकःकौआCrow
नम्राःअवनताःझुके हुएBent
फलोद्गमैःफलभारैःफलों के भार सेWith weight of fruits
अनुद्धताःगर्वशून्याःअभिमान से रहितPolite
कनकम्सुवर्णम्सोनाGold
अबहुभाषितामितभाषिताकम और सार्थक बोलनाSpeaking less but meaningfully
अङ्गारःदग्धकाष्ठःअङ्गाराCharcoal
दैवम्भाग्यम्भाग्यLuck
  1. चित्र-संवादः
  2. सुभाषितानि
  3. वयं शब्दार्थान् जानीमः
  4. अत्र इदम् अवधेयम्
  5. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  6. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  7. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  8. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  9. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  10. योग्यताविस्तरः
  11. परियोजनाकार्यम्
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