दीपकम् अध्याय 3 अभ्यासात् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
गीतानि के गायन्ति ?
उत्तर

उत्तरम्देवाः। (देवता गीत गाते हैं।)

आधार: प्रथम श्लोक — गायन्ति देवाः किल गीतकानि। यहाँ ‘गायन्ति’ क्रिया का कर्ता ‘देवाः’ है, इसलिए एकपद उत्तर देवाः ही होगा।
व्याकरण: देवाः — प्रथमा विभक्ति, बहुवचन, पुंल्लिङ्ग। प्रश्न ‘के’ (प्रथमा बहुवचन) है, इसलिए उत्तर भी प्रथमा बहुवचन में ही आएगा — प्रश्न की विभक्ति ही उत्तर की विभक्ति
प्र2.
कः बलं न वेत्ति ?
उत्तर

उत्तरम्निर्बलः। (बलहीन व्यक्ति बल को नहीं जानता।)

आधार: द्वितीय श्लोक — बली बलं वेत्ति न वेत्ति निर्बलः। बलवान् बल को जानता है, बलहीन नहीं जानता।
व्याकरण: निर्बलः — प्रथमा विभक्ति, एकवचन, पुंल्लिङ्ग। प्रश्न ‘कः’ एकवचन में है, अतः उत्तर भी एकवचन में। सावधानी — यहाँ उत्तर ‘मूषकः’ नहीं है; मूषक का सम्बन्ध ‘सिंहस्य बलं’ से है, सामान्य ‘बलं’ से नहीं।
प्र3.
कः वसन्तस्य गुणं वेत्ति ?
उत्तर

उत्तरम्पिकः। (कोयल वसन्त के गुण को जानती है।)

आधार: द्वितीय श्लोक — पिको वसन्तस्य गुणं न वायसः। अर्थात् कोयल वसन्त का गुण जानती है, कौआ नहीं। भावार्थ में पुस्तक कहती है — वसन्तकाले आगते पिकः वसन्तस्य गुणानुरूपं कुहुतानं करोति। परन्तु काकः मधुरं गातुं न शक्नोति।
व्याकरण: पिकः — प्रथमा विभक्ति, एकवचन, पुंल्लिङ्ग। वसन्तस्य — षष्ठी विभक्ति, एकवचन (‘वसन्त का’)।
प्र4.
मूषकः कस्य बलं न वेत्ति ?
उत्तर

उत्तरम्सिंहस्य। (चूहा सिंह के बल को नहीं जानता।)

आधार: द्वितीय श्लोक — करी च सिंहस्य बलं न मूषकः। हाथी सिंह का बल जानता है, चूहा नहीं जान सकता।
व्याकरण: प्रश्न ‘कस्य’ षष्ठी विभक्ति, एकवचन में है, इसलिए उत्तर भी षष्ठी एकवचन में — सिंहस्य (केवल ‘सिंहः’ लिखना अशुद्ध होगा)।
प्र5.
फलोद्गमैः के नम्राः भवन्ति ?
उत्तर

उत्तरम्तरवः। (वृक्ष फलों के भार से झुक जाते हैं।)

आधार: तृतीय श्लोक — भवन्ति नम्रास्तरवः फलोद्गमैः। फल आने पर वृक्ष भार से झुक जाते हैं।
व्याकरण: तरवः — ‘तरु’ (उकारान्त पुंल्लिङ्ग) शब्द का प्रथमा विभक्ति, बहुवचन रूप। फलोद्गमैः — तृतीया विभक्ति, बहुवचन (करण कारक — ‘भार से’)।
प्र6.
केन समं सख्यं न करणीयम् ?
उत्तर

उत्तरम्दुर्जनेन। (दुष्ट व्यक्ति के साथ मित्रता नहीं करनी चाहिए।)

आधार: सप्तम श्लोक — दुर्जनेन समं सख्यं प्रीतिं चापि न कारयेत्। भावार्थ में कहा गया है — दुर्जनेन सह मैत्री न करणीया। यतो हि दुर्जनः विश्वासयोग्यः न भवति।
व्याकरण: प्रश्न ‘केन’ तृतीया विभक्ति, एकवचन में है, अतः उत्तर भी तृतीया एकवचन — दुर्जनेन। ‘समम्’ (साथ) के योग में तृतीया विभक्ति आती है।
प्र7.
केन विना दैवं न सिध्यति ?
उत्तर

उत्तरम्पुरुषकारेण। (पुरुषार्थ के बिना भाग्य नहीं फलता।)

आधार: अष्टम श्लोक — एवं पुरुषकारेण विना दैवं न सिध्यति। जैसे एक पहिये से रथ नहीं चलता, वैसे ही अकेला भाग्य फल नहीं देता।
व्याकरण: पुरुषकारेण — तृतीया विभक्ति, एकवचन। ‘विना’ के योग में द्वितीया, तृतीया अथवा पञ्चमी विभक्ति होती है; श्लोक में तृतीया प्रयुक्त है, अतः वही उत्तर में लिखिए। पुरुषकारः = पुरुषार्थः, उद्यमः (मेहनत)।
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