प्र1.
तरवः कदा नम्राः भवन्ति ?
उत्तर
उत्तरम् — तरवः फलोद्गमैः नम्राः भवन्ति। (वृक्ष तब झुकते हैं जब उन पर फल आ जाते हैं, अर्थात् फलों के भार से वे झुक जाते हैं।)
क्यों: तृतीय श्लोक की पहली पंक्ति ही यह कहती है — भवन्ति नम्रास्तरवः फलोद्गमैः। भावार्थ में पुस्तक स्पष्ट करती है — समयानुसारं वृक्षेषु फलानि जायन्ते। फलभारेण ते वृक्षाः नम्राः भवन्ति। अर्थात् जब वृक्ष सम्पन्न होता है, तभी वह झुकता है — यही श्लोक का असली सन्देश है।
पूर्णवाक्य कैसे बनाएँ: प्रश्न में जो पद हैं (तरवः, नम्राः, भवन्ति) उन्हें उत्तर में रखिए और ‘कदा’ के स्थान पर कारण/समय बताने वाला पद (फलोद्गमैः) जोड़ दीजिए। इससे वाक्य स्वयं पूर्ण हो जाता है।