दीपकम् अध्याय 3 अत्र इदम् अवधेयम्

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
संस्कृतश्लोकेषु प्रतिपद्यं पादचतुष्टयम् अस्ति। छन्दोबद्ध-सस्वरगानशैली अपि अस्ति। — इस कथन को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर

उत्तरम्प्रत्येक संस्कृत श्लोक में चार पाद (चरण) होते हैं और वह किसी न किसी छन्द में बँधा होता है, इसलिए उसे स्वर लगाकर गाया भी जा सकता है।

पद्यम् (श्लोकः) = चत्वारः पादाः
पादः 1 + पादः 2 = प्रथमा पङ्क्तिः (पूर्वार्धः)
पादः 3 + पादः 4 = द्वितीया पङ्क्तिः (उत्तरार्धः)
पादान्ते ‘।’ तथा श्लोकान्ते ‘॥’ चिह्नम्

उदाहरणम् (सप्तमः श्लोकः) —

पादःपाठःअक्षरसंख्या
1दुर्जनेन समं सख्यं8
2प्रीतिं चापि न कारयेत्8
3उष्णो दहति चाङ्गारः8
4शीतः कृष्णायते करम्8
छन्द कैसे पहचानें: पहले हर पाद के अक्षर गिनिए (मात्रा नहीं, अक्षर)। इस पाठ में तीन प्रकार मिलते हैं —
  • 8 अक्षर प्रति पाद → अनुष्टुप् (श्लोक) — श्लोक 7 तथा 8।
  • 11 अक्षर प्रति पाद → उपजाति (इन्द्रवज्रा + उपेन्द्रवज्रा) — श्लोक 1, 5, 6।
  • 12 अक्षर प्रति पाद → वंशस्थ — श्लोक 2, 3, 4।
यही ‘छन्दोबद्धता’ है, और इसी कारण श्लोक सस्वर गाया जा सकता है।
Try This: कक्षा में श्लोक 7 को ताल देकर गाइए — प्रत्येक पाद पर आठ बार ताली। छन्द अपने-आप पकड़ में आ जाएगा।
प्र2.
श्लोकेषु सन्धिसमासयुक्तपदानि भवन्ति। यथा — नम्रास्तरवः, अभ्युपैति, अनुद्धताः, यथाशक्ति। — इनका विग्रह कीजिए और नियम बताइए।
उत्तर

पुस्तक ने चार पद उदाहरण के रूप में दिए हैं। इनका विग्रह इस प्रकार है —

पदम्विग्रहःप्रकारःनियमः
नम्रास्तरवःनम्राः + तरवःसन्धिः (विसर्गसन्धिः)‘आः’ के बाद वर्ग का प्रथम अक्षर (त्) आने पर विसर्ग ‘स्’ में बदल जाता है
अभ्युपैतिअभि + उप + एतिसन्धिः (यण् + वृद्धि)अभि + उप → अभ्युप् (इ + उ = य्); उप + एति → उपैति (अ + ए = ऐ)
अनुद्धताःन उद्धताःसमासःनञ् तत्पुरुष समास — निषेधवाचक ‘न’ पूर्वपद में
यथाशक्तिशक्तिम् अनतिक्रम्यसमासःअव्ययीभाव समास — पूर्वपद अव्यय (यथा), पूरा समस्तपद अव्यय बन जाता है
दोनों में अन्तर: सन्धि केवल ध्वनि का मेल है — दो पद पास-पास आने पर उनकी ध्वनियाँ बदल जाती हैं, अर्थ नहीं बदलता। समास अर्थ का मेल है — दो पद मिलकर एक नया पद बनाते हैं जिसका अपना एक अर्थ होता है। ‘नम्रास्तरवः’ में सन्धि तोड़ने पर दो अलग पद (नम्राः, तरवः) वापस मिल जाते हैं; ‘अनुद्धताः’ में विग्रह करने पर अर्थ खोलना पड़ता है।
प्र3.
पाठे आगतानाम् अन्येषां सन्धियुक्तपदानां विच्छेदं कुरुत। (पाठ के अन्य सन्धियुक्त पदों का विच्छेद कीजिए।)
उत्तर

अभ्यास के लिए इसी पाठ से लिए गए और भी पद —

पदम्सन्धि-विच्छेदःसन्धिः
धन्यास्तुधन्याः + तुविसर्गसन्धिः
फलोद्गमैर्नवाम्बुभिःफलोद्गमैः + नवाम्बुभिःविसर्गसन्धिः (‘ः’ → ‘र्’)
दूरविलम्बिनो घनाःदूरविलम्बिनः + घनाःविसर्गसन्धिः (‘ः’ → ‘ओ’)
स्वभाव एवैषस्वभावः + एव + एषःविसर्गलोपः + वृद्धिसन्धिः (अ + ए = ऐ)
पराक्रमश्चाबहुभाषितापराक्रमः + च + अबहुभाषिताविसर्गसन्धिः (‘ः’ → ‘श्’) + दीर्घसन्धिः
सत्यमस्तिसत्यम् + अस्तिव्यञ्जनसन्धिः (म् → अनुस्वारः/मकारः)
तद्यच्छलमभ्युपैतितत् + यत् + छलम् + अभ्युपैतिव्यञ्जनसन्धिः (त् + य् = द्य्; त् + छ् = च्छ्)
उष्णो दहतिउष्णः + दहतिविसर्गसन्धिः (‘ः’ → ‘ओ’)
चाङ्गारःच + अङ्गारःदीर्घसन्धिः (अ + अ = आ)
ह्येकेनहि + एकेनयण् सन्धिः (इ + ए = य् + ए)
गतिर्भवेत्गतिः + भवेत्विसर्गसन्धिः (‘ः’ → ‘र्’)
Tip: विसर्गसन्धि की सबसे काम की तीन बातें याद रखिए — (1) अः के बाद घोष वर्ण हो तो ‘अः’ → (उष्णः + दहति = उष्णो दहति); (2) इः/ईः/एः के बाद घोष वर्ण हो तो विसर्ग → र् (गतिः + भवेत् = गतिर्भवेत्); (3) आः के बाद घोष वर्ण हो तो विसर्ग लुप्त हो जाता है (धन्याः + ते = धन्या ते)।
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