प्र1.
संस्कृतश्लोकेषु प्रतिपद्यं पादचतुष्टयम् अस्ति। छन्दोबद्ध-सस्वरगानशैली अपि अस्ति। — इस कथन को उदाहरण देकर समझाइए।
उत्तर
उत्तरम् — प्रत्येक संस्कृत श्लोक में चार पाद (चरण) होते हैं और वह किसी न किसी छन्द में बँधा होता है, इसलिए उसे स्वर लगाकर गाया भी जा सकता है।
पद्यम् (श्लोकः) = चत्वारः पादाः
पादः 1 + पादः 2 = प्रथमा पङ्क्तिः (पूर्वार्धः)
पादः 3 + पादः 4 = द्वितीया पङ्क्तिः (उत्तरार्धः)
पादान्ते ‘।’ तथा श्लोकान्ते ‘॥’ चिह्नम्
पादः 1 + पादः 2 = प्रथमा पङ्क्तिः (पूर्वार्धः)
पादः 3 + पादः 4 = द्वितीया पङ्क्तिः (उत्तरार्धः)
पादान्ते ‘।’ तथा श्लोकान्ते ‘॥’ चिह्नम्
उदाहरणम् (सप्तमः श्लोकः) —
| पादः | पाठः | अक्षरसंख्या |
|---|---|---|
| 1 | दुर्जनेन समं सख्यं | 8 |
| 2 | प्रीतिं चापि न कारयेत् | 8 |
| 3 | उष्णो दहति चाङ्गारः | 8 |
| 4 | शीतः कृष्णायते करम् | 8 |
छन्द कैसे पहचानें: पहले हर पाद के अक्षर गिनिए (मात्रा नहीं, अक्षर)। इस पाठ में तीन प्रकार मिलते हैं —
- 8 अक्षर प्रति पाद → अनुष्टुप् (श्लोक) — श्लोक 7 तथा 8।
- 11 अक्षर प्रति पाद → उपजाति (इन्द्रवज्रा + उपेन्द्रवज्रा) — श्लोक 1, 5, 6।
- 12 अक्षर प्रति पाद → वंशस्थ — श्लोक 2, 3, 4।
Try This: कक्षा में श्लोक 7 को ताल देकर गाइए — प्रत्येक पाद पर आठ बार ताली। छन्द अपने-आप पकड़ में आ जाएगा।