प्र1.
गुणी ....................... वेत्ति न वेत्ति निर्गुणः।
उत्तर
उत्तरम् — गुणी गुणं वेत्ति न वेत्ति निर्गुणः। (गुणवान् गुण को जानता है, गुणहीन नहीं जानता।)
चुनाव का आधार: ‘वेत्ति’ सकर्मक क्रिया है, इसे कर्म चाहिए। कर्म द्वितीया विभक्ति में आता है — मञ्जूषा में द्वितीया एकवचन का पद केवल गुणं है। श्लोक 2 से भी यही सिद्ध होता है।