स्रोतः — विष्णुपुराणम्। छन्दः — उपजाति (प्रति पाद 11 अक्षर; इन्द्रवज्रा और उपेन्द्रवज्रा का मिश्रण)। अलङ्कारः — रूपक (भारतभूमि पर ‘स्वर्ग और मोक्ष के मार्ग’ का आरोप) तथा अनुप्रास (भारतभूमिभागे, भवन्ति भूयः में ‘भ’ की आवृत्ति)।
स्वर्गापवर्गास्पद-मार्गभूते। भवन्ति। भूयः। पुरुषाः। सुरत्वात्।
अन्वयः — भारतभूमिभागे (ये) भवन्ति ते धन्याः इति देवाः गीतकानि गायन्ति किल। स्वर्गापवर्गास्पद-मार्गभूते (भारतभूमिभागे) तु (देवाः) सुरत्वात् भूयः पुरुषाः (भवन्ति)।
अर्थः — देवता निश्चय ही यह गीत गाते हैं कि ‘जो भारतभूमि के भाग में जन्म लेते हैं, वे धन्य हैं’। स्वर्ग और मोक्ष — दोनों की प्राप्ति का मार्ग बनी हुई इस भारतभूमि में तो देवता भी अपना देवत्व छोड़कर बार-बार मनुष्य बनते हैं।
| पदम् | अर्थः | हिन्दी |
|---|---|---|
| किल | निश्चयेन | निश्चय ही |
| धन्याः | प्रशंसिताः | प्रशंसा के योग्य |
| अपवर्गः | निर्वाणम् | मोक्ष |
| आस्पदम् | स्थानम् | स्थान, आधार |
| भूयः | पुनः पुनः | बार-बार |
| सुरत्वात् | देवत्वात् | देवत्व से |