दीपकम् अध्याय 4 प्रणम्यो देशभक्तोऽयं गोपबन्धुर्महामनाः के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
पाठारम्भ — चित्रसंवादः (पृष्ठ 36–37) — जलप्लावपीड़ितों की सहायता के लिए शिक्षक और छात्र सभागार में चर्चा करते हैं। हिमानी बताती है कि ओडिशा-राज्य के केन्द्रापडा-जनपद में महानदी में भयङ्कर जलप्लाव (बाढ़) आया , जिससे बड़ी हानि हुई — घर नष्ट हुए, कुछ लोग चिकित्सालय में मृत्यु से जूझ रहे हैं, कुछ अनाहार से कष्ट सह रहे हैं, गृहपालित पशु भी नदी के प्रवाह में बह गए। आदर्श का परिचय — आचार्य कहते हैं कि ऐसे दुःखियों की सहायता हमारा कर्तव्य है — यथा उत्कलमणिः गोपबन्धुः , जो जलप्लावपीड़ितों की अकुण्ठ सेवा करके आज भी जनमानस में समादृत हैं। फिर वे चित्र दिखाकर कहते हैं — एषः अस्ति दीनबन्धुः गोपबन्धुः । भोजनसभा की घटना (पृष्ठ 38) — आचार्य हरिहरदास के भोज में गोपबन्धु हँसकर श्लोक कहते हैं — भोजनस्यातिदौर्लभ्यं जीवनाय सुखप्रदम् । उसी क्षण बाहर से तीन दिन के भूखे भिक्षुक का करुण क्रन्दन सुनाई देता है; गोपब
अभ्यास
- पाठारम्भे चित्रसंवादः
- वयं शब्दार्थान् जानीमः
- पाठगतौ श्लोकौ
- अत्र इदम् अवधेयम्
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- योग्यताविस्तरः
- परियोजनाकार्यम्