दीपकम् अध्याय 5 गीता सुगीता कर्तव्या के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

पाठ का ढाँचा — पूरा पाठ रमेश और उसके पिता के संवाद के रूप में चलता है। कुरुक्षेत्र में गीता-जयन्ती-महोत्सव में सुना गया श्लोक ‘गीता सुगीता कर्तव्या किमन्यैः शास्त्रविस्तरैः’ ही पाठ का शीर्षक और मूल प्रश्न बन जाता है। ‘सुगीता कर्तव्या’ का आशय — पिता स्वयं उत्तर देते हैं — गीतायाः अभ्यासः सम्यक् रूपेण करणीयः ; गीता उत्तम भाव से पढ़ी जाए और उसके उपदेश कार्यक्षेत्र तथा जीवनक्षेत्र दोनों में उतारे जाएँ। केवल पाठ करना नहीं, आचरण करना ही ‘सुगीता’ है। आठ श्लोक, चार विषय — (1) श्लोक १ — स्थितधीः/स्थितप्रज्ञ का लक्षण; (2) श्लोक २ — क्रोध → सम्मोह → स्मृतिविभ्रम → बुद्धिनाश → विनाश की शृंखला; (3) श्लोक ३–४ — ज्ञान पाने के तीन उपाय (प्रणिपात, परिप्रश्न, सेवा) तथा श्रद्धा का फल; (4) श्लोक ५–७ — भगवान् को प्रिय भक्त के गुण; श्लोक ८ — वाङ्मय तप । व्याकरण का केन्द्र — पाठ की ‘अत्र इदम् अवधेयम्’ पेटी दो वि

  1. पाठे विद्यमानाः प्रश्नाः
  2. श्लोक-व्याख्या (पदच्छेदः · अन्वयः · अर्थः · भावः)
  3. श्लोक-व्याख्या (पदच्छेदः · अन्वयः · अर्थः · भावः)
  4. वयं शब्दार्थान् जानीमः
  5. अत्र इदम् अवधेयम्
  6. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  7. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  8. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  9. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  10. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  11. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  12. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  13. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  14. योग्यताविस्तरः
  15. परियोजनाकार्यम्
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ