प्र1.
उच्यते — ................................................
उत्तर
वाक्यम् — यः दुःखेषु अनुद्विग्नमनाः भवति सः स्थितधीः उच्यते ।
(हिन्दी: जो दुःखों में विचलित नहीं होता, वह स्थितधी कहलाता है।)
(हिन्दी: जो दुःखों में विचलित नहीं होता, वह स्थितधी कहलाता है।)
अन्यानि वाक्यानि — सत्यं प्रियहितं च वचनं वाङ्मयं तपः उच्यते । · गीता श्रीकृष्णस्य उपदेशः उच्यते ।
व्याकरणम्: उच्यते — वच् धातु का कर्मवाच्य रूप, लट् लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन = ‘कहा जाता है / कहलाता है’। कर्मवाच्य में कर्ता तृतीया में और कर्म प्रथमा में आता है, इसलिए वाक्य में ‘सः’ प्रथमा में है।