प्र1.
श्रीमद्भगवद्गीतायाः विषये पञ्च वाक्यानि लिखत — (क) … (ख) … (ग) … (घ) … (ङ) …
उत्तर
(क) श्रीमद्भगवद्गीता भगवतः श्रीकृष्णस्य अर्जुनाय प्रदत्तानां जीवनमूल्यसम्बद्धानाम् उपदेशानां सङ्कलनात्मकः ग्रन्थः अस्ति ।
(ख) महर्षिः वेदव्यासः महाभारतस्य भीष्मपर्वणि श्रीमद्भगवद्गीतां वर्णितवान् ।
(ग) गीतायाम् अष्टादश अध्यायाः सप्तशतं (७००) श्लोकाः च सन्ति ।
(घ) कुरुक्षेत्रे युद्धपराङ्मुखम् अर्जुनं कर्तव्यपालनार्थं श्रीकृष्णः उपदिष्टवान् ।
(ङ) गीतायाम् अमृततुल्याः उपदेशाः सन्ति, अतः गीता सुगीता कर्तव्या ।
(ख) महर्षिः वेदव्यासः महाभारतस्य भीष्मपर्वणि श्रीमद्भगवद्गीतां वर्णितवान् ।
(ग) गीतायाम् अष्टादश अध्यायाः सप्तशतं (७००) श्लोकाः च सन्ति ।
(घ) कुरुक्षेत्रे युद्धपराङ्मुखम् अर्जुनं कर्तव्यपालनार्थं श्रीकृष्णः उपदिष्टवान् ।
(ङ) गीतायाम् अमृततुल्याः उपदेशाः सन्ति, अतः गीता सुगीता कर्तव्या ।
हिन्दी अर्थ: (क) श्रीमद्भगवद्गीता भगवान् श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए जीवन-मूल्यों से जुड़े उपदेशों का संकलन-ग्रन्थ है। (ख) महर्षि वेदव्यास ने महाभारत के भीष्मपर्व में गीता का वर्णन किया। (ग) गीता में अठारह अध्याय और सात सौ श्लोक हैं। (घ) कुरुक्षेत्र में युद्ध से विमुख अर्जुन को कर्तव्य-पालन के लिए श्रीकृष्ण ने उपदेश दिया। (ङ) गीता में अमृत के समान उपदेश हैं, इसलिए गीता को भली-भाँति पढ़ना-अपनाना चाहिए।
कहाँ से लिए गए: वाक्य (क), (ख), (ग) पाठ के योग्यताविस्तरः (पृष्ठ 59) से हैं, तथा (घ) और (ङ) पाठ के प्रथम पृष्ठ (पृष्ठ 49) से। इसीलिए ये पाँचों वाक्य परीक्षा में पूरी तरह सुरक्षित हैं — ये तुम्हारे अपने गढ़े हुए नहीं, पुस्तक के अपने वाक्य हैं।
व्याकरण-सङ्केतः: भीष्मपर्वणि — पर्वन् शब्द, सप्तमी विभक्ति, एकवचन (‘भीष्मपर्व में’)। गीतायाम् — सप्तमी एकवचन। वर्णितवान् — क्तवतु-प्रत्ययान्त भूतकालिक क्रिया।
व्याकरण-सङ्केतः: भीष्मपर्वणि — पर्वन् शब्द, सप्तमी विभक्ति, एकवचन (‘भीष्मपर्व में’)। गीतायाम् — सप्तमी एकवचन। वर्णितवान् — क्तवतु-प्रत्ययान्त भूतकालिक क्रिया।