दीपकम् अध्याय 5 अभ्यासात् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
उदाहरणम् — श्रद्धावान् – श्रद्धावती ; बुद्धिमान् – बुद्धिमती । (पुस्तके एतौ उत्तरौ रक्तवर्णेन पूरितौ स्तः) — नियमं स्पष्टीकुरुत।
उत्तर
नियमः — ‘वान्’ (वतुप्) → ‘वती’ तथा ‘मान्’ (मतुप्) → ‘मती’
श्रद्धावान् → श्रद्धावती · बुद्धिमान् → बुद्धिमती
ऐसा क्यों होता है: ‘श्रद्धावान्’ जैसे शब्द मूल संज्ञा में मतुप्/वतुप् प्रत्यय जोड़कर बनते हैं और इनका अर्थ होता है ‘…वाला’ (श्रद्धा + वान् = श्रद्धा वाला)। पुंलिङ्ग में इनका प्रथमा एकवचन रूप ‘…वान् / …मान्’ होता है। स्त्रीलिङ्ग बनाने के लिए इनमें ङीप् (ई) जुड़ता है, जिससे रूप ‘…वती / …मती’ बन जाता है। कौन-सा प्रत्यय लगेगा — ‘मान्’ या ‘वान्’ — यह मूल शब्द के अन्तिम वर्ण पर निर्भर करता है (अ/आ के बाद प्रायः ‘वान्’, इ/उ के बाद प्रायः ‘मान्’)।
ध्यातव्यम्: ‘श्रीमान्’ का स्त्रीलिङ्ग श्रीमती है — यही रूप हम आज भी नाम के आगे लगाते हैं। इसी तरह ‘बुद्धिमान्’ का ‘बुद्धिमती’। इस एक नियम से नीचे के पाँचों उत्तर बन जाते हैं।
प्र2.
गुणवान् − ................................................
उत्तर
उत्तरम् — गुणवान् → गुणवती
(हिन्दी: गुणों वाली)

वाक्ये प्रयोगः — सीता गुणवती छात्रा अस्ति । (सीता गुणवती छात्रा है।)

व्याकरणम्: गुण + वतुप् → गुणवान् (पुंलिङ्ग प्रथमा एकवचन); स्त्रीलिङ्ग में गुणवती (ईकारान्त, नदी-वत् रूप चलते हैं)।
प्र3.
आयुष्मान् − ................................................
उत्तर
उत्तरम् — आयुष्मान् → आयुष्मती
(हिन्दी: लम्बी आयु वाली)

वाक्ये प्रयोगः — आयुष्मती भव पुत्रि ! (हे पुत्री, तुम दीर्घायु हो !)

व्याकरणम्: आयुस् + मतुप् → आयुष्मान्; स्त्रीलिङ्ग आयुष्मती। यहाँ ‘स्’ का ‘ष्’ हो गया है (षत्व)। ‘आयुष्मान् भव / आयुष्मती भव’ संस्कृत का प्रसिद्ध आशीर्वचन है।
प्र4.
क्षमावान् − ................................................
उत्तर
उत्तरम् — क्षमावान् → क्षमावती
(हिन्दी: क्षमाशील स्त्री)

वाक्ये प्रयोगः — क्षमावती नारी सर्वेषां प्रिया भवति । (क्षमाशील स्त्री सबको प्रिय होती है।)

व्याकरणम्: क्षमा + वतुप् → क्षमावान्; स्त्रीलिङ्ग क्षमावती। इसी अर्थ का एक और शब्द इसी पाठ के श्लोक ५ में आया है — क्षमी (क्षमावान्), जिसका स्त्रीलिङ्ग ‘क्षमिणी’ होता है।
प्र5.
ज्ञानवान् − ................................................
उत्तर
उत्तरम् — ज्ञानवान् → ज्ञानवती
(हिन्दी: ज्ञान वाली)

वाक्ये प्रयोगः — ज्ञानवती शिक्षिका छात्रान् पाठयति । (ज्ञानवती शिक्षिका छात्रों को पढ़ाती है।)

व्याकरणम्: ज्ञान + वतुप् → ज्ञानवान्; स्त्रीलिङ्ग ज्ञानवती। ध्यान दो — ‘ज्ञानी’ का स्त्रीलिङ्ग ‘ज्ञानिनी’ होता है, ‘ज्ञानवती’ नहीं; दोनों अलग प्रत्ययों से बने हैं।
प्र6.
श्रीमान् − ................................................
उत्तर
उत्तरम् — श्रीमान् → श्रीमती
(हिन्दी: शोभा/सम्पत्ति वाली; ‘श्रीमती’)

वाक्ये प्रयोगः — श्रीमती सीता विद्यालयस्य प्रधानाचार्या अस्ति । (श्रीमती सीता विद्यालय की प्रधानाचार्या हैं।)

व्याकरणम्: श्री + मतुप् → श्रीमान्; स्त्रीलिङ्ग श्रीमती। ‘श्री’ ईकारान्त है, इसलिए ‘वान्’ नहीं, ‘मान्’ प्रत्यय लगा — यही कारण है कि यहाँ ‘श्रीवान्’ अशुद्ध होगा।
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