दीपकम् अध्याय 5 परियोजनाकार्यम्

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कक्षायां श्रीमद्भगवद्गीतानुगुणं ‘स्थितधीः’ इति विषयम् अधिकृत्य ‘मम जीवनलक्ष्यम्’ इत्यस्मिन् विषये परिचर्चां स्थापयतु ।
उत्तर

यह करना है: कक्षा में ‘स्थितधीः’ (स्थिर बुद्धि) के गुण को आधार बनाकर ‘मम जीवनलक्ष्यम्’ (मेरा जीवन-लक्ष्य) विषय पर परिचर्चा आयोजित करनी है। यह लिखित उत्तर नहीं, बोलने का अभ्यास है — इसलिए तैयारी इस तरह करो:

  • १. आधार तय करो — श्लोक १ को कक्षा में लिखकर उसके तीन लक्षण अलग-अलग लिख लो: दुःख में अविचल, सुख में निस्पृह, राग-भय-क्रोध से मुक्त।
  • २. दल बनाओ — ४–५ छात्रों के समूह; हर समूह एक लक्षण ले और बताए कि अपने लक्ष्य तक पहुँचने में वह लक्षण कैसे काम आएगा।
  • ३. सङ्केत-वाक्य तैयार रखो — हर वक्ता कम-से-कम दो संस्कृत वाक्य बोले (नीचे नमूना दिया है), शेष हिन्दी/मातृभाषा में।
  • ४. निष्कर्ष — अन्त में शिक्षक या एक छात्र सभी बातों को जोड़कर एक वाक्य में सार कहे।
अच्छी परिचर्चा में क्या-क्या होना चाहिए: (क) लक्ष्य का स्पष्ट नाम (चिकित्सकः, शिक्षकः, कृषकः, सैनिकः, अभियन्ता, वैज्ञानिकः…); (ख) उस लक्ष्य के मार्ग की एक कठिनाई; (ग) उस कठिनाई में ‘स्थितधीः’ होना कैसे सहायक होगा; (घ) श्लोक १ या ४ से एक उद्धरण। केवल ‘मुझे डॉक्टर बनना है’ कह देना पर्याप्त नहीं — पाठ से जोड़ना आवश्यक है।
नमूना उत्तर (परिचर्चायाः आरम्भः):
छात्रः — मम जीवनलक्ष्यं चिकित्सकः भवितुम् अस्ति। चिकित्सकस्य कार्ये प्रतिदिनं रोगिणां दुःखं पश्यामि। यदि अहं दुःखेषु उद्विग्नः भवामि तर्हि चिकित्सां कर्तुं न शक्नोमि। अतः मया स्थितधीः भवितव्यम्।
छात्रा — मम लक्ष्यं शिक्षिका भवितुम् अस्ति। परीक्षायाम् अङ्काः न्यूनाः भवेयुः, तथापि अहं न विषीदामि। ‘श्रद्धावाँल्लभते ज्ञानं तत्परः संयतेन्द्रियः’ इति गीतायाः वचनं मम प्रेरणा अस्ति।
(हिन्दी: मेरा जीवन-लक्ष्य चिकित्सक बनना है… यदि मैं दुःख देखकर स्वयं घबरा जाऊँ तो चिकित्सा कैसे करूँगा? इसलिए मुझे स्थिर बुद्धि वाला बनना होगा। / मेरा लक्ष्य शिक्षिका बनना है। परीक्षा में अंक कम आ सकते हैं, फिर भी मैं निराश नहीं होती — ‘श्रद्धावान् ही ज्ञान पाता है’ यह गीता-वचन मेरी प्रेरणा है।)
प्र2.
विविध-धर्माणां धर्मग्रन्थानां नामानि विलिख्य कस्यचित् एकस्य धर्मग्रन्थस्य विवरणं लिखत ।
उत्तर

यह करना है: पहले विभिन्न धर्मों के धर्मग्रन्थों के नाम लिखो, फिर उनमें से किसी एक का विवरण लिखो।

धर्मःधर्मग्रन्थस्य नाम (संस्कृतम्)हिन्दी नामभाषा
सनातनः (हिन्दू) धर्मःवेदाः, उपनिषदः, श्रीमद्भगवद्गीता, रामायणम्, महाभारतम्वेद, उपनिषद्, गीता, रामायण, महाभारतसंस्कृतम्
बौद्धधर्मःत्रिपिटकम् (धम्मपदम्)त्रिपिटक (धम्मपद)पालि
जैनधर्मःआगमाः (कल्पसूत्रम्, तत्त्वार्थसूत्रम्)आगम ग्रन्थप्राकृतम् / अर्धमागधी
सिक्खधर्मःगुरुग्रन्थसाहिबःगुरु ग्रन्थ साहिबगुरुमुखी
इस्लामधर्मःकुरानशरीफःकुरान शरीफअरबी
ईसाईधर्मःबाइबिलःबाइबिलहिब्रू / ग्रीक
पारसीधर्मःजेन्दावेस्ताज़ेन्द अवेस्ताअवेस्ता
अच्छे विवरण में क्या होना चाहिए: ग्रन्थ का नाम · वह किस धर्म का है · किसने कहा/रचा · कितना बड़ा है (अध्याय/श्लोक/भाग) · उसकी भाषा · उसका मुख्य सन्देश · तथा एक उद्धरण। केवल नाम गिना देना विवरण नहीं है।
नमूना उत्तर — श्रीमद्भगवद्गीतायाः विवरणम्:
श्रीमद्भगवद्गीता सनातनधर्मस्य प्रसिद्धः धर्मग्रन्थः अस्ति। अयं ग्रन्थः महाभारतस्य भीष्मपर्वणि वर्तते। महर्षिः वेदव्यासः एनं वर्णितवान्। अस्मिन् ग्रन्थे अष्टादश अध्यायाः सप्तशतं (७००) श्लोकाः च सन्ति। कुरुक्षेत्रस्य रणभूमौ भगवान् श्रीकृष्णः युद्धपराङ्मुखम् अर्जुनं कर्तव्यपालनार्थम् उपदिष्टवान् — सः एव उपदेशः गीता अस्ति। गीतायाः भाषा संस्कृतम् अस्ति। गीता कर्मयोगं, ज्ञानयोगं, भक्तियोगं च उपदिशति। तस्याः मुख्यः सन्देशः अस्ति — फलम् अनपेक्ष्य स्वकर्तव्यं कुरु। गीतायाम् अमृततुल्याः उपदेशाः सन्ति, अतः उच्यते — ‘गीता सुगीता कर्तव्या किमन्यैः शास्त्रविस्तरैः’।
(हिन्दी: श्रीमद्भगवद्गीता सनातन धर्म का प्रसिद्ध धर्मग्रन्थ है। यह महाभारत के भीष्मपर्व में आता है। महर्षि वेदव्यास ने इसका वर्णन किया। इसमें अठारह अध्याय और सात सौ श्लोक हैं। कुरुक्षेत्र की रणभूमि में श्रीकृष्ण ने युद्ध से विमुख अर्जुन को कर्तव्य-पालन का उपदेश दिया — वही उपदेश गीता है। इसकी भाषा संस्कृत है। गीता कर्मयोग, ज्ञानयोग और भक्तियोग सिखाती है। इसका मुख्य सन्देश है — फल की चिन्ता किए बिना अपना कर्तव्य करो।)
सूचना: यह परियोजना-कार्य है, अतः विवरण अपने शब्दों में लिखो और जिस ग्रन्थ को चुनो, उसके विषय में पुस्तकालय अथवा अपने घर के बड़ों से एक-दो बातें और पूछ लो। सभी धर्मों के ग्रन्थों के प्रति समान आदर रखना ही इस कार्य का असली उद्देश्य है।
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