दीपकम् अध्याय 4 परियोजनाकार्यम्

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
स्वप्रदेशस्य स्वतन्त्रतासङ्ग्रामिणां नामानि सङ्गृह्य तेषु एकस्य सचित्रां संक्षिप्तजीवनीं लिखत।
उत्तर

यह करने का काम है — उत्तर आपके अपने प्रदेश का होगा, इसलिए यहाँ पहले विधि दी है, फिर एक नमूना उत्तर

कैसे कीजिए —

  1. अपने प्रदेश के 8–10 स्वतन्त्रतासङ्ग्रामियों के नाम पुस्तकालय, पाठ्यपुस्तक या बड़ों से पूछकर एकत्र कीजिए और सूची बनाइए।
  2. उनमें से एक को चुनिए — वही चुनिए जिसके विषय में चित्र और सामग्री सरलता से मिल सके।
  3. उनका चित्र चिपकाइए और नीचे संस्कृत में संक्षिप्त जीवनी लिखिए — इन्हीं शीर्षकों में: नाम, जन्म, जन्मस्थानम्, माता-पिता, शिक्षा, कार्यक्षेत्रम्, प्रमुखं योगदानम्, उपाधिः, स्वर्गारोहणम्
  4. अन्त में एक-दो वाक्य में लिखिए कि उनसे आपने क्या सीखा।

नमूना उत्तर (पाठ के ही उदाहरण पर) —

शीर्षकम्विवरणम्
नामउत्कलमणिः गोपबन्धुदासः
जन्म०९/१०/१८७७, सुआण्डो-ग्रामः, पुरी-जनपदः, ओडिशाराज्यम्
माता-पितामाता स्वर्णमयी देवी, पिता दैत्यारिदासः
शिक्षाएफ़्.ए. — १९०० (रेभेन्सा महाविद्यालयः, कटकम्); बी.एल्. — १९०६ (कलकत्ता-विश्वविद्यालयः)
कार्यक्षेत्रम्शिक्षा, समाजसेवा, पत्रकारिता, स्वतन्त्रतान्दोलनम्
प्रमुखं योगदानम्सत्यवादि-वनविद्यालयस्य (१९०९), दरिद्रनारायणसेवा-सङ्घस्य, ‘समाजः’ इति वार्तापत्रस्य च प्रतिष्ठा; जलप्लावपीडितानां सेवा
उपाधिः‘उत्कलमणिः’ — आचार्यप्रफुल्लचन्द्ररायेण दत्ता (१९२४)
स्वर्गारोहणम्१७.०६.१९२८, साक्षी-गोपाले

नमूना अनुच्छेदःगोपबन्धुदासः ओडिशाराज्यस्य महान् समाजसेवकः स्वतन्त्रतासङ्ग्रामी च आसीत्। सः छात्रान् निःशुल्कम् अपाठयत्, दरिद्राणां रोगिणां च सेवाम् अकरोत्, ‘समाजः’ इति दिनपत्रिकां च प्रारभत। महात्मगान्धेः प्रेरणया सः स्वतन्त्रतान्दोलने भागं गृहीतवान् वर्षद्वयं कारावासं च प्राप्तवान्। तस्य त्यागं दृष्ट्वा प्रफुल्लचन्द्ररायः तं ‘उत्कलमणिः’ इति उपाधिना सम्मानितवान्।

सुझाव: अपने प्रदेश के अनुसार नाम चुनिए — यथा ओडिशा: गोपबन्धुदासः; बिहार: राजेन्द्रप्रसादः; महाराष्ट्रम्: लोकमान्यतिलकः; बङ्गालः: सुभाषचन्द्रबसुः; पञ्जाबः: भगतसिंहः; तमिऴनाडुः: वाञ्चिनाथः। जीवनी छोटी रखिए — 8–10 सरल संस्कृत वाक्य पर्याप्त हैं।
प्र2.
जलप्लावपीडितानां साहाय्यार्थं स्वकीयाम् एकां कार्ययोजनां लिखत।
उत्तर

यह भी अपनी योजना लिखने का प्रश्न है। एक अच्छी कार्ययोजना में तीन बातें होनी चाहिए — क्या करेंगे, कैसे करेंगे, और किसके साथ मिलकर करेंगे

नमूना उत्तर — ‘जलप्लावपीडितसाहाय्य-योजना’

क्रमःकार्यम् (संस्कृतम्)हिन्दी
१.विद्यालये ‘साहाय्यसमितिः’ रचनीया ।विद्यालय में एक सहायता-समिति बनाएँ।
२.छात्राः वस्त्राणि, कम्बलान्, पाठ्यपुस्तकानि च सङ्गृह्णीयुः ।छात्र कपड़े, कम्बल और पाठ्यपुस्तकें एकत्र करें।
३.शुष्कान्नस्य (चिपिटक-गुड-लवण-जलस्य) पेटिकाः सज्जीकरणीयाः ।सूखा अन्न (चूड़ा, गुड़, नमक, पानी) के पैकेट तैयार करें।
४.औषधानि प्राथमिकोपचारपेटिकाः च चिकित्सालयस्य सहायतया एकत्रीकरणीयाः ।चिकित्सालय की सहायता से दवाइयाँ और प्राथमिक उपचार पेटी जुटाएँ।
५.ग्रामे स्वच्छजलस्य पेयजलस्य च व्यवस्था करणीया ।गाँव में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करें।
६.विद्यालयभवने अस्थायी-आश्रयस्थलं कल्पनीयम् ।विद्यालय भवन में अस्थायी आश्रय-स्थल बनाएँ।
७.बालकानां कृते पठनक्रीडयोः व्यवस्था करणीया, येन तेषां भयं न्यूनं भवेत् ।बच्चों के लिए पढ़ाई-खेल की व्यवस्था करें, जिससे उनका डर कम हो।
८.स्थानीयप्रशासनेन सह सम्पर्कं कृत्वा सामग्री प्रेषणीया ।स्थानीय प्रशासन से सम्पर्क करके सामग्री भिजवाएँ।
योजना बनाते समय ध्यान रखिए: सहायता का क्रम भी महत्त्वपूर्ण है — पहले जीवनरक्षा (पेयजल, भोजन, औषध), फिर आश्रय, फिर शिक्षा और मन का सहारा। बिना योजना के भेजी गई सामग्री अक्सर व्यर्थ हो जाती है, इसलिए प्रशासन से पूछकर ही भेजिए कि किस वस्तु की आवश्यकता है।
पाठ से प्रेरणा: गोपबन्धु ने केवल धन नहीं भेजा — वे स्वयं पीड़ितों के बीच गए। इसीलिए पाठ कहता है — अस्माभिः एतादृशानां दुःखितानां सहायता करणीया। आपकी योजना में भी ‘स्वयं जाकर करने योग्य’ एक काम अवश्य रखिए।
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