प्र1.
स्वप्रदेशस्य स्वतन्त्रतासङ्ग्रामिणां नामानि सङ्गृह्य तेषु एकस्य सचित्रां संक्षिप्तजीवनीं लिखत।
उत्तर
यह करने का काम है — उत्तर आपके अपने प्रदेश का होगा, इसलिए यहाँ पहले विधि दी है, फिर एक नमूना उत्तर।
कैसे कीजिए —
- अपने प्रदेश के 8–10 स्वतन्त्रतासङ्ग्रामियों के नाम पुस्तकालय, पाठ्यपुस्तक या बड़ों से पूछकर एकत्र कीजिए और सूची बनाइए।
- उनमें से एक को चुनिए — वही चुनिए जिसके विषय में चित्र और सामग्री सरलता से मिल सके।
- उनका चित्र चिपकाइए और नीचे संस्कृत में संक्षिप्त जीवनी लिखिए — इन्हीं शीर्षकों में: नाम, जन्म, जन्मस्थानम्, माता-पिता, शिक्षा, कार्यक्षेत्रम्, प्रमुखं योगदानम्, उपाधिः, स्वर्गारोहणम्।
- अन्त में एक-दो वाक्य में लिखिए कि उनसे आपने क्या सीखा।
नमूना उत्तर (पाठ के ही उदाहरण पर) —
| शीर्षकम् | विवरणम् |
|---|---|
| नाम | उत्कलमणिः गोपबन्धुदासः |
| जन्म | ०९/१०/१८७७, सुआण्डो-ग्रामः, पुरी-जनपदः, ओडिशाराज्यम् |
| माता-पिता | माता स्वर्णमयी देवी, पिता दैत्यारिदासः |
| शिक्षा | एफ़्.ए. — १९०० (रेभेन्सा महाविद्यालयः, कटकम्); बी.एल्. — १९०६ (कलकत्ता-विश्वविद्यालयः) |
| कार्यक्षेत्रम् | शिक्षा, समाजसेवा, पत्रकारिता, स्वतन्त्रतान्दोलनम् |
| प्रमुखं योगदानम् | सत्यवादि-वनविद्यालयस्य (१९०९), दरिद्रनारायणसेवा-सङ्घस्य, ‘समाजः’ इति वार्तापत्रस्य च प्रतिष्ठा; जलप्लावपीडितानां सेवा |
| उपाधिः | ‘उत्कलमणिः’ — आचार्यप्रफुल्लचन्द्ररायेण दत्ता (१९२४) |
| स्वर्गारोहणम् | १७.०६.१९२८, साक्षी-गोपाले |
नमूना अनुच्छेदः — गोपबन्धुदासः ओडिशाराज्यस्य महान् समाजसेवकः स्वतन्त्रतासङ्ग्रामी च आसीत्। सः छात्रान् निःशुल्कम् अपाठयत्, दरिद्राणां रोगिणां च सेवाम् अकरोत्, ‘समाजः’ इति दिनपत्रिकां च प्रारभत। महात्मगान्धेः प्रेरणया सः स्वतन्त्रतान्दोलने भागं गृहीतवान् वर्षद्वयं कारावासं च प्राप्तवान्। तस्य त्यागं दृष्ट्वा प्रफुल्लचन्द्ररायः तं ‘उत्कलमणिः’ इति उपाधिना सम्मानितवान्।
सुझाव: अपने प्रदेश के अनुसार नाम चुनिए — यथा ओडिशा: गोपबन्धुदासः; बिहार: राजेन्द्रप्रसादः; महाराष्ट्रम्: लोकमान्यतिलकः; बङ्गालः: सुभाषचन्द्रबसुः; पञ्जाबः: भगतसिंहः; तमिऴनाडुः: वाञ्चिनाथः। जीवनी छोटी रखिए — 8–10 सरल संस्कृत वाक्य पर्याप्त हैं।