प्र1.
चित्रं दृष्ट्वा पञ्च वाक्यानि रचयत — (क) … (ख) … (ग) … (घ) … (ङ) …
उत्तर
पुस्तक के चित्र (पृष्ठ 45) में यह दृश्य है — एक ओर चिकित्सालयः लिखा हुआ भवन है, और गोपबन्धु एक अस्वस्थ बालक को अपनी बाँह का सहारा देकर उसी चिकित्सालय की ओर ले जा रहे हैं। भवन के चारों ओर वृक्ष और मार्ग दिखाई देते हैं। इसी दृश्य के पाँच वाक्य —
| क्रमः | संस्कृतवाक्यम् | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| (क) | चित्रे एकः चिकित्सालयः दृश्यते । | चित्र में एक चिकित्सालय दिखाई देता है। |
| (ख) | एकः बालकः अस्वस्थः अस्ति । | एक बालक अस्वस्थ है। |
| (ग) | गोपबन्धुः तं बालकं चिकित्सालयं नयति । | गोपबन्धु उस बालक को चिकित्सालय ले जा रहे हैं। |
| (घ) | सः बालकं स्वबाहुना अवलम्बते । | वे बालक को अपनी बाँह से सहारा दे रहे हैं। |
| (ङ) | चिकित्सालयस्य समीपे वृक्षाः मार्गश्च सन्ति । | चिकित्सालय के पास पेड़ और रास्ता है। |
चित्रवर्णन का नियम: पहले स्थान बताइए (चित्रे … अस्ति/दृश्यते), फिर पात्र, फिर क्रिया, अन्त में परिवेश। हर वाक्य में कर्ता और क्रिया का वचन मिलाइए — ‘बालकः अस्ति’ (एकवचन), पर ‘वृक्षाः सन्ति’ (बहुवचन)। सरल लट् लकार ही प्रयोग कीजिए।
भाव जोड़ना चाहें तो: रोगिणां सेवा एव परमः धर्मः। · गोपबन्धुः दीनानां बन्धुः आसीत्। — ऐसे एक वाक्य से चित्र का सन्देश भी आ जाएगा, क्योंकि पाठ बताता है कि वे अध्ययनकालादेव स दरिद्राणां रोगिणां च सेवामकरोत्।।