दीपकम् अध्याय 4 अभ्यासात् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
समुचितेन पदेन सह स्तम्भौ मेलयत — ‘अ’ स्तम्भः : 1. समाजः 2. ममास्थिमांसैः 3. उत्कलमणिः 4. आँ आँ . . इति 5. सुस्वादूनि ; ‘इ’ स्तम्भः : गोपबन्धुः, व्यञ्जनानि, क्रन्दनध्वनिः, दिनपत्रिका, परिपूरितास्तु।
उत्तर

सही मेल इस प्रकार है —

क्रमः‘अ’ स्तम्भः‘इ’ स्तम्भःसन्दर्भः (पाठे कुत्र)
1.समाजःदिनपत्रिका‘समाजः’ इति दिनपत्रिका अद्यापि प्रतिदिनं प्रकाश्यते (पृष्ठ 41)
2.ममास्थिमांसैःपरिपूरितास्तुममास्थिमांसैः परिपूरितास्तु सा (श्लोकः, पृष्ठ 41)
3.उत्कलमणिःगोपबन्धुःप्रफुल्लचन्द्ररायेण दत्ता उपाधिः (पृष्ठ 41)
4.आँ आँ . . इतिक्रन्दनध्वनिःभिक्षुकस्य क्रन्दनध्वनिः (पृष्ठ 38)
5.सुस्वादूनिव्यञ्जनानिबहूनि सुस्वादूनि व्यञ्जनानि कदलीपत्रेषु परिवेषितानि (पृष्ठ 38)
मिलान की कुंजी — लिङ्ग और वचन: सुस्वादूनि नपुंसकलिङ्ग बहुवचन है, इसलिए उसका जोड़ीदार भी नपुंसक बहुवचन ही होगा — व्यञ्जनानि (‘गोपबन्धुः’ पुंलिङ्ग एकवचन है, वह नहीं चलेगा)। ममास्थिमांसैः तृतीया बहुवचन है — ‘किससे भरे’; इसलिए क्रिया परिपूरितास्तु उसी के साथ जाएगी।
अर्थ की कुंजी: ‘समाजः’ एक समाचारपत्र का नाम है, व्यक्ति का नहीं — इसीलिए उसका जोड़ीदार ‘दिनपत्रिका’ है। ‘आँ आँ’ रोने की ध्वनि है, अतः ‘क्रन्दनध्वनिः’। शेष एक जोड़ी बचती है — उत्कलमणिः = गोपबन्धुः।
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