प्र1.
समुचितेन पदेन सह स्तम्भौ मेलयत — ‘अ’ स्तम्भः : 1. समाजः 2. ममास्थिमांसैः 3. उत्कलमणिः 4. आँ आँ . . इति 5. सुस्वादूनि ; ‘इ’ स्तम्भः : गोपबन्धुः, व्यञ्जनानि, क्रन्दनध्वनिः, दिनपत्रिका, परिपूरितास्तु।
उत्तर
सही मेल इस प्रकार है —
| क्रमः | ‘अ’ स्तम्भः | ‘इ’ स्तम्भः | सन्दर्भः (पाठे कुत्र) |
|---|---|---|---|
| 1. | समाजः | दिनपत्रिका | ‘समाजः’ इति दिनपत्रिका अद्यापि प्रतिदिनं प्रकाश्यते (पृष्ठ 41) |
| 2. | ममास्थिमांसैः | परिपूरितास्तु | ममास्थिमांसैः परिपूरितास्तु सा (श्लोकः, पृष्ठ 41) |
| 3. | उत्कलमणिः | गोपबन्धुः | प्रफुल्लचन्द्ररायेण दत्ता उपाधिः (पृष्ठ 41) |
| 4. | आँ आँ . . इति | क्रन्दनध्वनिः | भिक्षुकस्य क्रन्दनध्वनिः (पृष्ठ 38) |
| 5. | सुस्वादूनि | व्यञ्जनानि | बहूनि सुस्वादूनि व्यञ्जनानि कदलीपत्रेषु परिवेषितानि (पृष्ठ 38) |
मिलान की कुंजी — लिङ्ग और वचन: सुस्वादूनि नपुंसकलिङ्ग बहुवचन है, इसलिए उसका जोड़ीदार भी नपुंसक बहुवचन ही होगा — व्यञ्जनानि (‘गोपबन्धुः’ पुंलिङ्ग एकवचन है, वह नहीं चलेगा)। ममास्थिमांसैः तृतीया बहुवचन है — ‘किससे भरे’; इसलिए क्रिया परिपूरितास्तु उसी के साथ जाएगी।
अर्थ की कुंजी: ‘समाजः’ एक समाचारपत्र का नाम है, व्यक्ति का नहीं — इसीलिए उसका जोड़ीदार ‘दिनपत्रिका’ है। ‘आँ आँ’ रोने की ध्वनि है, अतः ‘क्रन्दनध्वनिः’। शेष एक जोड़ी बचती है — उत्कलमणिः = गोपबन्धुः।