कक्षा ८ संस्कृत अध्याय 1 संगच्छध्वं संवदध्वम् के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

पाठ का आरम्भ चित्र-संवाद से होता है — विद्यालय के क्रीडोत्सव में पादकन्दुक-क्रीडा (फुटबॉल) जीतने पर आचार्य पूछते हैं कि प्रतिद्वन्द्वी कैसे हारे। छात्र उत्तर देते हैं — अपने दल में परस्पर सामञ्जस्य था, विपक्षी दल में मनोभेद और द्वेषभाव था, वे एक-दूसरे का सहयोग नहीं करते थे। आचार्य निष्कर्ष देते हैं — विजय के लिए मिलित्वा कार्यकरणम्, एकता तथा परस्परं सामञ्जस्यम् आवश्यक है; और यही सन्देश वेद में ‘संगच्छध्वं संवदध्वम्’ के रूप में दिया गया है। पाठ के तीन मन्त्र ऋग्वेद के संज्ञान-सूक्त (१०.१९१) से लिए गए हैं। पहला मन्त्र कहता है — मिलकर चलो, एक स्वर में बोलो, तुम्हारे मन एक-दूसरे को जानें; जैसे सृष्टि के आरम्भ में देव (अग्नि, वायु, आदित्य आदि ब्रह्माण्डीय शक्तियाँ) अपना-अपना भाग स्वीकार कर उत्कृष्ट समन्वय से कर्म करते थे। दूसरा मन्त्र सामूहिक कर्म का आधार बताता है — सबका मन्त्र (चिन्तन) समान हो

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्दःअर्थः (संस्कृतम्)हिन्दीEnglish
संगच्छध्वम्मिलित्वा गच्छतमिलकर चलोMay you walk together
संवदध्वम्एकस्वरेण वदतसहमतिपूर्वक बोलेंMay you speak in one voice
समवेतस्वरेणसम्मिलित-स्वरेणसम्मिलित ध्वनि सेBy chanting in unison
मनांसिचित्तानिमनों कोMinds
जानताम्जानन्तुजानेंMay you know
देवाःब्रह्माण्डीय-शक्तयः / वैश्विक-शक्तयःसृष्टि की मूलभूत शक्तियाँCosmic forces & celestial phenomena
संजानानाःएकमनसः भूत्वाएक विचार वाले होकरBeing amicable
उपासतेसेवन्तेश्रद्धापूर्वक कर्तव्य-निर्वहणDevotedly performing
अभ्युदयम्अभिवृद्धिःलौकिक उन्नतिElevation and prosperity
मन्त्रःविचारःचिन्तनContemplation
समितिःसमाना प्राप्तिःसमान सिद्धिCommon resolutions
वःयुष्मभ्यम्तुम्हारेFor you
अभिमन्त्रयेसंस्कृत्य प्रचारयामिअभिमन्त्रित करके प्रचारित करता हूँ(I) Consecrate and propagate
हविषाप्रार्थनापूर्वकेण समर्पणेनप्रार्थना पूर्वक यज्ञाहुति द्वाराBy oblatory prayers
जुहोमिज्ञानकर्ममयं यज्ञं साधयामिदिव्य यज्ञ कर्म को साधता/ती हूँPerforming Yajña & divine offerings
आकूतिःसङ्कल्पःसंकल्पResolution
सु सह असतिसुसंघटितः भवेत्सुसंघटित होMay you be united
संहितामूलमन्त्रपाठःमूल वैदिक मन्त्र पाठOriginal Vedic text
  1. चित्र-संवादः
  2. मन्त्राणां भावार्थं जानीमः
  3. वयं शब्दार्थान् जानीमः
  4. अत्र इदम् अवधेयम्
  5. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  6. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  7. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  8. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  9. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  10. अभ्यासात् जायते सिद्धिः
  11. योग्यताविस्तरः
  12. परियोजनाकार्यम्
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