प्र1.
पाठे प्रयुक्तानां शब्दानाम् अर्थान् ज्ञात्वा अन्तिमे स्तम्भे मातृभाषया अर्थं लिखत।
उत्तर
यह पुस्तक का अपना क्रियाकलाप है — तालिका के अन्तिम स्तम्भ में हर शब्द का अर्थ अपनी मातृभाषा (जैसे मराठी, बाङ्गला, तमिऴ, गुजराती, ओड़िआ…) में लिखना है। नीचे संस्कृत, हिन्दी तथा अंग्रेज़ी अर्थ दिए हैं; इन्हीं के आधार पर अपनी भाषा का शब्द चुनें।
| शब्दः | अर्थः (संस्कृतम्) | हिन्दी | English |
|---|---|---|---|
| संगच्छध्वम् | मिलित्वा गच्छत | मिलकर चलो | May you walk together |
| संवदध्वम् | एकस्वरेण वदत | सहमतिपूर्वक बोलें | May you speak in one voice |
| समवेतस्वरेण | सम्मिलित-स्वरेण | सम्मिलित ध्वनि से | By chanting in unison |
| मनांसि | चित्तानि | मनों को | Minds |
| जानताम् | जानन्तु | जानें | May you know |
| देवाः | ब्रह्माण्डीय-शक्तयः / वैश्विक-शक्तयः | सृष्टि की मूलभूत शक्तियाँ | Cosmic forces & celestial phenomena |
| संजानानाः | एकमनसः भूत्वा | एक विचार वाले होकर | Being amicable |
| उपासते | सेवन्ते | श्रद्धापूर्वक कर्तव्य निर्वहण | Devotedly performing |
| अभ्युदयम् | अभिवृद्धिः | लौकिक उन्नति | Elevation and prosperity |
| मन्त्रः | विचारः | चिन्तन | Contemplation |
| समितिः | समाना प्राप्तिः | समान सिद्धि | Common resolutions |
| वः | युष्मभ्यम् | तुम्हारे | For you |
| अभिमन्त्रये | संस्कृत्य प्रचारयामि | अभिमन्त्रित करके प्रचारित करता हूँ | (I) Consecrate and propagate |
| हविषा | प्रार्थनापूर्वकेण समर्पणेन | प्रार्थना पूर्वक यज्ञाहुति द्वारा | By oblatory prayers |
| जुहोमि | ज्ञानकर्ममयं यज्ञं साधयामि | दिव्य यज्ञ कर्म को साधता/ती हूँ | Performing Yajña & divine offerings |
| आकूतिः | सङ्कल्पः | संकल्प | Resolution |
| सु सह असति | सुसंघटितः भवेत् | सुसंघटित हो | May you be united |
| संहिता | मूलमन्त्रपाठः | मूल वैदिक मन्त्र पाठ | Original Vedic text |
| ब्रह्मणा | सृष्टिकर्त्रा / परमेश्वरेण | सृष्टि के निर्माता परमात्मा के द्वारा | By the creator of the universe |
| निरवहन् | निर्वाहम् अकुर्वन् | निर्वाह किया | Took responsibility |
नमूना उत्तर (मराठी) — संगच्छध्वम् = ‘एकत्र चला’, संवदध्वम् = ‘एका सुरात बोला’, मनांसि = ‘मने’, आकूतिः = ‘संकल्प’। (बाङ्गला) — संगच्छध्वम् = ‘एकसाथे चलो’, मनांसि = ‘मनगुलि’। अपनी भाषा में लिखते समय ध्यान रखें कि अर्थ वही रहे जो संस्कृत स्तम्भ में दिया है, शब्द चाहे बदल जाए।