दीपकम् अध्याय 1 अभ्यासात् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
यथा — बालिकाः नृत्यन्ति → बालिकाः नृत्यन्तु।
उत्तर

यह पुस्तक का दिया हुआ उदाहरण है। इसी ढंग से आगे के वाक्य बदलने हैं।

बालिकाः नृत्यन्ति (लट्-लकारः — नाचती हैं)

बालिकाः नृत्यन्तु (लोट्-लकारः — नाचें / नाचनी चाहिए)
बदलने का नियम: कर्ता का रूप नहीं बदलता — केवल क्रिया लट् से लोट् में जाती है। इसके लिए क्रिया का पुरुष (प्रथम / मध्यम / उत्तम) और वचन (एक / द्वि / बहु) पहचानिए, फिर उसी खाने का लोट्-रूप रखिए। यहाँ ‘नृत्यन्ति’ प्रथमपुरुष बहुवचन है, अतः लोट् का प्रथमपुरुष बहुवचन नृत्यन्तु आया।
पुरुषःलट् (एक/द्वि/बहु)लोट् (एक/द्वि/बहु)
प्रथमपुरुषःपठति / पठतः / पठन्तिपठतु / पठताम् / पठन्तु
मध्यमपुरुषःपठसि / पठथः / पठथपठ / पठतम् / पठत
उत्तमपुरुषःपठामि / पठावः / पठामःपठानि / पठाव / पठाम
प्र2.
बालकाः हसन्ति
उत्तर

बालकाः हसन्तु। (हिन्दी — बालक हँसें।)

क्यों: ‘हसन्ति’ लट्-लकार, प्रथमपुरुष, बहुवचन है। लोट् में प्रथमपुरुष बहुवचन का प्रत्यय ‘अन्तु’ है, अतः हस् + अन्तु = हसन्तु
प्र3.
युवां तत्र गच्छथः
उत्तर

युवां तत्र गच्छतम्। (हिन्दी — तुम दोनों वहाँ जाओ।)

क्यों: ‘युवाम्’ (तुम दोनों) के साथ क्रिया मध्यमपुरुष, द्विवचन में है — लट् में ‘गच्छथः’। लोट् के मध्यमपुरुष द्विवचन का रूप गच्छतम् है (पृष्ठ ६ की परस्मैपद-तालिका देखिए)।
सावधानी: ‘गच्छताम्’ मत लिखिए — वह प्रथमपुरुष द्विवचन (वे दोनों जाएँ) है। ‘गच्छतम्’ और ‘गच्छताम्’ का अन्तर केवल एक मात्रा का है, पर अर्थ पूरा बदल जाता है।
प्र4.
यूयं धावथ
उत्तर

यूयं धावत। (हिन्दी — तुम सब दौड़ो।)

क्यों: ‘यूयम्’ (तुम सब) के साथ क्रिया मध्यमपुरुष, बहुवचन में है। लट् का रूप ‘धावथ’ है और लोट् का रूप धावत — केवल ‘थ’ के स्थान पर ‘त’।
Tip: मध्यमपुरुष बहुवचन में लट् और लोट् बहुत मिलते-जुलते दिखते हैं (पठथ → पठत, धावथ → धावत)। ‘थ’ देखते ही समझ लीजिए कि वह लट् है।
प्र5.
आवां लिखावः
उत्तर

आवां लिखाव। (हिन्दी — हम दोनों लिखें।)

क्यों: ‘आवाम्’ (हम दोनों) के साथ क्रिया उत्तमपुरुष, द्विवचन में है। लट् का रूप ‘लिखावः’ है; लोट् में विसर्ग हट जाता है और रूप बनता है लिखाव
प्र6.
वयं पठामः
उत्तर

वयं पठाम। (हिन्दी — हम सब पढ़ें।)

क्यों: ‘वयम्’ (हम सब) के साथ क्रिया उत्तमपुरुष, बहुवचन में है। लट् ‘पठामः’ → लोट् पठाम — यहाँ भी केवल विसर्ग हटा है।
अर्थ का भेद: उत्तमपुरुष के लोट्-रूप आज्ञा नहीं, प्रस्ताव देते हैं — ‘पठाम’ का अर्थ ‘हम पढ़ें’ / ‘चलो पढ़ें’ है। इसी भाव में पाठ में आया है — “आगच्छन्तु, वयम् अस्य सूक्तस्य प्रसिद्धान् त्रीन् मन्त्रान् पठामः।”
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