प्र1.
वेदाः, ब्राह्मणानि, उपनिषदः, उपवेदाः, वेदोपाङ्गानि / षड्-दर्शनानि, वेदाङ्गानि च कानि सन्ति ?
उत्तर
पुस्तक इस स्थान पर वैदिक वाङ्मय का पूरा नक्शा एक साथ देती है। इसे तालिका के रूप में याद रखना सरल है।
| क्रमः | वर्गः | नामानि | सङ्ख्या |
|---|---|---|---|
| १ | वेदाः | ऋग्वेदः, यजुर्वेदः, सामवेदः, अथर्ववेदः | ४ |
| २ | ब्राह्मणानि | ऐतरेयः, शतपथः, सामविधानं, गोपथः, इत्यादयः | अनेकानि |
| ३ | उपनिषदः (प्रसिद्धाः) | ईशः, केन, कठः, प्रश्नः, मुण्डकः, माण्डूक्यः, ऐतरेयः, तैत्तिरीयः, छान्दोग्यः, बृहदारण्यकः, इत्यादयः | १० प्रसिद्धाः |
| ४ | उपवेदाः | आयुर्वेदः, धनुर्वेदः, गान्धर्ववेदः, अर्थवेदः / स्थापत्यवेदः | ४ |
| ५ | वेदोपाङ्गानि / षड्-दर्शनानि | न्यायः, वैशेषिकं, साङ्ख्यं, योगः, पूर्व-मीमांसा, उत्तर-मीमांसा (वेदान्तः) | ६ |
| ६ | वेदाङ्गानि | शिक्षा, व्याकरणं, छन्दः, निरुक्तं, ज्योतिषं, कल्पः | ६ |
इन्हें कैसे जोड़कर देखें: चारों वेद मूल संहिता हैं। ब्राह्मण ग्रन्थ बताते हैं कि यज्ञ-कर्म कैसे किया जाए; उपनिषद् बताते हैं कि उसके पीछे का तत्त्वज्ञान क्या है। उपवेद जीवन के व्यावहारिक शास्त्र हैं — चिकित्सा (आयुर्वेद), युद्ध (धनुर्वेद), सङ्गीत-कला (गान्धर्ववेद) तथा वास्तु-शिल्प (स्थापत्यवेद)। वेदाङ्ग वेद को शुद्ध पढ़ने और समझने के छह साधन हैं, और षड्-दर्शन उसी ज्ञान की छह विचारधाराएँ।
याद रखने की युक्ति: छह वेदाङ्ग को शरीर से जोड़कर याद करते हैं — शिक्षा = नासिका (उच्चारण), व्याकरण = मुख, निरुक्त = श्रोत्र, छन्द = चरण, कल्प = हस्त, ज्योतिष = नेत्र। इसी क्रम में सूची दोहराएँ, भूलेंगे नहीं।