प्र1.
अस्य सूक्तस्य भावार्थं मित्रैः सह मातृभाषया चर्चयत।
उत्तर
यह चर्चा-कार्य है — मित्रों के साथ अपनी मातृभाषा में बैठकर सूक्त का भाव समझना। शिक्षक इसे कक्षा में समूह-चर्चा के रूप में कराएँगे।
चर्चा कैसे करें (विधि) —
- चार-पाँच के समूह बनाइए। हर समूह एक मन्त्र लेकर पहले उसका शब्दार्थ (पृष्ठ ५ की तालिका से) पढ़े।
- फिर हर सदस्य अपनी भाषा में एक वाक्य कहे कि उस मन्त्र से उसे क्या समझ आया।
- अन्त में समूह मिलकर तीन वाक्य लिखे — मन्त्र क्या कहता है, आज के जीवन में उसका उदाहरण क्या है, और उसे कक्षा में कैसे उतारा जाए।
अच्छी चर्चा में ये बातें अवश्य आएँ —
- तीनों मन्त्रों का क्रम — कर्म की एकता → विचार की एकता → भाव की एकता।
- देवों का उदाहरण — अग्नि, वायु, सूर्य अपना-अपना कर्तव्य बिना झगड़े निभाते हैं।
- एकता का लाभ — प्रसन्नता, सौमनस्य, उत्साह, आरोग्य, विजय, समृद्धि।
नमूना उत्तर (हिन्दी में चर्चा का सार): “इस सूक्त का भाव यह है कि किसी भी समूह की शक्ति उसकी संख्या में नहीं, उसके तालमेल में है। हमारे विद्यालय के दल ने फुटबॉल इसीलिए जीती क्योंकि खिलाड़ियों में सामञ्जस्य था। जब हम मिलकर चलते हैं, एक-दूसरे को सुनकर बोलते हैं और मन में भेद नहीं रखते, तब घर, कक्षा और गाँव — तीनों में शान्ति रहती है। मन्त्र कहता है कि यही रीति सृष्टि के आरम्भ से देवों की भी थी।” — इसी को अपनी मातृभाषा में कहिए।