दीपकम् अध्याय 2 अभ्यासात् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पाठे प्रयुक्तेन ल्यप्प्रत्ययान्तपदेन सह उपयुक्तं पदं योजयत — (क) विकीर्य (ख) विस्तीर्य (ग) अवतीर्य (घ) अवलोक्य (ङ) एकचित्तीभूय (च) प्रत्यभिज्ञाय । [पदानि — जालम्, जालापहारकान्, उड्डीयताम्, तद्वचनम्, भूमौ, तण्डुलकणान्]
उत्तर

पुस्तक में (घ) अवलोक्य का मिलान उदाहरण-रूप में पहले से खींचा हुआ है। शेष पाँच का सही मेल नीचे है — प्रत्येक जोड़ी पाठ के अपने वाक्य से सिद्ध होती है।

क्रमःल्यबन्तपदम्उपयुक्तं पदम्पाठस्य वाक्यम्
(क)विकीर्यतण्डुलकणान्व्याधः तण्डुलकणान् विकीर्य जालं विस्तीर्य च प्रच्छन्नो भूत्वा स्थितः।
(ख)विस्तीर्यजालम्व्याधः जालं विस्तीर्य प्रच्छन्नो भूत्वा स्थितः।
(ग)अवतीर्यभूमौसर्वे कपोताः भूमौ अवतीर्य तण्डुलकणान् भोक्तुं प्रवृत्ताः।
(घ)अवलोक्यजालापहारकान्स व्याधः सुदूरात् जालापहारकान् तान् अवलोक्य पश्चात् अधावत्। (उदाहरणम्)
(ङ)एकचित्तीभूयउड्डीयताम्अस्माभिः सर्वैः एकचित्तीभूय जालमादाय उड्डीयताम्
(च)प्रत्यभिज्ञायतद्वचनम्ततो हिरण्यकः तद्वचनं प्रत्यभिज्ञाय आनन्देन त्वरया बहिः निःसृत्य अब्रवीत्।
मिलान की कुंजी: ल्यबन्त पद क्रिया है, इसलिए उसके साथ जुड़ने वाला पद उसका कर्म या अधिकरण होगा — यही जाँचिए।
‘विकीर्य’ (बिखेरकर) — क्या बिखेरा? दाने → तण्डुलकणान् (कर्म)।
‘विस्तीर्य’ (फैलाकर) — क्या फैलाया? जाल → जालम् (कर्म)।
‘अवतीर्य’ (उतरकर) — कहाँ उतरे? भूमि पर → भूमौ (अधिकरण, सप्तमी)।
‘प्रत्यभिज्ञाय’ (पहचानकर) — क्या पहचाना? उसका वचन → तद्वचनम् (कर्म)।
‘एकचित्तीभूय’ के साथ कोई कर्म नहीं — उसके साथ मुख्य क्रिया ‘उड्डीयताम्’ ही आएगी।
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