प्र1.
पाठे प्रयुक्तेन ल्यप्प्रत्ययान्तपदेन सह उपयुक्तं पदं योजयत — (क) विकीर्य (ख) विस्तीर्य (ग) अवतीर्य (घ) अवलोक्य (ङ) एकचित्तीभूय (च) प्रत्यभिज्ञाय । [पदानि — जालम्, जालापहारकान्, उड्डीयताम्, तद्वचनम्, भूमौ, तण्डुलकणान्]
उत्तर
पुस्तक में (घ) अवलोक्य का मिलान उदाहरण-रूप में पहले से खींचा हुआ है। शेष पाँच का सही मेल नीचे है — प्रत्येक जोड़ी पाठ के अपने वाक्य से सिद्ध होती है।
| क्रमः | ल्यबन्तपदम् | उपयुक्तं पदम् | पाठस्य वाक्यम् |
|---|---|---|---|
| (क) | विकीर्य | तण्डुलकणान् | व्याधः तण्डुलकणान् विकीर्य जालं विस्तीर्य च प्रच्छन्नो भूत्वा स्थितः। |
| (ख) | विस्तीर्य | जालम् | व्याधः जालं विस्तीर्य प्रच्छन्नो भूत्वा स्थितः। |
| (ग) | अवतीर्य | भूमौ | सर्वे कपोताः भूमौ अवतीर्य तण्डुलकणान् भोक्तुं प्रवृत्ताः। |
| (घ) | अवलोक्य | जालापहारकान् | स व्याधः सुदूरात् जालापहारकान् तान् अवलोक्य पश्चात् अधावत्। (उदाहरणम्) |
| (ङ) | एकचित्तीभूय | उड्डीयताम् | अस्माभिः सर्वैः एकचित्तीभूय जालमादाय उड्डीयताम्। |
| (च) | प्रत्यभिज्ञाय | तद्वचनम् | ततो हिरण्यकः तद्वचनं प्रत्यभिज्ञाय आनन्देन त्वरया बहिः निःसृत्य अब्रवीत्। |
मिलान की कुंजी: ल्यबन्त पद क्रिया है, इसलिए उसके साथ जुड़ने वाला पद उसका कर्म या अधिकरण होगा — यही जाँचिए।
‘विकीर्य’ (बिखेरकर) — क्या बिखेरा? दाने → तण्डुलकणान् (कर्म)।
‘विस्तीर्य’ (फैलाकर) — क्या फैलाया? जाल → जालम् (कर्म)।
‘अवतीर्य’ (उतरकर) — कहाँ उतरे? भूमि पर → भूमौ (अधिकरण, सप्तमी)।
‘प्रत्यभिज्ञाय’ (पहचानकर) — क्या पहचाना? उसका वचन → तद्वचनम् (कर्म)।
‘एकचित्तीभूय’ के साथ कोई कर्म नहीं — उसके साथ मुख्य क्रिया ‘उड्डीयताम्’ ही आएगी।
‘विकीर्य’ (बिखेरकर) — क्या बिखेरा? दाने → तण्डुलकणान् (कर्म)।
‘विस्तीर्य’ (फैलाकर) — क्या फैलाया? जाल → जालम् (कर्म)।
‘अवतीर्य’ (उतरकर) — कहाँ उतरे? भूमि पर → भूमौ (अधिकरण, सप्तमी)।
‘प्रत्यभिज्ञाय’ (पहचानकर) — क्या पहचाना? उसका वचन → तद्वचनम् (कर्म)।
‘एकचित्तीभूय’ के साथ कोई कर्म नहीं — उसके साथ मुख्य क्रिया ‘उड्डीयताम्’ ही आएगी।