दीपकम् अध्याय 8 अभ्यासात् जायते सिद्धिः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
गच्छति, पठति, धावति, अहसत्, क्रीडति
उत्तर

भिन्नप्रकृतिकं पदम् — ‘अहसत्’।

(अलग पद है ‘अहसत्’।)

कारण: गच्छति, पठति, धावति, क्रीडति — चारों लट्लकारे (वर्तमानकाले), प्रथमपुरुष एकवचन हैं। किन्तु ‘अहसत्’ लङ्लकारे (भूतकाले) प्रथमपुरुष एकवचन है — इसके आरम्भ में ‘अ’ (अडागम) लगा है, जो भूतकाल का चिह्न है।
प्र2.
छात्रः, सेवकः, शिक्षकः, लेखिका, क्रीडकः
उत्तर

भिन्नप्रकृतिकं पदम् — ‘लेखिका’।

कारण: छात्रः, सेवकः, शिक्षकः, क्रीडकः — चारों पुँल्लिङ्गे अकारान्त शब्द हैं (रामवत् रूप)। ‘लेखिका’ स्त्रीलिङ्गम् आकारान्त शब्द है (रमावत् रूप)।
प्र3.
पत्रम्, मित्रम्, पुष्पम्, आम्रः, फलम्
उत्तर

भिन्नप्रकृतिकं पदम् — ‘आम्रः’।

कारण: पत्रम्, मित्रम्, पुष्पम्, फलम् — चारों नपुंसकलिङ्गे (फलवत्) हैं और ‘म्’ में समाप्त होते हैं। ‘आम्रः’ पुँल्लिङ्गम् है और विसर्गान्त है।
प्र4.
व्याघ्रः, भल्लूकः, गजः, कपोतः, शाखा, वृषभः, सिंहः
उत्तर

भिन्नप्रकृतिकं पदम् — ‘शाखा’।

कारण: व्याघ्रः, भल्लूकः, गजः, कपोतः, वृषभः, सिंहः — ये सब प्राणिवाचकानि (पशु-पक्षिवाचक) पुँल्लिङ्ग पद हैं। ‘शाखा’ प्राणी नहीं, वृक्षस्य अङ्गम् है और स्त्रीलिङ्ग भी है — इस प्रकार दो दृष्टियों से भिन्न है।
प्र5.
पृथिवी, वसुन्धरा, धरित्री, यानम्, वसुधा
उत्तर

भिन्नप्रकृतिकं पदम् — ‘यानम्’।

कारण: पृथिवी, वसुन्धरा, धरित्री, वसुधा — चारों पृथिव्याः पर्यायाः (समानार्थक) तथा स्त्रीलिङ्ग हैं। ‘यानम्’ का अर्थ है ‘वाहन’ — यह नपुंसकलिङ्ग है और अर्थ की दृष्टि से भी इस समूह में नहीं आता।
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