प्र1.
गच्छति, पठति, धावति, अहसत्, क्रीडति
उत्तर
भिन्नप्रकृतिकं पदम् — ‘अहसत्’।
(अलग पद है ‘अहसत्’।)
कारण: गच्छति, पठति, धावति, क्रीडति — चारों लट्लकारे (वर्तमानकाले), प्रथमपुरुष एकवचन हैं। किन्तु ‘अहसत्’ लङ्लकारे (भूतकाले) प्रथमपुरुष एकवचन है — इसके आरम्भ में ‘अ’ (अडागम) लगा है, जो भूतकाल का चिह्न है।