प्र1.
विशेषण-पदानि — अयम्, संस्कृतिविशिष्टायाम्, महत्त्वाधायिनी, प्राचीने, एकः ; विशेष्य-पदानि — संस्कृतिः, इतिहासे, प्रदेशः, समवायः, भारतभूमौ। उचितं मेलनं कुरुत।
उत्तर
मेलनम् इदम् —
| विशेषण-पदम् | विशेष्य-पदम् | लिङ्गम् · विभक्तिः · वचनम् | पाठे प्रयोगः |
|---|---|---|---|
| अयम् | प्रदेशः | पुँल्लिङ्ग · प्रथमा · एकवचन | जनजातिबहुलप्रदेशोऽयम् |
| संस्कृतिविशिष्टायाम् | भारतभूमौ | स्त्रीलिङ्ग · सप्तमी · एकवचन | विविध-संस्कृतिविशिष्टायां भारतभूमौ |
| महत्त्वाधायिनी | संस्कृतिः | स्त्रीलिङ्ग · प्रथमा · एकवचन | एतासां संस्कृतिः महत्त्वाधायिनी वर्तते |
| प्राचीने | इतिहासे | पुँल्लिङ्ग · सप्तमी · एकवचन | स्वीये प्राचीनेतिहासे |
| एकः | समवायः | पुँल्लिङ्ग · प्रथमा · एकवचन | अष्टराज्यानाम् एकः समवायोऽस्ति |
मिलाने का नियम: संस्कृत में विशेषण अपने विशेष्य के लिङ्ग, विभक्ति और वचन — तीनों का अनुसरण करता है। इसलिए पहले हर विशेषण का लिङ्ग-विभक्ति-वचन पहचानिए, फिर उसी लिङ्ग-विभक्ति-वचन वाला विशेष्य ढूँढ़िए। जैसे ‘संस्कृतिविशिष्टायाम्’ स्त्रीलिङ्ग सप्तमी एकवचन है, तो उसका जोड़ीदार भी वैसा ही होना चाहिए — ‘भारतभूमौ’। इसी तरह ‘प्राचीने’ सप्तमी एकवचन है, अतः ‘इतिहासे’ के साथ जुड़ेगा।
Tip: ‘महत्त्वाधायिनी’ का ‘-ई’ अन्त स्त्रीलिङ्ग का सङ्केत है — इसीलिए वह पुँल्लिङ्ग ‘समवायः’ या ‘प्रदेशः’ के साथ नहीं जुड़ सकता, केवल ‘संस्कृतिः’ के साथ जुड़ता है।