प्र1.
योग्यताविस्तरे प्रदत्तानि पञ्च तथ्यानि संस्कृतभाषया लिखत।
उत्तर
पुस्तक ने पाँच अतिरिक्त तथ्य दिए हैं —
- पत्काई इति भारतस्य पूर्वोत्तरभागे बर्मादेशेन सह सीमावर्तिक्षेत्रे स्थिता पर्वतशृङ्खला अस्ति। (पत्काई भारत के पूर्वोत्तर भाग में बर्मा के साथ लगते सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित एक पर्वतशृंखला है।)
- बराकनदी भारतस्य मणिपुरं, नागालैण्डं, मिजोरमः, असमः चेति राज्येषु एवञ्च बङ्गलादेशे वहन्ती ९०० कि.मी. दीर्घा नदी अस्ति। (बराक नदी मणिपुर, नागालैण्ड, मिजोरम, असम तथा बांग्लादेश में बहने वाली ९०० किलोमीटर लम्बी नदी है।)
- गारोपर्वतः, खासीपर्वतः, जयन्तियापर्वतः च उत्तरपूर्वीयपीठस्थले स्थिताः त्रयः पर्वतशृङ्खलाः सन्ति। (उत्तर-पूर्वी पठार पर स्थित ये तीन पर्वतशृंखलाएँ हैं।)
- मेघालयपीठस्थले कृष्णहीरकः (कोयला), लौह-अयस्कः, सिलिमेनाइटः, क्षारशिला, यूरेनियम् इत्यादयः खनिजसम्पदः प्रचुरं विद्यन्ते। (मेघालय के पठार पर कोयला, लौह-अयस्क, सिलिमेनाइट, क्षारशिला, यूरेनियम आदि खनिज-सम्पदाएँ प्रचुर मात्रा में हैं।)
- सप्तभगिन्यन्तर्गतप्रदेशानाम् उल्लेखः महाभारतं, रामायणं, पुराणानि इति प्राचीनग्रन्थेषु अपि उपलभ्यते। (सात बहनों के अन्तर्गत आने वाले प्रदेशों का उल्लेख महाभारत, रामायण तथा पुराणों जैसे प्राचीन ग्रन्थों में भी मिलता है।)
ये तथ्य पाठ से कैसे जुड़ते हैं: पाठ के आरम्भ में कहा गया था कि ये राज्य ‘पूर्वहिमालय-श्रेणिषु पत्काई-नागपर्वत-प्रदेशे च स्थितानि’ और ‘एतेषु बराक-ब्रह्मपुत्रादि-नद्यः प्रवहन्ति’। योग्यताविस्तरः उन्हीं दो नामों — पत्काई और बराक — का विस्तार करता है, और ‘पीठस्थलानि’ शब्द को गारो-खासी-जयन्तिया पर्वतों तथा मेघालय की खनिज-सम्पदा से जोड़कर ठोस बना देता है।