दीपकम् अध्याय 8 परियोजनाकार्यम्

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्” इति पाठस्य सन्दर्भे भित्तिपत्रे उत्तरपूर्वराज्यानां पृथक् पृथक् मानचित्रं प्रदर्शयत। संस्कृतभाषया कस्यापि राज्यस्य पञ्चवाक्यैः विवरणं लिखत। (उदाहरणम् — नागालैण्डम् : होन्बिल्-महोत्सवः अत्र प्रसिद्धः।)
उत्तर

यह करके दिखाने वाला कार्य है — उत्तर तुम्हारे अपने भित्तिपत्र (चार्ट) पर बनेगा। नीचे विधि, आवश्यक बातें तथा एक नमूना दिया है।

विधिः (कैसे करें) —

  1. एक बड़े चार्ट-पत्र पर बीच में भारत का मानचित्र बनाकर ऐशान्य कोण को अलग रंग से भरिए।
  2. उसके चारों ओर आठों राज्यों के पृथक्-पृथक् मानचित्र चिपकाइए — पुस्तक के पृष्ठ ९६ पर नागालैण्ड का ऐसा ही मानचित्र नमूने के रूप में दिया है।
  3. प्रत्येक मानचित्र के नीचे देवनागरी लिपि में संस्कृत नाम लिखिए — अरुणाचलप्रदेशः, असमः, मणिपुरम्, मेघालयः, मिजोरमः, नागालैण्डम्, त्रिपुरा, सिक्किमः।
  4. किसी एक राज्य को चुनकर उसके विषय में संस्कृत के पाँच वाक्य लिखिए।
  5. तथ्य पाठ तथा योग्यताविस्तरः की सारणी से ही लीजिए (राजधानी, राजभाषा, पर्वत, नदी, खनिज, विशेषता) — या सारणी में दी गई राज्य-वेबसाइट से।

उत्तम विवरणे किम् आवश्यकम् — राज्यस्य स्थितिः, राजधानी, भाषा, प्राकृतिकं वैशिष्ट्यम् तथा एकम् उत्सवः अथवा उद्योगः — पञ्चसु वाक्येषु एतानि पञ्च तथ्यानि आगच्छेयुः।

नमूना उत्तर (मेघालयः) —
  1. मेघालयः भारतस्य पूर्वोत्तरभागे स्थितम् एकं राज्यम् अस्ति।
  2. अस्य राजधानी शिलांगः अस्ति।
  3. अत्र खासी, पुआरः, गारो, आङ्ग्लभाषा च राजभाषाः सन्ति।
  4. गारोपर्वतः, खासीपर्वतः, जयन्तियापर्वतः च अस्मिन् उत्तरपूर्वीयपीठस्थले स्थिताः सन्ति।
  5. मेघालयपीठस्थले कृष्णहीरकः, लौह-अयस्कः, सिलिमेनाइटः, क्षारशिला, यूरेनियम् इत्यादयः खनिजसम्पदः प्रचुरं विद्यन्ते।
(हिन्दी सार — मेघालय भारत के पूर्वोत्तर भाग का एक राज्य है; राजधानी शिलांग; राजभाषाएँ खासी, पुआर, गारो और अंग्रेज़ी; यहाँ गारो, खासी और जयन्तिया पर्वत हैं; तथा यहाँ के पठार पर कोयला, लौह-अयस्क, सिलिमेनाइट, क्षारशिला और यूरेनियम जैसे खनिज प्रचुर मात्रा में मिलते हैं।)
प्र2.
पूर्वोत्तरराज्यानां पर्यटनस्थलानां नामानि लिखित्वा तेषां संक्षिप्तं वर्णनं कुरुत। (उदाहरणम् — राज्यम् : असमः, नाम : काजीरङ्गा राष्ट्रियम् अभयारण्यम्, वर्णनम् : अत्र एकशृङ्गगजाः दृश्यन्ते। एतत् यूनेस्को-विश्व-प्रत्नकीर्ति-स्थलम् अस्ति।)
उत्तर

पुस्तक के ढाँचे — राज्यम् / नाम / वर्णनम् — का ही पालन कीजिए। प्रत्येक स्थल के लिए तीन पंक्तियाँ बनाइए और वर्णन दो-तीन संस्कृत वाक्यों में लिखिए।

उत्तम उत्तर में क्या हो — स्थल किस राज्य में है, वहाँ क्या विशेष दिखता है, और वह क्यों प्रसिद्ध है — तीनों बातें।

नमूना उत्तर (पाठ तथा योग्यताविस्तरः पर आधारित) —
राज्यम्नामवर्णनम्
असमःमाजुलीअयं ब्रह्मपुत्रनदे स्थितः अस्ति। लोके बृहत्तमः रमणीयः नदीद्वीपः एषः एव।
(यह ब्रह्मपुत्र नद में स्थित है; संसार का सबसे बड़ा और रमणीय नदी-द्वीप यही है।)
मणिपुरम्लोकटक-सरोवरःअत्र सम्पूर्णे विश्वे एकमात्रं राष्ट्रियं प्लवमानम् उद्यानम् अस्ति। इदम् उद्यानं लोकटक-सरोवरे प्लवते।
(यहाँ सारे संसार का एकमात्र राष्ट्रीय तैरता हुआ उद्यान है, जो लोकटक झील पर तैरता है।)
नागालैण्डम्होन्बिल्-महोत्सवःएषः महोत्सवः अत्र प्रसिद्धः। अस्मिन् महोत्सवे राज्यस्य जनजातीनां नृत्यं, गीतं, वेशभूषा च प्रदर्श्यन्ते।
(यह महोत्सव यहाँ प्रसिद्ध है; इसमें राज्य की जनजातियों के नृत्य, गीत और वेशभूषा दिखाए जाते हैं।)
मेघालयःशिलांगःअयं मेघालयस्य राजधानी अस्ति। पर्वतैः वृक्षैः पुष्पैः च सुशोभितम् इदं स्थलं पर्यटकानां प्रियम् अस्ति।
(यह मेघालय की राजधानी है; पर्वतों, वृक्षों और पुष्पों से सुशोभित यह स्थान पर्यटकों को प्रिय है।)
सुझाव: जो स्थल पाठ में नहीं आए, उनके लिए योग्यताविस्तरः की सारणी में दी गई राज्य-वेबसाइट (जैसे www.meghalaya.gov.in) देखिए और तब तथ्य लिखिए — अपने मन से मत गढ़िए।
प्र3.
विद्यालये ‘उत्तरपूर्वसंस्कृतिदिवसः’ (एकः विशेषः दिवसः) आयोजनीयः। छात्राः विविधराज्यानां परिधानं नृत्यं भोजनं वेशभूषां च प्रस्तुवन्तु। सम्पूर्णः कार्यक्रमः संस्कृत-संवाद-माध्यमेन एव करणीयः।
उत्तर

यह पूरी कक्षा का सामूहिक कार्य है — इसकी योजना नीचे दी विधि से बनाइए।

आयोजनविधिः —

  1. अष्ट समूहाः रचयत — प्रत्येकः समूहः एकस्य राज्यस्य प्रतिनिधित्वं करोतु (अरुणाचलप्रदेशः … सिक्किमः)।
  2. प्रत्येकः समूहः स्वराज्यस्य परिधानं, वेशभूषां, नृत्यं, भोजनं च प्रदर्शयतु।
  3. मञ्चे प्रत्येकं समूहः स्वराज्यस्य विषये संस्कृतेन पञ्च वाक्यानि वदतु — राजधानी, भाषा, पर्वतः/नदी, विशेषता।
  4. सञ्चालनम् (anchoring) अपि संस्कृतभाषया एव करणीयम् — यही इस कार्य की मुख्य शर्त है।
  5. अन्ते सर्वे मिलित्वा पाठस्य श्लोकं गायन्तु — “पश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्॥”
नमूना उत्तर — मञ्चसञ्चालनस्य संस्कृत-संवादः
वक्तासंस्कृत-वाक्यम्हिन्दी अर्थ
सञ्चालकःसुप्रभातम्। अद्य अस्माकं विद्यालये ‘उत्तरपूर्वसंस्कृतिदिवसः’ आयोज्यते।सुप्रभात। आज हमारे विद्यालय में ‘उत्तर-पूर्व संस्कृति दिवस’ आयोजित हो रहा है।
सञ्चालकःप्रथमः समूहः अरुणाचलप्रदेशस्य परिचयं दास्यति। आगच्छन्तु छात्राः।पहला समूह अरुणाचल प्रदेश का परिचय देगा। छात्र आइए।
छात्रःनमो नमः। अरुणाचलप्रदेशस्य राजधानी ईटानगरम् अस्ति। अत्र भारते सर्वप्रथमं सूर्यस्य अरुणोदयः भवति।नमस्कार। अरुणाचल प्रदेश की राजधानी ईटानगर है। यहाँ भारत में सबसे पहले सूर्योदय होता है।
सञ्चालकःसाधु ! इदानीं मणिपुरस्य समूहः नृत्यं प्रस्तौति।बहुत अच्छा ! अब मणिपुर का समूह नृत्य प्रस्तुत करता है।
सर्वेपश्यत कोणमैशान्यं भारतस्य मनोहरम्॥भारत के मनोहर ईशान कोण को देखो !
यह कार्य क्यों: पाठ का सन्देश ही यह है कि पूर्वोत्तर की विविधता में एकता है। जब आठ समूह अलग-अलग वेशभूषा और नृत्य लेकर एक ही मंच पर एक ही भाषा — संस्कृत — में बोलते हैं, तब यह सन्देश शब्दों से नहीं, अनुभव से समझ में आता है।
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