दीपकम् अध्याय 9 कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? कोऽरुक् ? के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
पाठ का ढाँचा — आरम्भ में चित्र-संवाद (रसोई का दृश्य) है, जहाँ भूखी पुत्री शीघ्र भोजन माँगती है और माता कहती है — ‘अत्युष्णं भोजनं हितकरं न भवति’। इसी बहाने माता वाग्भट और शुक की कथा सुनाती है; फिर गद्य-कथा, पाँच श्लोक, शब्दार्थ-सारणी, व्याकरण-पेटिका और अभ्यास आते हैं। कथा — भारतवर्ष के वैद्य व्याधियों का शमन कैसे करते हैं, यह जानने के लिए भगवान् धन्वन्तरि मनोहर शुक-रूप धारण कर गाँव-गाँव घूमे और वृक्ष पर बैठकर ‘कोऽरुक्’ पुकारते रहे। किसी ने ध्यान नहीं दिया। अन्त में वे आचार्य वाग्भट की कुटी के प्राङ्गण में आए — वाग्भट ने प्रश्न समझा और उत्तर दिया। पाठ का मूल उत्तर — ‘कोऽरुक्?’ अर्थात् कः स्वस्थः नीरोगः वर्तते ? उत्तर तीन सूत्रों में — यः हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक् च, सः एव सर्वदा स्वस्थः भवति । हितभुक् = हितकर भोजन करने वाला, मितभुक् = मात्रा भर खाने वाला, ऋतुभुक् = ऋतु के अनुकूल खाने वाला।
अभ्यास
- चित्र-संवादः (पाठे विद्यमानः प्रश्नः)
- वयं शब्दार्थान् जानीमः
- इदम् अत्र अवधेयम्
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- अभ्यासात् जायते सिद्धिः
- योग्यताविस्तरः
- योग्यताविस्तरः
- योग्यताविस्तरः
- योग्यताविस्तरः
- परियोजनाकार्यम्