प्र1.
चरकसंहितायाः परिचयं लिखत — का रचितवान् ? तस्मिन् ग्रन्थे कति स्थानानि सन्ति ? तत्र किं वर्णितम् ?
उत्तर
उत्तरम् — महर्षिः चरकः चरकसंहिताग्रन्थं रचितवान्। चरकसंहिता इति आयुर्वेदस्य प्रमुखः ग्रन्थः अस्ति। अस्मिन् ग्रन्थे अष्ट स्थानानि सन्ति।
| क्रमः | स्थानम् | हिन्दी में |
|---|---|---|
| १ | सूत्रस्थानम् | मूल सिद्धान्त एवं सूत्र |
| २ | निदानस्थानम् | रोग का कारण एवं पहचान |
| ३ | विमानस्थानम् | माप, मात्रा एवं परीक्षा-विधि |
| ४ | शरीरस्थानम् | शरीर की रचना |
| ५ | इन्द्रियस्थानम् | इन्द्रियाँ एवं रोग-लक्षण |
| ६ | चिकित्सास्थानम् | चिकित्सा |
| ७ | कल्पस्थानम् | औषध-निर्माण |
| ८ | सिद्धिस्थानम् | चिकित्सा की सफलता एवं पञ्चकर्म |
ग्रन्थे किं वर्णितम् — अत्र न केवलं रोगाणां चिकित्सा एव वर्णिता, अपितु स्वास्थ्यस्य संरक्षणार्थम् आयुषः च संवर्धनार्थम् उपायाः अपि निर्दिष्टाः।
यही बात इस पाठ की जड़ है: चरकसंहिता केवल ‘रोग हो जाने पर क्या करें’ नहीं बताती; वह ‘रोग हो ही न, और आयु बढ़े’ — इसके उपाय भी बताती है। पाठ के तीनों श्लोक (हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक्) इसी दूसरे भाग से आए हैं। इसीलिए वाग्भट कहते हैं — ‘महर्षेः चरकस्य नाम भवन्तः श्रुतवन्तः स्युः।’
पाठ-सम्बन्धः: धन्वन्तरि ने वाग्भट से कहा था — ‘त्वम् अवश्यमेव आयुर्वेद-अष्टाङ्गविचार-सारभूतं तन्त्रं विरचयेः’ — अर्थात् आयुर्वेद के आठ अङ्गों के विचार का सार-ग्रन्थ रचो। आचार्य वाग्भट ने वही किया, और चरक उनसे भी पूर्ववर्ती आचार्य हैं।