दीपकम् अध्याय 9 परियोजनाकार्यम्

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
विद्यालयस्य परिसरे विद्यमानानां पञ्चवृक्षाणां नामानि तेषाम् औषधीयं प्रयोगं च लिखत।
उत्तर

कैसे करें: यह अपने विद्यालय के अहाते में घूमकर करने का काम है। (1) पाँच पेड़-पौधे चुनिए जो सचमुच आपके परिसर में हैं। (2) प्रत्येक का संस्कृत नाम और स्थानीय नाम लिखिए। (3) उसका जो औषधीय उपयोग आपके विज्ञान-शिक्षक, आयुर्वेद-चिकित्सक या घर के बड़े बताएँ, वही लिखिए। (4) चाहें तो पत्ती चिपकाकर या चित्र बनाकर एक चार्ट बनाइए।

नमूना उत्तर (नमूना — अपने विद्यालय के पेड़ों के अनुसार बदलिए):

संस्कृतनामहिन्दी नामऔषधीयः प्रयोगः (संस्कृतम्)हिन्दी में
तुलसीतुलसीतुलसीपत्राणां क्वाथः कासे श्वासे च उपकारकः।पत्तों का काढ़ा खाँसी-ज़ुकाम में लाभकारी।
निम्बःनीमनिम्बपत्राणि त्वग्रोगेषु व्रणशोधने च प्रयुज्यन्ते।पत्ते त्वचा-रोग तथा घाव साफ़ करने में।
आमलकीआँवलाआमलकीफलं केशानां नेत्रयोः पाचनस्य च हितकरम्।फल बाल, आँख और पाचन के लिए हितकर।
अश्वत्थःपीपलअश्वत्थस्य त्वक् श्वासरोगे उपयुज्यते; वृक्षः प्रचुरं प्राणवायुं ददाति।छाल श्वास-रोग में; पेड़ भरपूर ऑक्सीजन देता है।
घृतकुमारीघृतकुमारी (एलोवेरा)तस्याः द्रवः दाहे त्वचायाः च रक्षणे उपकरोति।गूदा जलन और त्वचा की रक्षा में उपयोगी।
ध्यातव्यम्: यह सूची पाठ में नहीं है — यह केवल नमूना है, ताकि आप प्रारूप समझ सकें। औषधीय प्रयोग सदा शिक्षक या वैद्य से पूछकर ही लिखें, और स्वयं कोई औषधि न लें।
प्र2.
स्वास्थ्येन सम्बद्धानां दशश्लोकानां संग्रहणं कुरुत।
उत्तर

कैसे करें: एक ‘स्वास्थ्य-श्लोक-सञ्चयिका’ बनाइए। हर पृष्ठ पर — श्लोक, उसका स्रोत (ग्रन्थ तथा अध्याय/श्लोक-संख्या), और दो पंक्तियों में भावार्थ। पाँच श्लोक तो इसी पाठ से मिल जाएँगे; शेष योग्यताविस्तरः की सूक्तियों, गीता, मनुस्मृति, सुभाषितसंग्रह अथवा पुस्तकालय की आयुर्वेद-पुस्तकों से लीजिए।

नमूना संग्रह (दश श्लोकाः) —

क्रमःश्लोकस्य आरम्भःस्रोतःविषयः
तच्च नित्यं प्रयुञ्जीत, स्वास्थ्यं येनानुवर्तते…चरकसंहिता (पाठे श्लोकः १)हितभुक्
अल्पादाने गुरूणां च लघूनां चातिसेवने…चरकसंहिता (पाठे श्लोकः २)मितभुक्
तस्याशिताद्यादाहारात् बलं वर्णश्च वर्धते…चरकसंहिता (पाठे श्लोकः ३)ऋतुभुक्
व्यायामः प्रातरुत्थाय, नित्यं दन्तविशोधनम्…पाठे श्लोकः ४दिनचर्या
सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः…पाठे श्लोकः ५सर्वकल्याण-प्रार्थना
आयुःसत्त्वबलारोग्यसुखप्रीतिविवर्धनाः…श्रीमद्भगवद्गीता १७/८सात्त्विक आहार
कट्वम्ललवणात्युष्णतीक्ष्णरूक्षविदाहिनः…श्रीमद्भगवद्गीता १७/९राजसिक आहार
यातयामं गतरसं पूति पर्युषितं च यत्…श्रीमद्भगवद्गीता १७/१०तामसिक आहार
अनारोग्यमनायुष्यमस्वर्ग्यं चातिभोजनम्…मनुस्मृतिः २/५७अतिभोजन-निषेधः
१०अशीतेनाम्भसा स्नानं कवोष्णदुग्धसेवनम्…भोजप्रबन्धःस्नानं तथा पथ्यम्
सुझावः: संग्रह करते समय हर श्लोक के आगे एक पंक्ति अपनी भी लिखिए — ‘इसे मैं अपने दिन में कैसे उतारूँ ?’ इससे संग्रह केवल नकल न रहकर अभ्यास बन जाएगा।
प्र3.
पाठे आगतान् श्लोकान् कण्ठस्थीकृत्य कक्षायां श्रावयत।
उत्तर

कैसे करें: पाठ के पाँचों श्लोक कण्ठस्थ करके कक्षा में सस्वर सुनाइए। कण्ठस्थ करने का सरल क्रम —

  1. पहले पदच्छेद पढ़िए, ताकि हर पद अलग-अलग समझ में आ जाए।
  2. फिर अन्वय पढ़िए — इससे वाक्य का ढाँचा मन में बैठ जाता है।
  3. अब श्लोक को अनुष्टुप् छन्द की चाल में, आठ-आठ अक्षरों के चार चरणों में, ताल देकर बोलिए।
  4. दिन में तीन बार, तीन दिन तक दोहराइए — याद पक्का हो जाएगा।

सुनाने योग्य पाँच श्लोक —

१. तच्च नित्यं प्रयुञ्जीत, स्वास्थ्यं येनानुवर्तते। अजातानां विकाराणामनुत्पत्तिकरं च यत्॥
२. अल्पादाने गुरूणां च लघूनां चातिसेवने। मात्राकारणमुद्दिष्टं द्रव्याणां गुरुलाघवे॥
३. तस्याशिताद्यादाहारात् बलं वर्णश्च वर्धते। तस्यर्तुसात्म्यं विदितं चेष्टाहारव्यपाश्रयम्॥
४. व्यायामः प्रातरुत्थाय, नित्यं दन्तविशोधनम्। स्वच्छजलेन सुस्नानं, बुभुक्षायाञ्च भोजनम्॥
५. सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः। सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥
उच्चारण-सङ्केतः: ‘प्रयुञ्जीत’ में ञ्ज, ‘चेष्टाहारव्यपाश्रयम्’ में श्र तथा ‘दुःखभाग्भवेत्’ में ग्भ — इन संयुक्ताक्षरों पर विशेष ध्यान दीजिए। श्लोक ३ में ‘तस्य + ऋतुसात्म्यम्’ की सन्धि से बना ‘तस्यर्तुसात्म्यम्’ एक ही शब्द की तरह बोलिए।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ