दीपकम् अध्याय 9 वयं शब्दार्थान् जानीमः

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
वयं शब्दार्थान् जानीमः — मातृभाषया अर्थं लिखत। (पाठस्य शब्दार्थ-सारणी, पृष्ठ 101–102)
उत्तर

सारणी का अन्तिम स्तम्भ जान-बूझकर खाली छोड़ा गया है — उसमें अपनी मातृभाषा (हिन्दी, मराठी, तमिल, बाङ्ग्ला … जो भी आपकी भाषा हो) में अर्थ लिखना है। नीचे पूरी सारणी संस्कृत-अर्थ, हिन्दी और अंग्रेज़ी सहित दी गई है; अन्तिम स्तम्भ के लिए नमूना उत्तर हिन्दी में दिया गया है।

शब्दःअर्थः (संस्कृतम्)हिन्दीEnglishमातृभाषया अर्थः (नमूना — हिन्दी)
निरामयाःनीरोगिणःस्वस्थHealthyरोगरहित, तन्दुरुस्त
अरुक्स्वस्थःनीरोगOne who is not sickजो बीमार न हो
झटितिशीघ्रमेवशीघ्रQuicklyतुरन्त, फ़ौरन
हितभुक्यः हितकरं खादतिहितकारक खाने वालाOne who eats nutritious foodजो लाभदायक भोजन करे
मितभुक्यः आवश्यक-मात्रा-अनुसारं भोजनं खादतिसीमित मात्रा में भोजन करने वालाOne who eats food in limited quantityजो नपा-तुला खाए
ऋतुभुक्यः ऋत्वनुकूलं पथ्यं भोजनं करोतिऋतु के अनुसार उपयुक्त भोजन करने वालाOne who eats food which is appropriate as per seasonजो मौसम के अनुसार खाए
प्रयुञ्जीतप्रयोगं कुर्यात्प्रयोग करेShould takeसेवन करना चाहिए
अनुवर्ततेअनुसरतिअनुसरण करता हैFollowsपीछे-पीछे चलता है, बना रहता है
अजातानाम्न उत्पन्नानाम्जो पैदा नहीं हुए उनकोOf those who are not bornजो अभी हुए ही नहीं
अनुत्पत्तिकरम्यत् (विकारान्) न उत्पादयतिजो (विकारों) को उत्पन्न न करेThat which may not cause (harm)जो रोग पैदा न होने दे
लघूनाम्सुपाच्यानाम्सुपाच्य खाद्यों काOf digestible foodहल्के, जल्दी पचने वाले भोजन का
उद्दिष्टम्उल्लिखितम्बताया गया हैWhich has been instructedकहा गया है
गरिष्ठम्यत् कठिनतया पच्यतेजो कठिनता से पचेDifficult to digestभारी, देर से पचने वाला
अतिमात्रम्मात्रायाः आधिक्यम्अत्यधिक मात्रा सेIn excessive quantityज़रूरत से ज़्यादा
अशिताद्यात्भुक्तात्खाए हुए सेFrom eaten foodखाए गए भोजन से
व्यपाश्रयम्आश्रयस्थानम्अवलम्बDependingजिस पर टिका हो, आधार
वर्णकान्तिजनकम्वर्णस्य सौन्दर्यस्य च उत्पादकम्रूप रंग निखारने वालाthat which enhances the beauty and complexionचेहरे का रंग-रूप निखारने वाला
बुभुक्षायाम्क्षुधायाम्भूख लगने परOn feeling hungryभूख लगे तब
क्यों यह अभ्यास उपयोगी है: ये अठारह शब्द ही पाठ के पाँचों श्लोकों की कुञ्जी हैं। ‘अजातानाम्’, ‘अनुत्पत्तिकरम्’ जाने बिना श्लोक १ नहीं खुलता; ‘लघूनाम्’, ‘गरिष्ठम्’, ‘अतिमात्रम्’ जाने बिना श्लोक २ नहीं, और ‘अशिताद्यात्’, ‘व्यपाश्रयम्’, ‘वर्णकान्तिजनकम्’ जाने बिना श्लोक ३ नहीं।
ध्यातव्यम्: हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक् — तीनों भुज् धातु + क्विप् से बने हलन्त (व्यञ्जनान्त) पुंलिङ्ग शब्द हैं, अतः प्रथमा एकवचन में भी रूप ‘हितभुक्’ ही रहता है, ‘हितभुक्कः’ नहीं।
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