प्र1.
वयं शब्दार्थान् जानीमः — मातृभाषया अर्थं लिखत। (पाठस्य शब्दार्थ-सारणी, पृष्ठ 101–102)
उत्तर
सारणी का अन्तिम स्तम्भ जान-बूझकर खाली छोड़ा गया है — उसमें अपनी मातृभाषा (हिन्दी, मराठी, तमिल, बाङ्ग्ला … जो भी आपकी भाषा हो) में अर्थ लिखना है। नीचे पूरी सारणी संस्कृत-अर्थ, हिन्दी और अंग्रेज़ी सहित दी गई है; अन्तिम स्तम्भ के लिए नमूना उत्तर हिन्दी में दिया गया है।
| शब्दः | अर्थः (संस्कृतम्) | हिन्दी | English | मातृभाषया अर्थः (नमूना — हिन्दी) |
|---|---|---|---|---|
| निरामयाः | नीरोगिणः | स्वस्थ | Healthy | रोगरहित, तन्दुरुस्त |
| अरुक् | स्वस्थः | नीरोग | One who is not sick | जो बीमार न हो |
| झटिति | शीघ्रमेव | शीघ्र | Quickly | तुरन्त, फ़ौरन |
| हितभुक् | यः हितकरं खादति | हितकारक खाने वाला | One who eats nutritious food | जो लाभदायक भोजन करे |
| मितभुक् | यः आवश्यक-मात्रा-अनुसारं भोजनं खादति | सीमित मात्रा में भोजन करने वाला | One who eats food in limited quantity | जो नपा-तुला खाए |
| ऋतुभुक् | यः ऋत्वनुकूलं पथ्यं भोजनं करोति | ऋतु के अनुसार उपयुक्त भोजन करने वाला | One who eats food which is appropriate as per season | जो मौसम के अनुसार खाए |
| प्रयुञ्जीत | प्रयोगं कुर्यात् | प्रयोग करे | Should take | सेवन करना चाहिए |
| अनुवर्तते | अनुसरति | अनुसरण करता है | Follows | पीछे-पीछे चलता है, बना रहता है |
| अजातानाम् | न उत्पन्नानाम् | जो पैदा नहीं हुए उनको | Of those who are not born | जो अभी हुए ही नहीं |
| अनुत्पत्तिकरम् | यत् (विकारान्) न उत्पादयति | जो (विकारों) को उत्पन्न न करे | That which may not cause (harm) | जो रोग पैदा न होने दे |
| लघूनाम् | सुपाच्यानाम् | सुपाच्य खाद्यों का | Of digestible food | हल्के, जल्दी पचने वाले भोजन का |
| उद्दिष्टम् | उल्लिखितम् | बताया गया है | Which has been instructed | कहा गया है |
| गरिष्ठम् | यत् कठिनतया पच्यते | जो कठिनता से पचे | Difficult to digest | भारी, देर से पचने वाला |
| अतिमात्रम् | मात्रायाः आधिक्यम् | अत्यधिक मात्रा से | In excessive quantity | ज़रूरत से ज़्यादा |
| अशिताद्यात् | भुक्तात् | खाए हुए से | From eaten food | खाए गए भोजन से |
| व्यपाश्रयम् | आश्रयस्थानम् | अवलम्ब | Depending | जिस पर टिका हो, आधार |
| वर्णकान्तिजनकम् | वर्णस्य सौन्दर्यस्य च उत्पादकम् | रूप रंग निखारने वाला | that which enhances the beauty and complexion | चेहरे का रंग-रूप निखारने वाला |
| बुभुक्षायाम् | क्षुधायाम् | भूख लगने पर | On feeling hungry | भूख लगे तब |
क्यों यह अभ्यास उपयोगी है: ये अठारह शब्द ही पाठ के पाँचों श्लोकों की कुञ्जी हैं। ‘अजातानाम्’, ‘अनुत्पत्तिकरम्’ जाने बिना श्लोक १ नहीं खुलता; ‘लघूनाम्’, ‘गरिष्ठम्’, ‘अतिमात्रम्’ जाने बिना श्लोक २ नहीं, और ‘अशिताद्यात्’, ‘व्यपाश्रयम्’, ‘वर्णकान्तिजनकम्’ जाने बिना श्लोक ३ नहीं।
ध्यातव्यम्: हितभुक्, मितभुक्, ऋतुभुक् — तीनों भुज् धातु + क्विप् से बने हलन्त (व्यञ्जनान्त) पुंलिङ्ग शब्द हैं, अतः प्रथमा एकवचन में भी रूप ‘हितभुक्’ ही रहता है, ‘हितभुक्कः’ नहीं।