कुतूहल अध्याय 1 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या यह रोमांचक नहीं है कि पृथ्वी पर हमारी दिनचर्या निर्धारित करने वाले दिनदर्शिका हमारे ग्रह से सुदूर स्थित पिंडों की गति से जुड़े हुए हैं?
उत्तर

हाँ — और यह संयोग नहीं है। दिनदर्शिका की प्रत्येक इकाई वास्तव में आकाश में हो रही किसी गति की गिनती ही है।

दिनदर्शिका की इकाईवह वास्तव में क्या गिनती हैकितना समय
दिनपृथ्वी का अपने अक्ष पर एक घूर्णनलगभग 24 घंटे
मासचंद्रमा की कलाओं का एक पूरा चक्र, एक अमावस्या से अगली अमावस्या तकलगभग 29.5 दिन
वर्षपृथ्वी की सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमालगभग 365.25 दिन
ऐसा क्यों होता है: दिनदर्शिका तभी उपयोगी है जब वह पूर्वानुमान लगाने दे — कब बोना है, वर्षा कब आएगी, कोई पर्व कब पड़ेगा। पूर्वानुमान उसी का लगाया जा सकता है जो नियमित रूप से दोहराया जाए। किसी भी घड़ी के बनने से बहुत पहले आकाश ही एकमात्र ऐसी वस्तु था जो पूर्ण नियमितता से दोहराता था — सूर्य प्रतिदिन उदय होता था और चंद्रमा वही कलाएँ बार-बार दोहराता था। अतः मनुष्य ने आकाश को गिना और वही गिनती दिनदर्शिका बन गई।

एक कठिनाई: ये तीनों गतियाँ एक-दूसरे में पूरी-पूरी नहीं बँटतीं, और इसी कारण संसार में एक से अधिक दिनदर्शिकाएँ हैं।

12 चंद्र मास = 12 × 29.5 ≈ 354 दिन
1 सौर वर्ष ≈ 365.25 दिन
365.25 − 354 ≈ प्रतिवर्ष लगभग 11 दिन कम
  • पूर्णतः चंद्र दिनदर्शिका (हिजरी) में मास ऋतुओं के सापेक्ष खिसकते रहते हैं, अतः रमज़ान धीरे-धीरे पूरे वर्ष में घूम जाता है।
  • पूर्णतः सौर दिनदर्शिका (दीवार पर लगी ग्रेगोरियन) में ऋतुएँ स्थिर रहती हैं और बचे हुए 0.25 दिन को समेटने के लिए हर चार वर्ष में एक अधिवर्ष-दिन जोड़ा जाता है।
  • भारतीय पंचांग चांद्र-सौर हैं: मास चंद्रमा के अनुसार चलते हैं, परंतु लगभग हर तीन वर्ष में एक अतिरिक्त मास (अधिक मास) जोड़ दिया जाता है ताकि पर्व अपनी ऋतु में ही रहें।

इस अध्याय में दी गई दिनदर्शिका चैत्र की है, जो भारतीय राष्ट्रीय दिनदर्शिका का प्रथम मास है। सन् 2025 में चैत्र 22 मार्च से 20 अप्रैल तक रहा — ठीक 30 दिन, और इसका आरंभ पृथ्वी की कक्षा में उसकी स्थिति से तय होता है, पृथ्वी पर लिए गए किसी निर्णय से नहीं।

क्या आप जानते हैं? चंद्रमा लगभग 3,84,000 km और सूर्य लगभग 15 करोड़ km दूर है। होली, ईद, दीवाली या पोंगल आप जिस दिन मनाते हैं वह इन्हीं दो सुदूर पिंडों की स्थिति से तय होता है — इसीलिए वही पर्व हर वर्ष अंग्रेजी दिनदर्शिका की भिन्न तिथि पर पड़ता है।
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