क्योंकि आटे के भीतर एक गैस बनती है और वह बाहर नहीं निकल पाती। यह गैस हजारों सूक्ष्म बुलबुलों में एकत्र हो जाती है, प्रत्येक बुलबुला आटे को बाहर की ओर धकेलता है और पूरा लोंदा फूल जाता है।
गैस कहाँ से आती है, यह इस पर निर्भर करता है कि आटा किस प्रकार तैयार हुआ —
- खमीर उठाया हुआ आटा (ब्रेड, भटूरा, इडली और डोसा का घोल): यीस्ट तथा कुछ जीवाणु जैसे सूक्ष्मजीव आटे की शर्करा और मंड पर पलते हैं और श्वसन के साथ कार्बन डाइऑक्साइड गैस छोड़ते हैं। इसीलिए ऐसे आटे को घंटों गरम स्थान पर रखा जाता है।
- खाने के सोडा से फुलाया गया आटा: इसमें कोई सजीव सम्मिलित नहीं है। सोडा दही या नींबू के रस जैसे किसी अम्ल के संपर्क में आते ही कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ देता है। इसीलिए सोडा और दही वाला भटूरे का घोल तुरंत बुलबुले छोड़ने लगता है।