कुतूहल अध्याय 12 क्रियाकलाप 12.6

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
शेष जीवों में चित्र 12.8 में दर्शाए गए अनुसार भोजन संबंधों को तीरों के माध्यम से दर्शाइए।
उत्तर

चित्र 12.8 में पहले से घास → शशक → तेंदुआ दर्शाया गया है। जिन जीवों को अभी जोड़ना है वे हैं — टिड्डा, मेंढक, साँप और उकाब। ये तीर जोड़िए—

घास टिड्डा (टिड्डा शाकाहारी है, अत: वह उत्पादक को खाता है)
टिड्डा मेंढक (मेंढक छोटा माँसाहारी है जो कीट पकड़ता है)
मेंढक साँप (साँप मेंढकों का शिकार करता है)
साँप उकाब (उकाब शीर्ष पर बड़ा माँसाहारी है)

पहले से दिए गए तीरों के साथ मिलाकर घास के मैदान में अब एक ही उत्पादक से आरंभ होने वाली दो श्रृंखलाएँ बनती हैं—

घास शशक तेंदुआ टिड्डा मेंढक साँप उकाब प्रत्येक तीर का अर्थ है “अपना भोजन और ऊर्जा इसे देता है”
एक ही घास के मैदान की दो आहार श्रृंखलाएँ, दोनों घास से आरंभ।
ऐसा क्यों होता है: घास दोनों श्रृंखलाओं में है क्योंकि एक उत्पादक एक साथ अनेक शाकाहारियों को पालता है। यही आहार जाल का पहला संकेत है — वास्तविक पारितंत्र कभी एक ही सीधी रेखा नहीं होते।
प्र2.
इस क्रियाकलाप में दिए गए जीवों से कौन-सी अन्य आहार श्रृंखला बनाई जा सकती है?
उत्तर

वही जो पुस्तक स्वयं देती है—

घास → टिड्डा → मेंढक → साँप → उकाब

इसे पोषी स्तरों के रूप में पढ़िए—

पोषी स्तरजीवभूमिका
पहलाघासउत्पादक — सूर्य के प्रकाश से भोजन बनाती है
दूसराटिड्डाशाकाहारी
तीसरामेंढकछोटा माँसाहारी
चौथासाँपमाँसाहारी
पाँचवाँउकाबबड़ा माँसाहारी
संकेत: श्रृंखला सदा उत्पादक से आरंभ होती है, क्योंकि ऊर्जा वहीं से प्रवेश करती है। जो श्रृंखला किसी जंतु से आरंभ हो वह अधूरी है।
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