कक्षा ८ विज्ञान अध्याय 12 क्रियाकलाप 12.7 के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन2026-09-19

प्र1.
चित्र 12.10 (क) में प्रत्येक प्रकार के जीवों की संख्या गिनिए। एक तालिका बनाइए और प्रत्येक प्रकार के जीवों की संख्या को लिखिए।
कदन्न — कुल 58 पादप · चूहा — कुल 15 · उकाब — 1
चित्र 12.10 (क), पृष्ठ 199 — खेत का पुनःआरेखित रेखाचित्र: कदन्न के पादप, चूहे और वृक्ष पर एक उकाब। चित्र में प्रत्येक प्रकार के जीवों की गिनती कीजिए।
उत्तर

चित्र 12.10 (क) के खेत के नौ टुकड़ों को एक-एक करके गिनने पर—

जीवआहार श्रृंखला में भूमिकाचित्र 12.10 (क) में गिनी गई संख्या
कदन्न (मिलेट) के पादपउत्पादकलगभग 50
चूहाशाकाहारी (उपभोक्ता)15
उकाबमाँसाहारी (उपभोक्ता)1

चूहे ठीक-ठीक गिने जा सकते हैं — सभी टुकड़ों में मिलाकर 15। कदन्न के पादप गुच्छों में बने हैं और कुछ वृक्ष के पीछे छिपे हैं, इसलिए भिन्न विद्यार्थियों की गणना थोड़ी भिन्न आएगी, लगभग 50 के आस-पास। अपने चित्र में स्वयं ध्यान से गिनिए और अपनी ही संख्या लिखिए; महत्त्वपूर्ण ठीक संख्या नहीं, बल्कि क्रम है — कदन्न ≫ चूहे ≫ उकाब।

स्वयं जाँचिए: यदि आपकी गणना में चूहे कदन्न के पादपों से अधिक निकलें तो फिर से गिनिए। कोई खेत अपने पादपों से अधिक शाकाहारियों को नहीं पाल सकता।
प्र2.
संख्याओं को आरोही क्रम में व्यवस्थित कीजिए। सर्वाधिक संख्या में उपस्थित जीव को आधार पर और सबसे कम संख्या वाले जीवों को शीर्ष पर रखिए। चित्र 12.10 (ख) में चूहे, कदन्न और उकाब को उपयुक्त स्थान पर रखिए।
चित्र 12.10 (ख), पृष्ठ 200 — पुस्तक के अनुसार रिक्त पिरामिड का पुनःआरेखित रेखाचित्र। चूहा पहले से मध्य स्तर पर है; कदन्न और उकाब को शेष दो स्तरों पर रखिए।
उत्तर

संख्याओं का आरोही क्रम — 1 (उकाब) < 15 (चूहे) < लगभग 50 (कदन्न)। सबसे बड़ी संख्या आधार पर और सबसे छोटी शीर्ष पर रखिए—

उकाब — 1 चूहे — 15 कदन्न के पादप — लगभग 50 तीसरा स्तर दूसरा स्तर पहला स्तर आधार पर उत्पादक, शीर्ष पर सबसे ऊपर का माँसाहारी
चित्र 12.10 (ख) पूरा किया गया — कदन्न–चूहा–उकाब आहार श्रृंखला का पिरामिड।
कदन्न (उत्पादक, पहला पोषी स्तर) → चूहा (दूसरा) → उकाब (तीसरा)
प्र3.
आपको किस प्रकार का चित्र दृष्टिगत होता है?
उत्तर

एक पिरामिड — आधार पर चौड़ा और शीर्ष पर सँकरा।

ऐसा इसलिए बनता है क्योंकि ऊर्जा श्रृंखला में किस प्रकार चलती है। चूहा जितना कदन्न खाता है, वह सब चूहे के शरीर में नहीं बदल जाता। उस भोजन का अधिकांश भाग चलने, श्वसन, शरीर गरम रखने और वृद्धि में खर्च होकर अंतत: ऊष्मा के रूप में निकल जाता है। केवल थोड़ा-सा भाग चूहे के शरीर में संचित रहता है, जो उकाब को मिलता है।

लगभग 50 कदन्न पादपों में संचित ऊर्जा → 15 चूहों को पालती है
15 चूहों में संचित ऊर्जा → 1 उकाब को पालती है
ऐसा क्यों होता है: एक पोषी स्तर से अगले तक जाते समय हर बार अधिकांश ऊर्जा खर्च होकर नष्ट हो जाती है। इसलिए प्रत्येक स्तर अपने नीचे वाले स्तर से बहुत कम जीवों को पाल सकता है और श्रृंखला ऊपर जाते-जाते सँकरी होती जाती है। इसी कारण आहार श्रृंखलाएँ छोटी होती हैं — चार-पाँच चरणों के बाद अगले स्तर के लिए पर्याप्त ऊर्जा बचती ही नहीं। ऊर्जा पारितंत्र में एक ही दिशा में बहती है और ऊष्मा बनकर निकल जाती है; पुनर्चक्रण केवल पदार्थ का होता है।
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