कुतूहल अध्याय 12 क्रियाकलाप 12.8

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
चित्र 12.11 को देखिए और ‘कौन किसे खाता है’ की लुप्त कड़ियों को तीर लगाकर दर्शाइए।
उत्तर

चित्र 12.11 में ये तीर पहले से बने हैं — घास → शशक, घास → चूहा, शशक → बाज, चूहा → लोमड़ी, टिड्डा → मेंढक, टिड्डा → पक्षी, मेंढक → उल्लू, पक्षी → साँप और साँप → बाज।

जो कड़ियाँ अभी लुप्त हैं और जिन्हें आपको जोड़ना चाहिए—

जोड़ा जाने वाला तीरकारण
घास → टिड्डाटिड्डा शाकाहारी है; घास उसका उत्पादक है।
शशक → लोमड़ीलोमड़ी चूहों के साथ-साथ शशक का भी शिकार करती है।
चूहा → उल्लूउल्लू रात में छोटे कृंतकों का शिकार करता है।
चूहा → बाजबाज भी खुले मैदान से चूहे उठा लेता है।
मेंढक → साँपसाँप केवल पक्षियों का नहीं, मेंढकों का भी शिकार करता है।
पक्षी → बाजबाज छोटे पक्षियों का शिकार करता है।
साँप → उल्लूउल्लू छोटे साँप भी पकड़ लेता है।
घास शशक चूहा टिड्डा मेंढक पक्षी लोमड़ी उल्लू साँप बाज पहले से बने तीर जो तीर आपको जोड़ने हैं
चित्र 12.11 पूरा किया गया। चित्र को पठनीय रखने के लिए कुछ और कड़ियाँ छोड़ दी गई हैं।
प्र2.
किसी पारितंत्र में भोजन संबंध के माध्यम से एक जीव से कितने अन्य जीव जुड़े हो सकते हैं?
उत्तर

दो से कहीं अधिक। चित्र 12.11 का चूहा लीजिए — वह घास खाता है, और उसे लोमड़ी, उल्लू तथा बाज खाते हैं; अर्थात एक ही जंतु से चार प्रत्यक्ष कड़ियाँ। और यह तो केवल चित्रित भाग है; वास्तविक चूहा अनाज और कीट भी खाता है तथा साँप और बिल्ली भी उसे पकड़ते हैं।

एक जीव → अपने नीचे अनेक प्रकार का भोजन
एक जीव → अपने ऊपर अनेक प्रकार के परभक्षी
अत: एक जीव प्राय: चार, पाँच या अधिक जीवों से सीधे और पूरे पारितंत्र से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ा रहता है
ऐसा क्यों होता है: कोई जंतु केवल एक ही वस्तु नहीं खाता और उसे केवल एक ही जीव नहीं खाता। अनेक भोजन-स्रोतों से जुड़े रहने के कारण ही कोई जंतु किसी एक स्रोत के खराब मौसम में भी जीवित रह पाता है। यही कारण है कि आहार श्रृंखलाएँ अलग-अलग नहीं रहतीं — वे एक-दूसरे को काटती हुई जुड़कर आहार जाल बनाती हैं।
प्र3.
क्या ये आहार श्रृंखलाएँ आपस में जुड़ी हुई हैं?
उत्तर

हाँ। चित्र 12.11 में आप कम से कम चार श्रृंखलाएँ खोज सकते हैं, और वे प्रत्येक स्तर पर जीव साझा करती हैं—

घास → शशक → बाज
घास → चूहा → लोमड़ी
घास → टिड्डा → मेंढक → उल्लू
घास → टिड्डा → पक्षी → साँप → बाज

घास चारों में है; बाज दो में है। चूँकि प्रत्येक जीव को दो या दो से अधिक प्रकार के जीव खा सकते हैं, इसलिए श्रृंखलाएँ जुड़कर एक जाल बनाती हैं — आहार जाल

ऐसा क्यों होता है: जाल किसी एक श्रृंखला की अपेक्षा कहीं अधिक स्थिर होता है। यदि किसी वर्ष टिड्डे कम हो जाएँ तो मेंढक को दूसरे रास्ते से भोजन मिल सकता है और उल्लू के पास चूहे रहते ही हैं। परंतु वही कड़ियाँ क्षति भी ले जाती हैं — एक जीव को हानि पहुँचे तो प्रभाव एक साथ कई श्रृंखलाओं में फैल सकता है, और अगला खंड इसी विषय पर है।
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