प्र1.
क्या आप चित्र 12.6 में अतिव्यापी पारितंत्रों को ढूँढ़ पाते हैं?
उत्तर
हाँ। चित्र 12.6 एक ही भूदृश्य में विभिन्न स्थलीय और जलीय पारितंत्रों का अतिव्यापन दर्शाता है—
- एक छोटी नदी — जलीय पारितंत्र;
- पहाड़, वन, घास के मैदान और खेत — स्थलीय पारितंत्र;
- खेत एक मानव निर्मित पारितंत्र है।
ये अलग-अलग खानों में नहीं बैठे हैं। ये अपने किनारों पर मिलते हैं और एक-दूसरे के साथ परस्पर क्रिया करते रहते हैं — नदी पहाड़ों से उतरकर वन, घास के मैदान और खेतों के साथ-साथ बहती है।
ऐसा क्यों होता है: पारितंत्रों की कोई दीवार नहीं होती। जल, पोषक तत्व और जीव एक से दूसरे में जाते रहते हैं — पहाड़ पर गिरी वर्षा नदी बनती है; खेत से बही मृदा नदी में पहुँचती है; वन में घोंसला बनाने वाला पक्षी घास के मैदान पर भोजन ढूँढ़ता है। इसीलिए पारितंत्र बहुत बड़े या बहुत छोटे हो सकते हैं — पूरा वन भी एक पारितंत्र है और उसके भीतर खड़ा एक बरगद भी।