कुतूहल अध्याय 2 क्रियाकलाप 2.8

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आपने गुँधे हुए आटे के आयतन, गंध या गठन में कोई परिवर्तन देखा?
उत्तर

हाँ — परंतु केवल कटोरा ‘क’ में, जिसमें खमीर मिलाया गया था।

कटोरा ‘क’ (आटा + चीनी + खमीर + गुनगुना पानी)कटोरा ‘ख’ (आटा + चीनी + गुनगुना पानी, खमीर नहीं)
आयतनबढ़ गया है — आटा गूँधते समय से स्पष्ट रूप से बड़ा हैलगभग अपरिवर्तित
गठननरम, स्पंजी और फूला हुआ; तोड़ने पर भीतर छोटे-छोटे छिद्र दिखते हैंकठोर और एकसमान, कोई छिद्र नहीं
गंधभिन्न, कुछ तीखी-सी गंधआटे की साधारण गंध
संकेत: यदि 4–5 घंटे में कोई परिवर्तन न दिखे तो आटे को कुछ देर और रखा रहने दीजिए — पुस्तक भी यही कहती है। खमीर को गुणन करने में समय लगता है, तभी परिवर्तन दिखता है। कटोरा ‘ख’ व्यर्थ नहीं है — वही तुलना है, और उसके बिना आप निश्चित नहीं हो सकते कि परिवर्तन खमीर से ही हुआ।
प्र2.
ऐसा क्यों होता है? खमीर की क्या भूमिका है? हमने आटे में चीनी और गरम पानी क्यों मिलाया?
उत्तर

खमीर एक जीवित सूक्ष्मजीव है — एक कवक — और आटा इसलिए फूलता है क्योंकि खमीर उसके भीतर श्वसन कर रहा है।

कटोरा ‘क’ में क्रम इस प्रकार है —

  1. खमीर सूक्ष्मजीवों के उस वर्ग का सदस्य है जिसे कवक कहते हैं। अन्य जीवों की भाँति यह भी श्वसन करता है और भोजन को विघटित करके अपनी वृद्धि तथा जैव प्रक्रमों के लिए ऊर्जा निर्मुक्त करता है (कक्षा 7 का अध्याय ‘जंतुओं में जैव प्रक्रम’)।
  2. इस प्रक्रिया के दौरान कार्बन डाइऑक्साइड निर्मुक्त होती है।
  3. गुँधा हुआ आटा नरम और लचीला होता है, अत: गैस स्वतंत्र रूप से बाहर नहीं निकल पाती। वह हज़ारों छोटे-छोटे बुलबुलों के रूप में भीतर ही एकत्र हो जाती है।
  4. प्रत्येक बुलबुला आटे को बाहर की ओर धकेलता है, अत: आटा फूल जाता है और नरम तथा फूला हुआ बन जाता है। तोड़ने पर जो छिद्र दिखते हैं वे यही बुलबुले हैं।
  5. खमीर इस प्रक्रिया के दौरान थोड़ी मात्रा में एल्कोहल भी उत्पन्न करता है, जिससे आटे से थोड़ी अलग गंध आती है।
आटे में मिलीचीनी खमीर श्वसन करता है (गरम स्थान, नम आटा) वृद्धि के लिए ऊर्जा कार्बन डाइऑक्साइडबुलबुले → आटा फूलता है थोड़ा एल्कोहलबदली हुई गंध
कटोरा ‘क’ का आटा क्यों फूलता है — खमीर चीनी को विघटित करके कार्बन डाइऑक्साइड और थोड़ा एल्कोहल निर्मुक्त करता है।

चीनी क्यों मिलाई गई: चीनी खमीर का भोजन है। इसी को विघटित करने से वह ऊर्जा निर्मुक्त होती है जिसकी खमीर को आवश्यकता है — और कार्बन डाइऑक्साइड उसी विघटन का उपोत्पाद है। सरलता से उपलब्ध भोजन न हो तो खमीर बहुत धीमी गति से कार्य करेगा।

गुनगुना पानी क्यों लिया गया: खमीर गरम स्थितियों में भली-भाँति वृद्धि करता है। गुनगुना पानी सूखे खमीर चूर्ण को सक्रिय करता है, उसे पूरे आटे में फैला देता है और आटे को उस तापमान पर रखता है जिस पर खमीर सबसे तेज़ी से गुणन करता है। ठंडे पानी से वह लगभग निष्क्रिय ही रहेगा — ठीक वैसा ही जैसा आप क्रियाकलाप 2.9 के दही वाले प्रयोग में देखेंगे।

क्या आप जानते हैं? खमीर के इस विशेष गुण का उपयोग पावरोटी, केक इत्यादि बनाने में किया जाता है। कुछ जीवाणु, जैसे लैक्टोबैसिलस, इडली और दोसा के घोल तथा भटूरे के आटे में यही कार्य करते हैं।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ