कुतूहल अध्याय 2 खोजबीन और विचार करें

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आपने कभी सोचा है कि यदि आपके आस-पास का अदृश्य संसार दृश्यमान हो जाए तो आप क्या देख पाएँगे?
उत्तर

आप पाएँगे कि आपके आस-पास लगभग कुछ भी वास्तव में खाली नहीं है — जल की प्रत्येक बूँद, मृदा की एक चुटकी, वायु, भोजन और स्वयं आपका शरीर भी सजीवों से भरा हुआ दिखाई देगा।

इस अध्याय में जब आप वास्तव में देखेंगे तो यही मिलेगा —

  • स्लाइड पर रखी तालाब या रुद्ध जल की एक बूँद में अमीबा और पैरामीशियम गति करते दिखते हैं तथा हरे एककोशिकीय शैवाल भी (क्रियाकलाप 2.4, तालिका 2.1)।
  • मृदा निलंबन की ऊपरी परत से ली गई बूँद में ब्रेड मोल्ड, अन्य कवक, शैवाल और गोलाकार, कॉमा, सर्पिल तथा छड़ाकार जीवाणु दिखते हैं (क्रियाकलाप 2.5, तालिका 2.2)।
  • प्याज की पतली झिल्ली ईंटों की दीवार जैसी दिखती है और कपोल के भीतरी भाग से खुरचा गया पदार्थ बहुभुजाकार कोशिकाएँ दिखाता है।
  • सड़ते हुए नींबू या टमाटर पर कवक की वृद्धि पाउडर या रुई जैसी दिखती है, और आपकी अपनी आँत में वे जीवाणु रहते हैं जो पाचन में सहायता करते हैं।
ये क्यों नहीं दिखते: मानव नेत्र केवल एक निश्चित आकार से बड़ी वस्तुओं को ही देख सकते हैं। ये जीव उससे कहीं छोटे हैं, इसीलिए लंबे समय तक अज्ञात रहे। सूक्ष्मदर्शी इन्हें 100 से 400 गुना तक आवर्धित करता है, तभी ये दिखाई देते हैं।
प्र2.
आपको क्या लगता है कि इस अदृश्य संसार का अवलोकन करना — ‘आकार’, ‘जटिलता’ अथवा ‘सजीवों’ के संबंध में आपके सोचने के ढंग को कैसे परिवर्तित कर सकता है?
उत्तर

यह तीनों ही धारणाओं को बदल देता है।

धारणापहले जो सोचते थेअदृश्य संसार जो दिखाता है
आकारसजीव वही है जो दिखाई देजीवन की कोई न्यूनतम सीमा नहीं है। जीवाणु उस सबसे छोटे कण से भी बहुत छोटे हैं जिसे आँख पकड़ सकती है, फिर भी वे भोजन लेते, बढ़ते और गुणन करते हैं। दूसरी ओर शुतुरमुर्ग के अंडे का पीतक एक ही कोशिका है जिसका व्यास लगभग 130 से 170 मिलीमीटर है।
जटिलताइतना छोटा है तो सरल ही होगाकोशिका तरल पदार्थ का एक थैलामात्र नहीं है। इसमें कोशिका झिल्ली, कोशिकाद्रव्य, केंद्रक और पादप कोशिका में लवक तथा रसधानी होते हैं — प्रत्येक का अपना विशेष प्रकार्य। एककोशिकीय अमीबा अपने सभी जैव प्रक्रम उसी एक कोशिका में पूरे करता है।
‘सजीव’ किसे कहेंसजीव और निर्जीव स्पष्ट रूप से अलग हैंविषाणु सूक्ष्मदर्शीय और अकोशिकीय होते हैं — वे कोशिकाओं से बने ही नहीं हैं और जीवित कोशिका में प्रवेश करने पर ही गुणन करते हैं। अत: ‘सजीव’ की सीमारेखा उतनी स्पष्ट नहीं है जितनी दिखती है।
क्या आप जानते हैं? यह परिवर्तन दूसरी दिशा में भी काम करता है। जैसे ही हुक ने देखा कि कॉर्क छोटे-छोटे रिक्त प्रकोष्ठों से बना है, यह विचार संभव हो गया कि सभी शरीर कोशिकाओं से बने हैं — और यही एक विचार पौधे, कीट और आपकी व्याख्या कर देता है।
प्र3.
क्या आपने कभी सोचा है कि ये सूक्ष्म जीव एक-दूसरे के साथ किस प्रकार परस्पर क्रिया करते हैं?
उत्तर

ये निरंतर परस्पर क्रिया करते हैं — आपस में, पौधों-जंतुओं के साथ और हमारे साथ भी। अध्याय हर प्रकार की क्रिया का वास्तविक उदाहरण देता है।

  • बड़े जीवों के भीतर रहकर उनकी सहायता करते हैं। राइजोबियम सेम, मटर और मसूर जैसी फलियों की मूल ग्रंथिकाओं में रहता है; यह वायु से नाइट्रोजन अवशोषित करके पौधे के लिए उपयोगी बनाता है और पौधा उसे आश्रय तथा भोजन देता है। हमारी आँत के जीवाणु पाचन में सहायता करते हैं।
  • दूसरे जीवों के अवशेषों पर पलते हैं। कवक और जीवाणु गिरी पत्तियों, फलों-सब्जियों के छिलकों और गोबर पर क्रिया करके इन जटिल पदार्थों को सरल, पोषक-समृद्ध पदार्थों में बदल देते हैं — विघटन। ये पोषक तत्व मिट्टी में लौट जाते हैं और पौधे उन्हें पुन: उपयोग करते हैं।
  • एक-दूसरे का भोजन बनते हैं। सूक्ष्म शैवाल सूर्य के प्रकाश से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं और अनेक जलीय जीवों का भोजन बनते हैं — तालाब की आहार शृंखला यहीं से आरंभ होती है।
  • प्रतिस्पर्धा करते हैं, और रोके भी जा सकते हैं। अचार और मुरब्बे इसलिए खराब नहीं होते क्योंकि नमक या चीनी की अधिक मात्रा इन जीवों को पनपने नहीं देती।
  • कुछ आक्रमण भी करते हैं। विषाणु पौधों, जंतुओं अथवा जीवाण्विक कोशिकाओं को संक्रमित कर रोग उत्पन्न कर सकते हैं।
यह क्यों महत्त्वपूर्ण है: इनमें से लगभग हर क्रिया का अंत किसी वस्तु के विघटित होकर आगे बढ़ने में होता है — पोषक तत्व मिट्टी में, शर्करा दही में, पादप अपशिष्ट खाद में। यही पुनर्चक्रण प्रकृति में सूक्ष्मजीवों का मुख्य कार्य है।
प्र4.
अपने प्रश्नों को साझा कीजिए।
उत्तर

इस पृष्ठ के चित्र आपके मन में जो प्रश्न उठाते हैं उन्हें लिखिए — यहाँ अच्छा प्रश्न वही है जिसे आप आगे चलकर स्लाइड, सूक्ष्मदर्शी या रसोईघर के किसी प्रयोग से जाँच सकें।

प्रश्न बनाने की विधि — जो आपने देखा उसे लीजिए, उसमें क्यों, कैसे, कहाँ या यदि ऐसा हो तो जोड़िए, और देखिए कि कोई अवलोकन उसका उत्तर दे सकता है या नहीं।

नमूना प्रश्न —

  • यदि तालाब के जल की एक बूँद में इतने जीव हैं तो पूरे तालाब में कितने होंगे?
  • सिंक के पास रखी ब्रेड तीन दिन में फफूँदीदार क्यों हो जाती है और रेफ्रिजरेटर में रखी क्यों नहीं?
  • क्या मेरे बगीचे की मृदा के सूक्ष्मजीव खेत की मृदा के सूक्ष्मजीवों जैसे ही हैं?
  • यदि जीवाणु मेरी आँत में रहकर पाचन में सहायता करते हैं तो बीमार पड़ने पर उनका क्या होता है?
  • प्याज की झिल्ली की कोशिका में कोशिका भित्ति है और मेरी कपोल कोशिका में नहीं — तो कपोल कोशिका अपना आकार किससे बनाए रखती है?
  • गर्मियों में दही रातभर में जम जाता है पर सर्दियों में बहुत देर लगती है। तापमान जीवाणुओं के साथ ठीक-ठीक क्या करता है?
संकेत: इस सूची को अपनी नोटबुक में रखिए। अध्याय के अंत में पुस्तक कहती है कि अपने साथियों द्वारा बनाए प्रश्नों पर चिंतन करें और उत्तर देने का प्रयास करें — तब तक इनमें से अनेक प्रश्नों के उत्तर मिल चुके होंगे।
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