कुतूहल अध्याय 2 क्रियाकलाप 2.1

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आपने कुछ रोचक देखा?
उत्तर

हाँ — जल से भरे फ्लास्क के माध्यम से देखने पर पुस्तक के अक्षर बड़े दिखाई देते हैं।

ऐसा क्यों होता है: गोल पेंदे वाले फ्लास्क में भरे जल का आकार देखिए। वह बीच से मोटा और किनारों पर पतला है — ठीक उसी काँच के वक्रित टुकड़े जैसा जिसे लोगों ने लेंस कहा था, क्योंकि वह मसूर की दाल के दाने जैसा दिखता था। अक्षर से आने वाला प्रकाश जल के इस वक्रित पिंड से गुजरते समय मुड़ जाता है और आपकी आँख तक ऐसे पहुँचता है मानो वह किसी बहुत बड़े अक्षर से आया हो। इसीलिए जल से भरा फ्लास्क आवर्धक लेंस की भाँति कार्य करता है।
स्वयं जाँचिए: फ्लास्क को पृष्ठ के ऊपर धीरे-धीरे ऊपर-नीचे कीजिए। अक्षर बड़े-छोटे होते हैं और एक स्थिति पर धुँधले पड़ जाते हैं। लेंस केवल उचित दूरी पर ही स्पष्ट आवर्धन देता है — इसी कारण सूक्ष्मदर्शी में फोकस करने का नॉब होता है।
प्र2.
अब एक वास्तविक आवर्धक लेंस लीजिए और किसी छोटे जीव जैसे चींटी को देखिए। क्या आप उसके शरीर की संरचना को पहले से अधिक स्पष्ट देख पाए?
उत्तर

हाँ। जो विवरण नग्न आँखों से अलग-अलग नहीं दिखते वे आवर्धक लेंस से स्पष्ट हो जाते हैं।

चींटी में अब आप देख सकते हैं —

  • शरीर स्पष्ट भागों में बँटा हुआ, जिनके बीच पतली-सी ‘कमर’ है;
  • मुड़े हुए श्रृंगिकाओं (एंटीना) का एक जोड़ा जिसे चींटी बार-बार भूमि पर थपथपाती है;
  • छह संधित टाँगें, जिनके सिरों पर बारीक नखर हैं;
  • शरीर पर महीन रोम और आगे की ओर जबड़े।
आवर्धक लेंस सहायता क्यों करता है: चींटी की टाँग पर दो बिंदु इतने पास हैं कि नग्न आँख को वे एक ही बिंदु लगते हैं। लेंस चींटी को आपके दृष्टि-क्षेत्र में कहीं बड़ा स्थान दे देता है, जिससे वे दोनों बिंदु इतनी दूर पड़ते हैं कि आँख उन्हें अलग-अलग देख ले। आवर्धन बस इतना ही करता है — और यही कारण है कि आवर्धक लेंस से सूक्ष्मदर्शी तक प्रत्येक नए उपकरण ने पहले से अधिक दिखाया।
प्र3.
लंबे समय तक लोग अपने आस-पास के सूक्ष्म जीवों को देखने के लिए उत्सुक थे परंतु वे उन्हें अपनी नग्न आँखों से नहीं देख सकते थे तो फिर हम इस अदृश्य संसार की खोज कैसे कर पाए? क्या आप जानते हैं कि कौन-सी वैज्ञानिक खोज ने हमें सर्वप्रथम इस सूक्ष्म संसार को देखने में सहायता की?
उत्तर

सूक्ष्मदर्शी के आविष्कार ने। सूक्ष्मदर्शी ने ही छोटे-छोटे जीवों से भरे अदृश्य संसार का मार्ग खोला।

वैज्ञानिकवर्षक्या किया
रॉबर्ट हुक1665माइक्रोग्राफिया प्रकाशित की जिसमें उन छोटी वस्तुओं के आवर्धित चित्र थे जिन्हें पहले किसी ने नहीं देखा था। उनका सूक्ष्मदर्शी वस्तुओं को वास्तविक आकार से 200 से 300 गुना बड़ा दिखाता था। कॉर्क के एक पतले टुकड़े में उन्हें मधुमक्खी के छत्ते जैसे छोटे-छोटे रिक्त प्रकोष्ठ दिखे और उन्होंने प्रत्येक को कोशिका कहा — विज्ञान में इस शब्द का पहला प्रयोग।
एंटोनी वॉन ल्यूवेनहॉक1660 का दशकडच वैज्ञानिक जिन्होंने अधिक परिष्कृत लेंस बनाकर अधिक उपयोगी सूक्ष्मदर्शी का निर्माण किया। वे जीवाणु और रक्त कोशिकाओं जैसे सूक्ष्मजीवों को स्पष्ट रूप से देखने और उनका वर्णन करने वाले प्रथम व्यक्ति थे और सूक्ष्मजैविकी के जनक कहलाते हैं।
इतना समय क्यों लगा: कठिनाई जिज्ञासा की कमी नहीं थी — कठिनाई यह थी कि इन जीवों को इतना बड़ा दिखाने वाला कोई उपकरण ही नहीं था। जैसे ही लेंस इतने अच्छे बने कि उन्हें जोड़कर सूक्ष्मदर्शी बनाया जा सका, सूक्ष्मजीवों का पूरा संसार एक ही पीढ़ी में दृश्यमान हो गया।
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