कुतूहल अध्याय 2 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आपने कभी यह सोचा है कि आपकी आँखों से दिखाई देने वाला सबसे छोटा जीव कौन-सा है? इस विषय पर विचार कीजिए कि आपकी आँखें कितनी छोटी वस्तु को देख सकती हैं?
उत्तर

बिना किसी उपकरण के हममें से अधिकांश लोग जो सबसे छोटे जीव देख पाते हैं वे हैं छोटी चींटी, पत्ती पर बैठा कुटकी (माइट) या फूल पर बैठा कोई नन्हा कीट — लगभग एक पूर्ण विराम या सरसों के दाने के बराबर। इससे छोटी वस्तु को आँख पृष्ठभूमि से अलग नहीं कर पाती।

यह सीमा क्यों है: मानव नेत्र केवल एक निश्चित आकार से बड़ी वस्तुओं को ही देख सकते हैं। उससे छोटी वस्तु का प्रतिबिंब इतना छोटा बनता है कि आँख उसे एक अलग आकृति के रूप में दर्ज ही नहीं कर पाती। यह ध्यान की कमी नहीं, आँख की निश्चित सीमा है — और यही कारण है कि हमारे आस-पास के इतने जीव इतने लंबे समय तक अज्ञात रहे।
करके देखिए: पैनी पेंसिल से कागज़ पर एक पूर्ण विराम बनाइए और धीरे-धीरे पीछे हटिए। जिस दूरी पर बिंदु लुप्त हो जाए वही आपकी अपनी आँख की सीमा है। अब उसी बिंदु को आवर्धक लेंस से देखिए — वह एक खुरदरा, असमान धब्बा दिखेगा। इस अध्याय का प्रत्येक जीव उस बिंदु से भी छोटा है।
प्र2.
आपने कुछ लोगों को पढ़ने के लिए चश्मा पहने हुए देखा होगा। क्या आपने सोचा है कि चश्मा उन्हें स्पष्ट देखने में कैसे सहायता करता है? अथवा क्या होता है जब हम किसी वस्तु का अवलोकन करने के लिए आवर्धक लेंस का उपयोग करते हैं?
उत्तर

दोनों एक ही प्रकार से कार्य करते हैं — काँच का एक वक्रित टुकड़ा वस्तु को आँख के सामने उसके वास्तविक आकार से बड़ा प्रस्तुत कर देता है।

  • पढ़ने का चश्मा ऐसे लेंस का उपयोग करता है जो बीच से मोटा और किनारों पर पतला होता है। जो छपाई छोटी और धुँधली लगती थी वह बड़ी और स्पष्ट दिखने लगती है, जिससे पाठक अक्षरों को सरलता से पहचान लेता है।
  • आवर्धक लेंस उसके नीचे रखी वस्तु के साथ यही करता है। चींटी, बालू का कण या फूल का कोई भाग आपके दृष्टि-क्षेत्र का बड़ा हिस्सा घेर लेता है, जिससे आपस में मिले हुए विवरण अलग-अलग दिखने लगते हैं।
ऐसा क्यों होता है: काँच का यह टुकड़ा वक्रित है — बीच से मोटा, किनारों पर पतला, मसूर की दाल के दाने जैसा, इसीलिए इसे लेंस कहा जाता है। वस्तु से आने वाला प्रकाश लेंस से गुजरते समय मुड़ता है और आँख में ऐसे प्रवेश करता है मानो वह किसी बहुत बड़ी वस्तु से आया हो। इसी प्रकार लेंसों को चरण-दर-चरण सुधारते जाने से अंतत: सूक्ष्मदर्शी बना।
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