कुतूहल अध्याय 2 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या विभिन्न जंतु कोशिकाएँ भी आकार और संरचना में भिन्न होती हैं?
उत्तर

हाँ। एक ही जंतु में — यहाँ तक कि एक ही मानव शरीर में — कोशिकाएँ आकार, आमाप और संरचना में बहुत भिन्न होती हैं।

  • पेशी कोशिका तर्कुरूपी होती है — बीच से मोटी और दोनों सिरों पर पतली (चित्र 2.6 क)।
  • तंत्रिका कोशिका बहुत लंबी और शाखित होती है (चित्र 2.6 ख)।
  • कपोल की कोशिकाएँ, जो आपने क्रियाकलाप 2.3 में देखीं, पतली, चपटी और बहुभुजाकार होती हैं।
  • कुछ कोशिकाएँ गोलाकार होती हैं तो कुछ लंबी एवं पतली।

विभिन्न जीवों में कोशिकाओं की संख्या भी भिन्न-भिन्न होती है — जीवाणु या अमीबा में केवल एक, और वृक्ष या मनुष्य में असंख्य।

ये भिन्न क्यों होती हैं: क्योंकि इनके कार्य भिन्न हैं। कोशिकाओं का विशिष्ट आकार, आमाप और संरचना उन्हें अपने विशिष्ट कार्य करने में सहायता करती है — अगले दो प्रश्न इसी बात को आगे बढ़ाते हैं।
प्र2.
मानव की पेशी कोशिका और तंत्रिका कोशिका को चित्र 2.6 (क) और (ख) में दर्शाया गया है। आप इनमें क्या समानताएँ और भिन्नताएँ देखते हैं?
उत्तर

दोनों एक ही योजना पर बनी जंतु कोशिकाएँ हैं; भिन्नता लगभग पूरी तरह आकार की है।

पेशी कोशिका (चित्र 2.6 क)तंत्रिका कोशिका (चित्र 2.6 ख)
मूल भागकोशिका झिल्ली, कोशिकाद्रव्य, केंद्रककोशिका झिल्ली, कोशिकाद्रव्य, केंद्रक
कोशिका भित्ति / हरित लवकअनुपस्थित (जंतु कोशिका है)अनुपस्थित (जंतु कोशिका है)
आकारतर्कुरूपी — बीच से मोटी, दोनों सिरों पर नुकीलीबहुत लंबी, सिरों पर अनेक शाखाओं वाली
गुणपतली और लचीली, अत: छोटी-लंबी हो सकती हैदीर्घीकृत और शाखित, अत: दूर तक पहुँच सकती है
प्रकार्यसंकुचित और शिथिल होकर गति उत्पन्न करती हैशरीर के एक भाग से दूसरे भाग तक संदेश ले जाती है
संकेत: तंत्रिका कोशिका को न्यूरॉन भी कहते हैं। इसकी शाखाएँ ही एक कोशिका को अनेक कोशिकाओं तक पहुँचने देती हैं, जिससे संदेश शरीर में शीघ्रता से फैल जाता है।
प्र3.
कोशिकाएँ एक-दूसरे से इतनी भिन्न क्यों दिखती हैं? क्या कोशिका का आकार और संरचना उसके प्रकार्य से संबंधित है?
उत्तर

हाँ — कोशिका का आकार और संरचना सीधे उसके कार्य से जुड़े होते हैं। कोशिकाओं का विशिष्ट आकार, आमाप और संरचना उन्हें अपने विशिष्ट कार्य करने में सहायता करती है।

कोशिकाउसका आकारवह प्रकार्य जो यह आकार संभव बनाता है
कपोल की आंतरिक कोशिकापतली और चपटीकपोल की आंतरिक सतह पर चिकनी सुरक्षात्मक परत बनाती है
तंत्रिका कोशिका (न्यूरॉन)दीर्घीकृत और शाखितशरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचकर संदेशों को शीघ्रता से पहुँचाती है
भोजन नली की पेशी कोशिकापतली, लचीली, तर्कुरूपीलहर की तरह संकुचित और शिथिल होकर भोजन को आमाशय तक धकेलती है
प्याज की झिल्ली की कोशिकालगभग आयताकार, कोशिका भित्ति सहितसघन रूप से जमकर एक दृढ़ सुरक्षात्मक परत बनाती है
कुछ पादप कोशिकाएँलंबी और नलिकाकारसिरे से सिरा जुड़कर लंबी नलिकाएँ बनाती हैं जो पूरे पौधे में पानी पहुँचाती हैं
ऐसा क्यों होता है: कोई आकार केवल एक विशेष प्रकार के कार्य के लिए ही उपयोगी होता है। संदेश को लंबी दूरी तय करनी है, इसलिए उसे ले जाने वाली कोशिका लंबे धागे जैसी खिंची हुई है और सिरों पर शाखित है। परत को बिना अंतराल के क्षेत्र ढकना है, इसलिए उसकी कोशिकाएँ चपटी और चौड़ी हैं। जिस कोशिका को खींचना है उसे छोटा होना आना चाहिए, इसलिए वह पतली और लचीली है। आकार बदल दीजिए तो कोशिका अपना कार्य ही न कर पाएगी — यही कारण है कि समान कार्य करने वाली कोशिकाएँ चाहे कहीं भी हों, एक जैसी दिखती हैं।
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