प्र1.
अब विचार करें कि यदि पृथ्वी पर सूक्ष्मजीव न होते तो क्या होता?
उत्तर
जीवन जिस रूप में हम जानते हैं वह चल ही नहीं पाता। सबसे गंभीर हानि यह होती कि कुछ भी विघटित न होता — पोषक तत्व मृत शरीरों में सदा के लिए बँधे रह जाते।
| सूक्ष्मजीव आज क्या करते हैं | यदि वे न होते तो |
|---|---|
| गिरी पत्तियों, पादप अपशिष्ट, गोबर और मृत जंतुओं का विघटन | मृत पौधे, मृत जंतु और अपशिष्ट ढेर होते जाते और कभी विघटित न होते। पोषक तत्व मिट्टी में कभी न लौटते, मृदा की उर्वरता समाप्त हो जाती और पौधे ठीक से वृद्धि न कर पाते। |
| खाद और कंपोस्ट बनाना | न प्राकृतिक खाद होती, न खाद के गड्ढे; किसान पूर्णतया अन्य साधनों पर निर्भर हो जाते। |
| ऑक्सीजन रहित स्थितियों में अपशिष्ट से बायोगैस | खाना पकाने, तापन, बिजली या वाहनों के लिए बायोगैस न मिलती। |
| राइजोबियम मूल ग्रंथिकाओं में वायु से नाइट्रोजन अवशोषित करता है | फलीदार पौधों को वायु से नाइट्रोजन न मिलती और फसल चक्रण से मृदा समृद्ध न होती। |
| भोजन में खमीर और लैक्टोबैसिलस | न दही, न इडली, न दोसा, न भटूरा, न पावरोटी या केक — ये सब किण्वन पर ही निर्भर हैं। |
| आँत के जीवाणु पाचन में सहायता करते हैं | हमारा अपना पाचन भी प्रभावित होता। |
| सूक्ष्म शैवाल सूर्य के प्रकाश से भोजन बनाते हैं | पृथ्वी की आधी से अधिक ऑक्सीजन आपूर्ति समाप्त हो जाती और सूक्ष्म शैवालों पर पलने वाले जलीय जीव अपना भोजन खो देते। |
एकमात्र लाभ यह होता कि पौधों, जंतुओं और मनुष्यों में रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीव भी न होते। परंतु ऊपर की सारी हानियों के सामने यह लाभ बहुत छोटा है।
इसके पीछे का विचार: प्रकृति चक्रों में कार्य करती है। पौधा मिट्टी से पोषक तत्व लेता है, जंतु पौधे को खाता है, और अंतत: दोनों मर जाते हैं। इस चक्र को केवल विघटनकर्ता ही पूरा करते हैं, पोषक तत्वों को मिट्टी में लौटाकर। उन्हें हटा दीजिए तो चक्र एकमार्गी रास्ता बन जाता है जो शीघ्र ही समाप्त हो जाएगा।