कुतूहल अध्याय 2 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अब विचार करें कि यदि पृथ्वी पर सूक्ष्मजीव न होते तो क्या होता?
उत्तर

जीवन जिस रूप में हम जानते हैं वह चल ही नहीं पाता। सबसे गंभीर हानि यह होती कि कुछ भी विघटित न होता — पोषक तत्व मृत शरीरों में सदा के लिए बँधे रह जाते।

सूक्ष्मजीव आज क्या करते हैंयदि वे न होते तो
गिरी पत्तियों, पादप अपशिष्ट, गोबर और मृत जंतुओं का विघटनमृत पौधे, मृत जंतु और अपशिष्ट ढेर होते जाते और कभी विघटित न होते। पोषक तत्व मिट्टी में कभी न लौटते, मृदा की उर्वरता समाप्त हो जाती और पौधे ठीक से वृद्धि न कर पाते।
खाद और कंपोस्ट बनानान प्राकृतिक खाद होती, न खाद के गड्ढे; किसान पूर्णतया अन्य साधनों पर निर्भर हो जाते।
ऑक्सीजन रहित स्थितियों में अपशिष्ट से बायोगैसखाना पकाने, तापन, बिजली या वाहनों के लिए बायोगैस न मिलती।
राइजोबियम मूल ग्रंथिकाओं में वायु से नाइट्रोजन अवशोषित करता हैफलीदार पौधों को वायु से नाइट्रोजन न मिलती और फसल चक्रण से मृदा समृद्ध न होती।
भोजन में खमीर और लैक्टोबैसिलसन दही, न इडली, न दोसा, न भटूरा, न पावरोटी या केक — ये सब किण्वन पर ही निर्भर हैं।
आँत के जीवाणु पाचन में सहायता करते हैंहमारा अपना पाचन भी प्रभावित होता।
सूक्ष्म शैवाल सूर्य के प्रकाश से भोजन बनाते हैंपृथ्वी की आधी से अधिक ऑक्सीजन आपूर्ति समाप्त हो जाती और सूक्ष्म शैवालों पर पलने वाले जलीय जीव अपना भोजन खो देते।

एकमात्र लाभ यह होता कि पौधों, जंतुओं और मनुष्यों में रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीव भी न होते। परंतु ऊपर की सारी हानियों के सामने यह लाभ बहुत छोटा है।

इसके पीछे का विचार: प्रकृति चक्रों में कार्य करती है। पौधा मिट्टी से पोषक तत्व लेता है, जंतु पौधे को खाता है, और अंतत: दोनों मर जाते हैं। इस चक्र को केवल विघटनकर्ता ही पूरा करते हैं, पोषक तत्वों को मिट्टी में लौटाकर। उन्हें हटा दीजिए तो चक्र एकमार्गी रास्ता बन जाता है जो शीघ्र ही समाप्त हो जाएगा।
प्र2.
सूक्ष्मजीवों की विविधता हमारे रसोईघर में कैसे सहायक होती है?
उत्तर

भिन्न-भिन्न सूक्ष्मजीव हमें भिन्न-भिन्न खाद्य पदार्थ देते हैं — और यही विविधता कुछ खाद्य पदार्थों को सूक्ष्मजीवों से बचाने में भी काम आती है।

सूक्ष्मजीवक्या हैरसोईघर में क्या करता है
खमीर (यीस्ट)एककोशिकीय कवकआटे में श्वसन करके कार्बन डाइऑक्साइड निर्मुक्त करता है, जिससे पावरोटी, केक और पेस्ट्री नरम और फूली हुई बनती हैं; थोड़ी मात्रा में एल्कोहल भी बनाता है जिससे आटे से भिन्न गंध आती है
लैक्टोबैसिलसएक जीवाणुदूध का किण्वन करके दही बनाता है और लैक्टिक अम्ल बनाकर उसे खट्टा करता है; इडली-दोसा के घोल और भटूरे के आटे का किण्वन भी करता है
नमक और चीनी (परिरक्षक के रूप में)सूक्ष्मजीव नहीं — ये सूक्ष्मजीवों को रोकते हैंनमक या चीनी की अधिक मात्रा सूक्ष्मजीवों को पनपने नहीं देती, इसीलिए अचार और मुरब्बे लंबे समय तक चलते हैं
एक ही विचार से इतने भिन्न परिणाम क्यों: हर स्थिति में सूक्ष्मजीव केवल भोजन ले रहा है — अपनी वृद्धि के लिए ऊर्जा पाने हेतु शर्करा को विघटित कर रहा है। भिन्नता उस उपोत्पाद में है जो वह पीछे छोड़ता है। खमीर कार्बन डाइऑक्साइड और एल्कोहल छोड़ता है, अत: आटा फूल जाता है। लैक्टोबैसिलस लैक्टिक अम्ल छोड़ता है, अत: दूध जम जाता है और खट्टा हो जाता है। रसोइए को केवल सही सूक्ष्मजीव और उसे भाने वाली गरमाहट देनी होती है।
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