प्र1.
मान लीजिए कोई वस्तु विरामावस्था में है। क्या इसका तात्पर्य यह है कि इस वस्तु पर कोई बल कार्य नहीं कर रहा है?
उत्तर
जी नहीं। इसका तात्पर्य है कि वस्तु पर लगने वाले बल एक-दूसरे को संतुलित कर रहे हैं।
अपनी मेज पर रखी पुस्तक को लीजिए। पृथ्वी उसे नीचे की ओर खींच रही है — यह खिंचाव उसका भार है और वह कहीं समाप्त नहीं हुआ है। साथ ही मेज पुस्तक को ठीक उतने ही बल से ऊपर की ओर धकेल रही है। दोनों बल एक ही पुस्तक पर विपरीत दिशाओं में लगकर एक-दूसरे को निरस्त कर देते हैं, अत: पुस्तक गति नहीं करती। विरामावस्था यह बताती है कि बल संतुलित हैं, यह नहीं कि बल हैं ही नहीं।
क्या आप जानते हैं? रस्साकशी में जब कोई भी दल नहीं हिलता तब भी यही होता है — दोनों दल प्रबल बल लगा रहे हैं, परंतु समान और विपरीत दिशाओं में। संतुलित एवं असंतुलित बलों के विषय में आप उच्च कक्षाओं में विस्तार से पढ़ेंगे।