कुतूहल अध्याय 5 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
जल से भरी बाल्टी से मग द्वारा जल निकालते समय क्या आपने अनुभव किया है कि जब तक मग जल में रहता है तो यह हल्का लगता है?
उत्तर

हाँ — और जैसे ही मग जल की सतह से बाहर आता है वह तुरंत भारी लगने लगता है।

दोनों स्थितियों में मग पर पृथ्वी का खिंचाव वही है; मग में कुछ जोड़ा या घटाया नहीं गया। परिवर्तन केवल यह है कि जब तक मग जल के भीतर है तब तक जल उसे ऊपर की ओर धकेलता है। यह ऊपर की ओर लगने वाला बल भार का कुछ भाग स्वयं सँभाल लेता है, अत: आपके हाथ को कम बल लगाना पड़ता है और मग हल्का लगता है। किसी द्रव द्वारा किसी वस्तु पर ऊपर की दिशा में लगाया गया बल उत्क्षेप अथवा उत्प्लावन बल कहलाता है।

प्र2.
यदि हम कुछ वस्तुओं को जल की सतह पर रखते हैं तो उनमें से कुछ वस्तुएँ तैरती हैं जबकि कुछ नीचे डूब जाती हैं। पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल सभी वस्तुओं पर कार्य कर रहा है तो सभी वस्तुएँ जल के पात्र की तली की ओर क्यों नहीं गिरती?
उत्तर

क्योंकि जल में रखी वस्तु पर केवल गुरुत्वाकर्षण बल ही नहीं लगता। जल उस पर उत्प्लावन बल लगाकर ऊपर की ओर धकेलता है, और परिणाम इस बात पर निर्भर करता है कि दोनों में से कौन-सा बल बड़ा है।

गुरुत्वाकर्षण बल उत्प्लावन बल से अधिक → वस्तु डूब जाती है
गुरुत्वाकर्षण बल उत्प्लावन बल के बराबर → वस्तु तैरती है

अत: जो वस्तुएँ तैरती हैं वे गुरुत्वाकर्षण से बच नहीं रही हैं — पृथ्वी उन्हें उतने ही बल से खींच रही है जितने से डूबने वाली वस्तुओं को। वे इसलिए तैरती हैं क्योंकि उनके नीचे का जल उन्हें ठीक उतने ही बल से ऊपर धकेल रहा है, और दोनों बल एक-दूसरे को संतुलित कर देते हैं।

क्या आप जानते हैं? उत्प्लावन बल जिस एक कारक पर निर्भर करता है वह है द्रव का घनत्व — इसीलिए अत्यधिक खारे जल में तैरना मीठे जल के तालाब की तुलना में सरल होता है। घनत्व के विषय में आप इस पुस्तक के आगे के अध्याय में जानेंगे।
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