कुतूहल अध्याय 8 क्रियाकलाप 8.3

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या आप दोनों टर्मिनलों पर रखी परखनलियों के अंदर गैस के बुलबुले बनते हुए देखते हैं?
उत्तर

हाँ। 9V बैटरी के दोनों टर्मिनलों से महीन बुलबुले लगातार ऊपर उठते हैं और जल से भरी परखनलियों के बंद सिरे पर एकत्रित होकर जल को नीचे धकेलते जाते हैं।

ऐसा क्यों होता है: जल में से प्रवाहित विद्युत उसे दो गैसों में विघटित कर देती है। बीकर में तनु सल्फ्यूरिक अम्ल की कुछ बूँदें बिना कारण नहीं डाली गईं — शुद्ध जल विद्युत को बहुत कम प्रवाहित करता है, और अम्ल जल को इतना चालक बना देता है कि परिवर्तन दिखाई देने योग्य दर से हो सके।
सुरक्षा सर्वोपरि: यह क्रियाकलाप शिक्षक के निर्देशन में ही किया जाना चाहिए, सल्फ्यूरिक अम्ल से कार्य करते समय सावधानी रखिए और लिथियम-आयन बैटरी का प्रयोग कदापि न करें।
प्र2.
प्रत्येक परखनली में एकत्रित गैस के आयतन का अवलोकन कीजिए (चित्र 8.8, घ)। क्या दोनों परखनलियों में एकत्रित गैसों के आयतन समान हैं?
उत्तर

नहीं। दोनों आयतन स्पष्ट रूप से असमान हैं — एक परखनली में दूसरी से लगभग दोगुनी गैस एकत्रित होती है।

परखनलीगैस का आयतनएकत्रित गैस
एक टर्मिनल परअधिक — लगभग दोगुनाहाइड्रोजन
दूसरे टर्मिनल परकम — लगभग आधाऑक्सीजन
ऐसा क्यों होता है: जल में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के परमाणुओं की संख्या का अनुपात निश्चित रूप से 2 : 1 है। अत: जल के विघटन पर हाइड्रोजन ऑक्सीजन की लगभग दोगुनी मात्रा में मुक्त होती है — और आप उस निश्चित अनुपात को अपनी आँखों से देख रहे हैं। पूरे 10–15 मिनट प्रतीक्षा कीजिए; कम समय में अंतर आँकने योग्य नहीं होता।
प्र3.
एक जलती हुई मोमबत्ती को परखनलियों के मुँह के पास लाकर इन गैसों का एक-एक करके परीक्षण कीजिए। प्रत्येक स्थिति में क्या होता है?
उत्तर

दोनों गैसें पूर्णतया भिन्न व्यवहार करती हैं।

  • अधिक आयतन वाली परखनली: परखनली के मुँह पर गैस के जलते ही तीखी ‘फट्’ की ध्वनि सुनाई देती है (चित्र 8.9, क)।
  • कम आयतन वाली परखनली: कोई ध्वनि नहीं; इसके स्थान पर मोमबत्ती की लौ अधिक प्रदीप्त हो जाती है (चित्र 8.9, ख)।
ऐसा क्यों होता है: ‘फट्’ की ध्वनि उस गैस के स्वयं वायु में तेजी से जलने की ध्वनि है — अर्थात वह गैस एक ईंधन है। लौ का अधिक प्रदीप्त होना बताता है कि वह गैस स्वयं नहीं जलती, बल्कि मोमबत्ती को बेहतर जलने में सहायता करती है — अर्थात वह दहन में सहायक है। एक ही द्रव से प्राप्त दो गैसों का ठीक विपरीत व्यवहार पहला संकेत है कि जल कोई एक सरल पदार्थ नहीं है।
सुरक्षा सर्वोपरि: गैस परीक्षण सावधानी से कीजिए और प्रेक्षण स्थल (सेट-अप) से सुरक्षित दूरी बनाए रखिए।
प्र4.
प्रत्येक परखनली में कौन-सी गैस उपस्थित है?
उत्तर

‘फट्’ की ध्वनि हाइड्रोजन की पुष्टि करती है; अधिक प्रदीप्त लौ ऑक्सीजन की।

परीक्षणप्रेक्षणपहचानी गई गैस
परखनली के मुँह पर जलती मोमबत्ती‘फट्’ की ध्वनि सुनाई देती हैहाइड्रोजन (चित्र 8.9, क)
परखनली के मुँह पर जलती मोमबत्तीलौ अधिक प्रदीप्त हो जाती हैऑक्सीजन (चित्र 8.9, ख)
जल (विद्युत प्रवाहित करने पर)हाइड्रोजन + ऑक्सीजन
यह क्या सिद्ध करता है: जल दो भिन्न घटकों में विघटित हो गया है। अत: जल तत्व नहीं हो सकता — यहाँ शुद्ध पदार्थ हाइड्रोजन और ऑक्सीजन हैं, और ये दोनों ही तत्व हैं।
प्र5.
क्या ये एकत्रित गैसें जलवाष्प हो सकती हैं?
उत्तर

नहीं। यदि ये जलवाष्प होतीं तो परखनली के भीतर ठंडी होते ही संघनित होकर पुन: जल में परिवर्तित हो जातीं — परंतु गैस गैस ही बनी रहती है और जल के तल को नीचे धकेलती जाती है।

यह प्रश्न इससे क्यों सुलझ जाता है: जलवाष्प अब भी जल ही है; उसकी केवल अवस्था बदली है, और ठंडा करने पर वह सीधे द्रव जल बन जाती है, जैसा आपने कक्षा 6 में पढ़ा था। ये गैसें ऐसा नहीं करतीं। इसके अतिरिक्त जलवाष्प न तो ‘फट्’ की ध्वनि देती है और न ही मोमबत्ती की लौ को अधिक प्रदीप्त करती है। अत: जल में विद्युत प्रवाहित करना अवस्था परिवर्तन है ही नहीं — यह दो पूर्णतया नए पदार्थों में परिवर्तन है।
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