कुतूहल अध्याय 8 क्रियाकलाप 8.5

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
इन्हें एक वाच-ग्लास में भली-भाँति मिश्रित कीजिए। इस मिश्रण को प्रतिदर्श ‘अ’ (चित्र 8.14) के रूप में चिह्नित कीजिए। क्या यह एक समरूप मिश्रण है अथवा विषमरूप? क्या आप लोहे और सल्फर दोनों पदार्थों को अभी भी पृथक-पृथक देख सकते हैं?
उत्तर

प्रतिदर्श ‘अ’ एक विषमरूप मिश्रण है, और हाँ — लोहे तथा सल्फर को अब भी पृथक-पृथक देखा जा सकता है।

ऐसा क्यों होता है: ध्यान से देखने पर पीले सल्फर चूर्ण के बीच लोहे के धूसर-काले कण पहचाने जा सकते हैं; आवर्धक लेंस से यह और स्पष्ट हो जाता है। कोई अभिक्रिया हुई ही नहीं — दोनों तत्व केवल मिलाए गए हैं, अत: प्रत्येक अपना रंग, अपनी बनावट और अपने शेष सभी गुणधर्म बनाए रखता है। यही मिश्रण की परिभाषा है, और चूँकि दोनों प्रकार के कण इतने बड़े हैं कि पहचाने जा सकें, मिश्रण विषमरूप है।
संकेत: मात्राएँ मनमानी नहीं हैं। 5.6 ग्राम लोहा और 3.2 ग्राम सल्फर द्रव्यमान का 7 : 4 अनुपात है — वही अनुपात जिसमें आगे गरम करने पर दोनों तत्व पूर्णत: संयोजित हो जाते हैं और कुछ भी शेष नहीं बचता।
प्र2.
अब आपके पास दो प्रतिदर्श हैं— प्रतिदर्श ‘अ’ और प्रतिदर्श ‘ब’ (चित्र 8.16, क और 8.16, ख)। दोनों प्रतिदर्शों ‘अ’ और ‘ब’ की निम्नलिखित चरणों के अनुसार तुलना कीजिए और अपने प्रेक्षणों को तालिका 8.2 में अंकित कीजिए।
उत्तर

पूर्ण की गई तालिका 8.2 इस प्रकार है।

क्र. सं.प्रयोगप्रतिदर्श ‘अ’प्रतिदर्श ‘ब’
1.स्वरूप — (i) रंगदो रंग एक साथ — पीले सल्फर के बीच लोहे के काले कणपूरे पदार्थ में एक समान काला
स्वरूप — (ii) बनावटदानेदार और असमान; दो प्रकार के कण पहचाने जा सकते हैंमहीन, एकसमान चूर्ण; सर्वत्र एक जैसा
2.चुंबकीय परीक्षणलौह चूर्ण चुंबक की ओर आकर्षित होकर उठ जाता हैबिलकुल आकर्षित नहीं होता
3.गैसीय परीक्षण — (i) गंधगैस की कोई गंध नहींगैस की गंध सड़े हुए अंडे जैसी
गैसीय परीक्षण — (ii) जलना‘फट्’ की ध्वनि के साथ जलती है (हाइड्रोजन)‘फट्’ की ध्वनि नहीं देती; यह हाइड्रोजन सल्फाइड है
यह तालिका क्या दिखाती है: प्रत्येक पंक्ति में उत्तर भिन्न है। प्रतिदर्श ‘अ’ लोहे और सल्फर के साथ-साथ रखे होने जैसा व्यवहार करता है; प्रतिदर्श ‘ब’ इनमें से किसी जैसा भी नहीं। मिश्रण और यौगिक का पूरा अंतर यही है, प्रेक्षणों के रूप में लिखा हुआ।
प्र3.
चरण 1 — स्वरूप। प्रतिदर्श ‘अ’ और प्रतिदर्श ‘ब’ के स्वरूपों, जैसे — रंग और बनावट की तुलना कीजिए।
उत्तर

दोनों बिलकुल एक जैसे नहीं दिखते।

  • प्रतिदर्श ‘अ’: चितकबरा मिश्रण — पीले सल्फर चूर्ण के बीच लोहे के काले कण स्पष्ट दिखाई देते हैं; बनावट खुरदरी और असमान है।
  • प्रतिदर्श ‘ब’: एक समान काला द्रव्यमान, पीसकर महीन चूर्ण बनाया हुआ, जिसका रंग और बनावट प्रत्येक बिंदु पर एक जैसी है।
ऐसा क्यों होता है: प्रतिदर्श ‘अ’ में लोहा और सल्फर अब भी स्वयं ही हैं, अत: आपको दोनों के स्वरूप एक साथ दिखते हैं। प्रतिदर्श ‘ब’ में दोनों तत्व रासायनिक रूप से संयोजित होकर एक ही नया पदार्थ — आयरन सल्फाइड — बन चुके हैं। न काला-धूसर दिखने वाला लोहा शेष है और न पीला दिखने वाला सल्फर; वहाँ एक ही पदार्थ है, अत: एक ही स्वरूप है।
प्र4.
चरण 2 — चुंबक परीक्षण। एक चुंबक लीजिए और उसे प्रतिदर्श ‘अ’ (चित्र 8.17, क) और प्रतिदर्श ‘ब’ (चित्र 8.17, ख) पर बारी-बारी से घुमाएँ। आपने क्या अवलोकन किया?
उत्तर

चुंबक प्रतिदर्श ‘अ’ से लौह चूर्ण खींच लेता है और पीला सल्फर पीछे छोड़ देता है। प्रतिदर्श ‘ब’ पर उसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

प्रतिदर्शचुंबक के प्रति अनुक्रियायह क्या बताता है
‘अ’लौह चूर्ण चुंबक से चिपक जाता है; सल्फर शेष रह जाता हैलोहा अब भी लोहे के रूप में उपस्थित है — ‘अ’ मिश्रण है और उसे पृथक किया जा सकता है
‘ब’कुछ भी आकर्षित नहीं होतामुक्त लोहा शेष नहीं है — एक नया पदार्थ बन चुका है
ऐसा क्यों होता है: चुंबक द्वारा आकर्षित होना लोहे का गुणधर्म है। मिश्रण में प्रत्येक घटक अपने गुणधर्म बनाए रखता है, अत: प्रतिदर्श ‘अ’ का लोहा अब भी चुंबकीय है और चुंबक मिश्रण को पृथक करने का साधन बन जाता है। प्रतिदर्श ‘ब’ में लोहा सल्फर के साथ रासायनिक रूप से संयोजित हो चुका है; बना हुआ यौगिक आयरन सल्फाइड अपने ही गुणधर्मों वाला भिन्न पदार्थ है, और चुंबकीय आकर्षण उनमें से एक नहीं है।
प्र5.
चरण 3 — गैस परीक्षण। एक परखनली में प्रतिदर्श ‘अ’ की थोड़ी मात्रा लीजिए और उसमें तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की कुछ बूँदें डालिए (चित्र 8.18, क)। आप क्या अवलोकन करते हैं? उत्सर्जित गैस को हाथ से अपनी नाक की ओर लाते हुए धीरे से सूँघिए (चित्र 8.19)।
उत्तर

गैस के बुलबुले तेजी से निकलते हैं और परखनली के तल पर एक पीला ठोस शेष रह जाता है। हाथ से नाक की ओर लाकर सूँघने पर गैस की कोई गंध नहीं होती।

वास्तव में मिश्रण में उपस्थित केवल लोहा ही अभिक्रिया करता है—

आयरन + तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → आयरन क्लोराइड + हाइड्रोजन गैस

सल्फर परखनली के तल पर एक पीले ठोस के रूप में शेष रह जाता है — यह हाइड्रोक्लोरिक अम्ल के साथ अभिक्रिया नहीं करता।

ऐसा क्यों होता है: प्रतिदर्श ‘अ’ मिश्रण है, अत: उसके दोनों घटक अम्ल से अलग-अलग मिलते हैं और ठीक वैसा ही व्यवहार करते हैं जैसा वे अकेले करते। मुक्त हुई गैस हाइड्रोजन है, जो रंगहीन और गंधहीन होती है।
सुरक्षा सर्वोपरि: कभी भी किसी पदार्थ को सीधे न सूँघें। चित्र 8.19 के अनुसार हाथ से गैस को नाक की ओर लाइए, और हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का उपयोग करते समय सावधानी रखिए।
प्र6.
जलती हुई तीली या जलती हुई मोमबत्ती को परखनली के मुख पर लाकर उत्सर्जित गैस का परीक्षण कीजिए (चित्र 8.20, क)। आप क्या देखते हैं? उपर्युक्त चरणों को प्रतिदर्श ‘ब’ के साथ भी दोहराइए (चित्र 8.18, ख और 8.20, ख)।
उत्तर

प्रतिदर्श ‘अ’ की गैस ‘फट्’ की ध्वनि के साथ जलती है — वह हाइड्रोजन है। प्रतिदर्श ‘ब’ की गैस हर दृष्टि से भिन्न है: वह रंगहीन तो है परंतु उसकी गंध तीव्र सड़े हुए अंडे जैसी है, और वह हाइड्रोजन सल्फाइड है।

आयरन सल्फाइड + तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → आयरन क्लोराइड + हाइड्रोजन सल्फाइड
प्रतिदर्श ‘अ’प्रतिदर्श ‘ब’
उत्सर्जित गैसहाइड्रोजनहाइड्रोजन सल्फाइड
गंधगंधहीनसड़े हुए अंडे जैसी
जलने पर‘फट्’ की ध्वनि के साथ जलती है‘फट्’ की ध्वनि नहीं देती
ऐसा क्यों होता है: गैस बता देती है कि अम्ल ने वास्तव में किस पर आक्रमण किया। प्रतिदर्श ‘अ’ में अम्ल को मुक्त लोहा मिला, अत: हाइड्रोजन निकली। प्रतिदर्श ‘ब’ में न मुक्त लोहा है न मुक्त सल्फर — वहाँ अम्ल को यौगिक आयरन सल्फाइड मिला, अत: सल्फरयुक्त गैस निकली। पूर्णतया भिन्न उत्पाद ही इस बात का सबसे स्पष्ट प्रमाण है कि प्रतिदर्श ‘ब’ एक नया पदार्थ है, वही पुराना मिश्रण नहीं।
सुरक्षा सर्वोपरि: हाइड्रोजन सल्फाइड विषैली गैस है। इसीलिए पुस्तक कहती है कि यह क्रियाकलाप धूम्र-कक्ष या हवादार स्थान में किया जाए और गैसों को श्वास में अंदर न लिया जाए।
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