कुतूहल अध्याय 8 चर्चा के कुछ बिंदु

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
क्या प्रतिदर्श ‘अ’ और ‘ब’ एक समान दिखते हैं?
उत्तर

नहीं। प्रतिदर्श ‘अ’ चितकबरा है — पीले सल्फर के बीच काला लोहा; प्रतिदर्श ‘ब’ पूरे पदार्थ में एक समान काला है, जिसका रंग और बनावट सर्वत्र एक जैसी है।

ऐसा क्यों होता है: प्रतिदर्श ‘अ’ में दोनों तत्व अब भी स्वयं के रूप में उपस्थित हैं, अत: आपको एक ही साथ दोनों के स्वरूप दिखते हैं। प्रतिदर्श ‘ब’ में वे मिलकर एक नया पदार्थ, आयरन सल्फाइड, बन चुके हैं, और किसी एक पदार्थ का स्वरूप एक ही हो सकता है।
प्र2.
कौन-सा प्रतिदर्श चुंबकीय गुण प्रदर्शित करता है?
उत्तर

प्रतिदर्श ‘अ’ — इसमें उपस्थित लौह चूर्ण चुंबक की ओर आकर्षित होता है। प्रतिदर्श ‘ब’ बिलकुल आकर्षित नहीं होता।

ऐसा क्यों होता है: चुंबक द्वारा आकर्षित होना लोहे का गुणधर्म है। प्रतिदर्श ‘अ’ मिश्रण है, और मिश्रण का प्रत्येक घटक अपने गुणधर्म बनाए रखता है, अत: उसमें उपस्थित लोहा अब भी चुंबकीय है। प्रतिदर्श ‘ब’ में मुक्त लोहा शेष ही नहीं; लोहा यौगिक आयरन सल्फाइड का भाग बन चुका है, जिसके अपने — और भिन्न — गुणधर्म हैं।
प्र3.
क्या हम प्रतिदर्शों ‘अ’ और ‘ब’ के घटकों को पृथक कर सकते हैं?
उत्तर

प्रतिदर्श ‘अ’: हाँ। प्रतिदर्श ‘ब’: नहीं।

प्रतिदर्शक्या पृथक कर सकते हैं?कैसे और क्यों
‘अ’ (मिश्रण)हाँचुंबक लोहे को खींच लेता है और सल्फर शेष रह जाता है — भौतिक विधि ही पर्याप्त है
‘ब’ (यौगिक)नहींलोहा और सल्फर एक निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से संयोजित हैं; कोई भी भौतिक विधि इसे नहीं तोड़ सकती
ऐसा क्यों होता है: यही एक प्रश्न मिश्रण और यौगिक को अलग करने की व्यावहारिक कसौटी है। मिश्रण के घटक केवल मिश्रित होते हैं और सदैव भौतिक विधि से पुन: प्राप्त किए जा सकते हैं; यौगिक के घटक तत्वों को किसी भी भौतिक विधि द्वारा पृथक नहीं किया जा सकता।
प्र4.
तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल मिलाने पर क्या दोनों प्रतिदर्शों ‘अ’ और ‘ब’ से गैस निकलती है?
उत्तर

हाँ — दोनों से गैस निकलती है। परंतु वे दो भिन्न गैसें हैं।

आयरन + तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → आयरन क्लोराइड + हाइड्रोजन गैस
आयरन सल्फाइड + तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल → आयरन क्लोराइड + हाइड्रोजन सल्फाइड
ऐसा क्यों होता है: प्रतिदर्श ‘अ’ में अम्ल मिश्रण के मुक्त लोहे से अभिक्रिया करता है, जबकि सल्फर बिना अभिक्रिया किए तल पर पड़ा रहता है। प्रतिदर्श ‘ब’ में मुक्त लोहा है ही नहीं; अम्ल पूरे यौगिक आयरन सल्फाइड से अभिक्रिया करता है, और उसमें बँधा सल्फर गैस के साथ बाहर आ जाता है।
प्र5.
दोनों ही स्थितियों में क्या गैसों की गंध एक जैसी है अथवा भिन्न है?
उत्तर

भिन्न। प्रतिदर्श ‘अ’ की गैस रंगहीन और गंधहीन है; प्रतिदर्श ‘ब’ की गैस रंगहीन तो है परंतु उसकी गंध तीव्र सड़े हुए अंडे जैसी है।

ऐसा क्यों होता है: ‘अ’ से निकली गैस हाइड्रोजन है, जो गंधहीन है और ‘फट्’ की ध्वनि के साथ जलती है। ‘ब’ से निकली गैस हाइड्रोजन सल्फाइड है, और उसमें विद्यमान सल्फर ही उसे वह अचूक गंध देता है। अत: यह गंध इस बात का सीधा प्रमाण है कि प्रतिदर्श ‘ब’ का सल्फर अब मुक्त नहीं पड़ा, बल्कि एक नए यौगिक में बँध चुका है।
सुरक्षा सर्वोपरि: गैस को हाथ से नाक की ओर लाकर सूँघिए — परखनली के मुख पर नाक कभी न लगाइए।
प्र6.
इस क्रियाकलाप में प्रयुक्त पदार्थों को मिश्रण, यौगिक और तत्वों में भी वर्गीकृत कीजिए।
उत्तर
तत्वयौगिकमिश्रण
आयरन (लौह चूर्ण), सल्फर (सल्फर चूर्ण), हाइड्रोजनआयरन सल्फाइड (प्रतिदर्श ‘ब’), हाइड्रोक्लोरिक अम्ल, आयरन क्लोराइड, हाइड्रोजन सल्फाइडप्रतिदर्श ‘अ’ (लौह चूर्ण + सल्फर चूर्ण), तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (जल में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल)
प्रत्येक का निर्णय कैसे हुआ: लोहे और सल्फर को और अधिक सरल पदार्थों में विभाजित नहीं किया जा सकता — अत: ये तत्व हैं। प्रतिदर्श ‘अ’ इन्हीं दोनों को केवल मिलाकर बनाया गया है और प्रत्येक अपने गुणधर्म बनाए रखता है — अत: मिश्रण। आयरन सल्फाइड, आयरन क्लोराइड और हाइड्रोजन सल्फाइड — तीनों में दो भिन्न तत्व एक निश्चित अनुपात में रासायनिक रूप से संयोजित हैं और तीनों के अपने नए गुणधर्म हैं — अत: यौगिक। और तनु हाइड्रोक्लोरिक अम्ल यौगिक हाइड्रोक्लोरिक अम्ल का जल में मिश्रण है, अत: ड्रॉपर में जो है वह मिश्रण है, यद्यपि अम्ल स्वयं यौगिक है।
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