प्र1.
आपको क्वथन नली के खुले सिरे के समीप अंदर की ओर जल की छोटी-छोटी बूँदें दिखाई देंगी। यह जल कहाँ से आया? क्या यह शुष्क चीनी में था या वायु की जलवाष्प के संघनन से आया?
उत्तर
यह जल शुष्क चीनी से ही आया है, वायु से नहीं।
हम निश्चित क्यों हो सकते हैं: हम नली को गरम कर रहे हैं। वायु की जलवाष्प किसी ठंडी सतह पर संघनित होती है, गरम सतह पर कभी नहीं — अत: गरम की जा रही क्वथन नली के भीतर वायु से कुछ भी जमा नहीं हो सकता। बूँदें खुले सिरे के पास बनती हैं, जो नली का सबसे ठंडा भाग है, ठीक वहीं जहाँ भीतर से आती वाष्प ठंडी होकर संघनित होगी। और जिस चीनी से हमने आरंभ किया वह शुष्क थी।
अत: गरम करने पर चीनी विघटित हुई है और उसके उत्पादों में से एक जल है। चूँकि जल स्वयं हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बना है, अत: चीनी में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन अवश्य रहे होंगे — चीनी तत्व नहीं हो सकती।