कुतूहल अध्याय 8 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपको क्वथन नली के खुले सिरे के समीप अंदर की ओर जल की छोटी-छोटी बूँदें दिखाई देंगी। यह जल कहाँ से आया? क्या यह शुष्क चीनी में था या वायु की जलवाष्प के संघनन से आया?
उत्तर

यह जल शुष्क चीनी से ही आया है, वायु से नहीं।

हम निश्चित क्यों हो सकते हैं: हम नली को गरम कर रहे हैं। वायु की जलवाष्प किसी ठंडी सतह पर संघनित होती है, गरम सतह पर कभी नहीं — अत: गरम की जा रही क्वथन नली के भीतर वायु से कुछ भी जमा नहीं हो सकता। बूँदें खुले सिरे के पास बनती हैं, जो नली का सबसे ठंडा भाग है, ठीक वहीं जहाँ भीतर से आती वाष्प ठंडी होकर संघनित होगी। और जिस चीनी से हमने आरंभ किया वह शुष्क थी।

अत: गरम करने पर चीनी विघटित हुई है और उसके उत्पादों में से एक जल है। चूँकि जल स्वयं हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से बना है, अत: चीनी में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन अवश्य रहे होंगे — चीनी तत्व नहीं हो सकती।

प्र2.
क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि क्या शेष रहा?
उत्तर

क्वथन नली में चारकोल अर्थात कार्बन शेष रह जाता है। यह वही काला, भुरभुरा ठोस है जिसे आप वाच-ग्लास में निकाल सकते हैं (चित्र 8.12, ग)।

ऐसा क्यों होता है: गरम करने पर चीनी कार्बन और जल में विघटित होती है। जल वाष्प बनकर खुले सिरे के पास संघनित हो जाता है, जबकि कार्बन इस तापमान पर वाष्पित नहीं होता और काले अवशेष के रूप में शेष रह जाता है। इसमें से थोड़ा जलाकर देखिए — यह कोयले की तरह जलता है, और यही इसके कार्बन होने की जाँच है।

पूरे क्रियाकलाप को एक साथ रखिए—

चीनी → कार्बन + जल
और जल → हाइड्रोजन + ऑक्सीजन
अत: चीनी में कार्बन, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन हैं — यह एक यौगिक है।
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