प्र1.
किसी वस्तु, जैसे— पत्थर को धागे से बाँधिए और धीरे से उसे मापक सिलिंडर में लटकाइए। आप क्या देखते हैं?
उत्तर
जल का स्तर ऊपर उठ जाता है — चित्र 9.19 में 50 mL से 55 mL तक। पत्थर ने ठीक अपने आयतन के बराबर जल हटाया अर्थात विस्थापित किया है, अतः स्तर में हुई वृद्धि ही पत्थर का आयतन है।
| क्र.सं. | वस्तु | प्रारंभिक आयतन (mL) (A) | अंतिम आयतन (mL) (B) | विस्थापित जल (mL) (B–A) | वस्तु का आयतन (cm³) |
|---|---|---|---|---|---|
| 1. | पत्थर | 50 mL | 55 mL | 5 mL | 5 cm³ |
| 2. | धातु की चाबी | 50 mL | 52 mL | 2 mL | 2 cm³ |
| 3. | अन्य (काँच की गोली) | 50 mL | 53 mL | 3 mL | 3 cm³ |
पंक्ति 2 और 3 नमूना पाठ्यांक हैं — आपकी अपनी वस्तुओं से जो मिले वही लिखिए। क्रियाकलाप 9.3 से प्राप्त द्रव्यमान के साथ अब वह परिकलन पूरा किया जा सकता है जो अध्याय बताता है —
घनत्व = द्रव्यमान / आयतन
घनत्व = 16.400 g ÷ 5 cm³
पत्थर का घनत्व = 3.28 g/cm³
घनत्व = 16.400 g ÷ 5 cm³
पत्थर का घनत्व = 3.28 g/cm³
विस्थापन विधि क्यों काम करती है: दो वस्तुएँ एक ही समय में एक ही स्थान नहीं घेर सकतीं। पत्थर के भीतर जाते ही जिस स्थान पर पहले जल था उसे कहीं और जाना पड़ता है, और जाने के लिए केवल ऊपर की दिशा बची है। अतः जल की बढ़ी हुई ऊँचाई में ठीक उतना ही आयतन है जितना पत्थर का — और इसी से उस वस्तु का आयतन ज्ञात हो जाता है जिसकी न कोई नियमित आकृति है और न कोई सूत्र।
स्वयं जाँचिए: पत्थर को धीरे से उतारिए और उसे पूरी तरह जल में डूबा रखिए, पर दीवारों से छूने न दीजिए। यदि पत्थर का कुछ भाग सतह के ऊपर रह गया तो आप केवल डूबे भाग का माप लेंगे; और यदि जल छलक गया तो अंतिम पाठ्यांक कम आएगा। इस क्रियाकलाप में धागे का आयतन नगण्य माना गया है।