चित्र में लोग समुद्र तट से प्राकृतिक नमक एकत्रित कर रहे हैं। पीछे समुद्र है, सामने गीली रेत पर नमक की सफेद परत जमी है और धोती पहने एक व्यक्ति झुककर मुट्ठी भर नमक उठा रहा है।
इस चित्र का विज्ञान वही है जो पूरे अध्याय का है। समुद्र का जल शुद्ध जल नहीं है — वह एक विलयन है जिसमें साधारण नमक और अन्य लवण विलेय हैं तथा जल विलायक है। धूप और वायु जल को वाष्पित कर देती है परंतु नमक वाष्पित नहीं हो सकता। जैसे-जैसे जल घटता है, शेष विलयन अधिक से अधिक सांद्र होता जाता है और अंततः संतृप्त हो जाता है। इसके पश्चात जितना भी जल वाष्पित होता है, उतना नमक ठोस रूप में पीछे छूट जाता है और रेत पर सफेद क्रिस्टलों के रूप में दिखाई देने लगता है। लोग वही नमक उठा रहे हैं जो समुद्र ने छोड़ दिया।