यह एक समरूप मिश्रण है। चीनी और नमक जल में पूर्णतया घुल गए हैं, इसलिए द्रव स्वच्छ दिखाई देता है और गिलास में कहीं भी चीनी या नमक अलग से दिखाई नहीं देते।
कुतूहल अध्याय 9 पाठ्य प्रश्न
अद्यतन2026-09-05
प्र1.
क्या आप अनुमान लगा सकते हैं कि यह मिश्रण समरूप है या नहीं (चित्र 9.1)?
उत्तर
ऐसा क्यों होता है: जल के कण चीनी और नमक के कणों को उनके क्रिस्टलों से खींचकर पूरे द्रव में समान रूप से फैला देते हैं। अतः मिश्रण की प्रत्येक बूँद का संघटन एक जैसा होता है — इसी कारण घर पर बने ओ.आर.एस. का प्रत्येक घूँट एक जैसा लगता है, एक घूँट नमकीन और दूसरा मीठा नहीं होता। ऐसे समरूप मिश्रण को विलयन कहते हैं।
प्र2.
क्या होता है जब चॉक के चूर्ण को जल के साथ मिलाया जाता है— क्या यह समरूप मिश्रण बनाता है?
उत्तर
नहीं। चॉक का चूर्ण घुलता नहीं है। वह छोटे-छोटे ठोस कणों के रूप में बना रहता है जिससे जल दूधिया दिखने लगता है, और गिलास को कुछ देर स्थिर रखने पर ये कण धीरे-धीरे तली पर बैठ जाते हैं। यह एक विषमरूप मिश्रण है, ठीक वैसा ही जैसा जल में रेत या लकड़ी का बुरादा (चित्र 9.2)।
ऐसा क्यों होता है: जल के कण चॉक के कणों को एक-दूसरे से अलग नहीं कर पाते — चॉक के भीतर का आकर्षण जल के खिंचाव से कहीं अधिक प्रबल है। अतः चॉक अनेक कणों के गुच्छों के रूप में ही रहता है जो इतने बड़े होते हैं कि दिखाई दें और इतने भारी कि बैठ जाएँ। विलयन में विलेय एकल कणों तक टूट जाता है जो देखे जाने या बैठने के लिए बहुत ही छोटे होते हैं।
स्वयं जाँचिए: गिलास को प्रकाश के सामने रखिए। जल में चीनी का विलयन आर-पार स्वच्छ दिखेगा; जल में चॉक धुँधला दिखेगा। दिखने का यही अंतर समरूप और विषमरूप की सबसे सरल पहचान है।
प्र3.
हम जानते हैं कि वायु एक मिश्रण है। क्या गैसों के मिश्रण को भी विलयन माना जाएगा?
उत्तर
हाँ। वायु नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प तथा अन्य गैसों का समरूप मिश्रण है, और समरूप मिश्रण ही विलयन कहलाता है। गैसें समान रूप से फैली रहती हैं, कोई घटक अलग से दिखाई या पहचाना नहीं जा सकता, और इस कक्ष में कहीं से भी ली गई वायु का संघटन एक जैसा होगा।
अध्याय के अपने नियम के अनुसार — समान अवस्था वाले दो पदार्थों में अधिक मात्रा वाला विलायक होता है — नाइट्रोजन (वायु का लगभग चार-पाँचवाँ भाग) विलायक है तथा ऑक्सीजन और शेष गैसें विलेय हैं।
ऐसा क्यों होता है: गैसों के कण एक-दूसरे से बहुत दूर होते हैं और सब दिशाओं में तेज़ गति से चलते रहते हैं। इसलिए एक ही पात्र में रखी भिन्न गैसें स्वयं ही पूर्णतया मिल जाती हैं और मिली रहती हैं; वे कभी परतों में नहीं बैठतीं जैसे जल में रेत बैठ जाती है।
संकेत: विलयन का द्रव होना आवश्यक नहीं है। वायु गैस-गैस विलयन है, समुद्री जल ठोस-द्रव विलयन है और पीतल जैसी मिश्रातु ठोस-ठोस विलयन है।